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Una News: स्कूलों में पोषण वाटिका की हकीकत परखेगा शिक्षा विभाग
Tue, 10 Mar 2026 06:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 10 Mar 2026 06:35 AM IST
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ऊना। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने और उन्हें प्राकृतिक खेती से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई स्कूल पोषण वाटिका योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। कई स्कूलों में पोषण वाटिकाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अब इनकी स्थिति की जांच करने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार विभाग को कई स्थानों से शिकायतें मिली हैं कि स्कूलों में पोषण वाटिकाओं के नाम पर कुछ पौधे तो लगा दिए गए हैं लेकिन उनकी देखभाल और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। परिणामस्वरूप पौधों से मिलने वाला उत्पादन इतना कम है कि वह बच्चों के मिड-डे मील में उपयोग के लिए भी पर्याप्त नहीं हो पा रहा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई स्कूलों में पोषण वाटिका केवल रिकॉर्ड पूरा करने के लिए तैयार की गई है। कुछ स्थानों पर पौधे लगाए तो गए लेकिन बाद में उनकी देखरेख नहीं हुई। कई स्कूलों में पौधे सूख चुके हैं या उनकी संख्या बेहद कम है। पोषण वाटिका योजना का उद्देश्य था कि स्कूल परिसर में मौसमी सब्जियां, फल और औषधीय पौधे उगाए जाएं, जिनका उपयोग बच्चों के मिड-डे मील में किया जा सके। इससे बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन मिल सके और उन्हें खेती तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक भी बनाया जा सके।
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शिक्षा विभाग ने पहले भी सभी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वे पोषण वाटिकाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करें। जहां जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां छतों पर गमलों में पौधे उगाने या फिर पुराने डिब्बों, टिन और प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग कर पौधरोपण करने के निर्देश दिए गए थे। जांच में सामने आया है कि कई स्कूलों ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। अधिकांश स्कूलों में न तो छतों पर पौधे लगाए गए हैं और न ही व्यर्थ पड़ी बोतलों और डिब्बों का उपयोग किया जा रहा है।
विभाग ने अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूलों में पोषण वाटिकाओं की स्थिति की जांच कराने का फैसला किया। इसके लिए खंड और जिला स्तर के अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश दिए जा सकते हैं। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि स्कूलों में कितने पौधे लगाए गए, उनकी स्थिति क्या और उनसे मिलने वाला उत्पादन बच्चों के भोजन में कितना उपयोग हो रहा।
Iपोषण वाटिका केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका वास्तविक लाभ बच्चों को मिलना जरूरी है। इसलिए आने वाले समय में इस योजना की नियमित निगरानी की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। I
-सोमलाल धीमान, उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग
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जानकारी के अनुसार विभाग को कई स्थानों से शिकायतें मिली हैं कि स्कूलों में पोषण वाटिकाओं के नाम पर कुछ पौधे तो लगा दिए गए हैं लेकिन उनकी देखभाल और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। परिणामस्वरूप पौधों से मिलने वाला उत्पादन इतना कम है कि वह बच्चों के मिड-डे मील में उपयोग के लिए भी पर्याप्त नहीं हो पा रहा।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई स्कूलों में पोषण वाटिका केवल रिकॉर्ड पूरा करने के लिए तैयार की गई है। कुछ स्थानों पर पौधे लगाए तो गए लेकिन बाद में उनकी देखरेख नहीं हुई। कई स्कूलों में पौधे सूख चुके हैं या उनकी संख्या बेहद कम है। पोषण वाटिका योजना का उद्देश्य था कि स्कूल परिसर में मौसमी सब्जियां, फल और औषधीय पौधे उगाए जाएं, जिनका उपयोग बच्चों के मिड-डे मील में किया जा सके। इससे बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन मिल सके और उन्हें खेती तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक भी बनाया जा सके।
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शिक्षा विभाग ने पहले भी सभी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि वे पोषण वाटिकाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करें। जहां जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां छतों पर गमलों में पौधे उगाने या फिर पुराने डिब्बों, टिन और प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग कर पौधरोपण करने के निर्देश दिए गए थे। जांच में सामने आया है कि कई स्कूलों ने इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। अधिकांश स्कूलों में न तो छतों पर पौधे लगाए गए हैं और न ही व्यर्थ पड़ी बोतलों और डिब्बों का उपयोग किया जा रहा है।
विभाग ने अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूलों में पोषण वाटिकाओं की स्थिति की जांच कराने का फैसला किया। इसके लिए खंड और जिला स्तर के अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश दिए जा सकते हैं। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि स्कूलों में कितने पौधे लगाए गए, उनकी स्थिति क्या और उनसे मिलने वाला उत्पादन बच्चों के भोजन में कितना उपयोग हो रहा।
Iपोषण वाटिका केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका वास्तविक लाभ बच्चों को मिलना जरूरी है। इसलिए आने वाले समय में इस योजना की नियमित निगरानी की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। I
-सोमलाल धीमान, उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग