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Una News: उपभोक्ताओं की जेब और सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे मिठाई विक्रेता
Tue, 30 Jun 2026 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 30 Jun 2026 12:35 AM IST
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टाहलीवाल (ऊना)। हरोली विधानसभा क्षेत्र के बाजारों में मिठाई विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं की जेब और सेहत दोनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई दुकानों पर बिक रही मिठाइयों पर न तो निर्माण तिथि अंकित है और न ही समाप्ति तिथि, जिससे ग्राहकों को यह जानने में परेशानी आ रही है कि वे ताजा मिठाई खरीद रहे हैं या कई दिन पुरानी।
उनका कहना है कि बिना निर्माण और समाप्ति तिथि वाले खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषकर गर्मी और बरसात के मौसम में खराब हो चुकी मिठाइयां पेट संबंधी बीमारियों, फूड पॉइजनिंग और अन्य संक्रमणों का कारण बन सकती हैं।
ग्राहकों का आरोप है कि 200 से 500 रुपये प्रति किलो तक बिकने वाली मिठाइयों में दुकानदार डिब्बे का वजन भी साथ में तोल रहे हैं जबकि नियमानुसार मिठाई का वजन अलग होना चाहिए। कई दुकानों पर ग्राहक अनजाने में मिठाई के साथ डिब्बे का भी पैसा चुका रहे हैं, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अधिकांश दुकानों पर मिठाइयों की रेट लिस्ट भी गायब है। ऐसे में ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। गोविंद राजपूत निवासी बाथू का कहना है कि जब खाने की हर चीज पर बनाने और खत्म होने की तारीख अंकित है तो मिठाई वालों को यह नियम लागू क्यों नहीं होता।
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वहीं परमिंद्र रायजादा निवासी ललड़ी का कहना है कि इस मामले में संबंधित विभाग को समय-समय पर जांच करनी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो। उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से नियमित निरीक्षण करने की मांग की है। खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त जगदीश धीमान ने कहा कि मामला ध्यान में आया है। जल्द ही विभिन्न स्थानों का औचक निरीक्षण किया जाएगा और नियमों की अवहेलना करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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उनका कहना है कि बिना निर्माण और समाप्ति तिथि वाले खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषकर गर्मी और बरसात के मौसम में खराब हो चुकी मिठाइयां पेट संबंधी बीमारियों, फूड पॉइजनिंग और अन्य संक्रमणों का कारण बन सकती हैं।
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ग्राहकों का आरोप है कि 200 से 500 रुपये प्रति किलो तक बिकने वाली मिठाइयों में दुकानदार डिब्बे का वजन भी साथ में तोल रहे हैं जबकि नियमानुसार मिठाई का वजन अलग होना चाहिए। कई दुकानों पर ग्राहक अनजाने में मिठाई के साथ डिब्बे का भी पैसा चुका रहे हैं, जिससे उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं अधिकांश दुकानों पर मिठाइयों की रेट लिस्ट भी गायब है। ऐसे में ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। गोविंद राजपूत निवासी बाथू का कहना है कि जब खाने की हर चीज पर बनाने और खत्म होने की तारीख अंकित है तो मिठाई वालों को यह नियम लागू क्यों नहीं होता।
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वहीं परमिंद्र रायजादा निवासी ललड़ी का कहना है कि इस मामले में संबंधित विभाग को समय-समय पर जांच करनी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो। उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से नियमित निरीक्षण करने की मांग की है। खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त जगदीश धीमान ने कहा कि मामला ध्यान में आया है। जल्द ही विभिन्न स्थानों का औचक निरीक्षण किया जाएगा और नियमों की अवहेलना करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।