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Una News: खुले आसमान तले पढ़ाई, एक महीने बाद भी नहीं गिराए असुरक्षित घोषित कमरे
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नारी (ऊना)। गगरेट शिक्षा खंड के सबसे अधिक विद्यार्थियों की संख्या वाले प्राथमिक स्कूल बढेड़ा राजपूतां के भवन की हालत खस्ता है। आलम यह है कि स्कूल के पांच कमरे असुरक्षित घोषित कर दिए गए। प्रशासन ने असुरक्षित कमरों को तुरंत गिराने के निर्देश दिए, लेकिन एक माह का समय बीतने के बावजूद कमरे नहीं गिराए गए। उधर, बच्चों की पढ़ाई पंचायती जमीन पर खुले आसमान तले और बरामदे में हो रही है। स्कूल के अध्यापकों के साथ स्थानीय लोगों ने जल्द से जल्द असुरक्षित कमरों को गिराकर नए तैयार करने की मांग उठाई है। जानकारी के अनुसार बढेड़ा राजपूतां स्कूल की गिनती जिले के सबसे बेहतरीन सुविधाओं वाली पाठशालाओं में होती है।
यहां बच्चों को घर से लाने और छोड़ने के लिए वाहनों का प्रबंध भी है। यही वजह है कि आसपास के करीब सात गांव के बच्चे उक्त स्कूल में पढ़ाई करने के लिए आते हैं। बढेड़ा राजपूतां प्राथमिक स्कूल में इस समय करीब 400 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल के जिन कमरों को असुरक्षित घोषित किया गया है, उनका निर्माण साल 1988 में हुआ। लगभग एक महीना पहले एसडीएम गगरेट की अध्यक्षता में एसडीओ और कनिष्ठ अभियंता लोक निर्माण विभाग, ग्राम पंचायत प्रधान, स्कूल प्रबंधन कमेटी की अध्यक्ष तथा विद्यालय के मुख्य अध्यापक के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद इन कमरों को गिराने के आदेश दे दिए गए। कमरे गिराने के आदेश पर अमल करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी गगरेट ने उप शिक्षा निदेशक प्रारंभिक ऊना को भेज दी। हालांकि अभी तक स्कूल के असुरक्षित कमरों को गिराने की दिशा में प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।
जुगाड़ के सहारे वैकल्पिक व्यवस्था
नए कमरे तैयार होने तक पंचायत प्रधान की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई। परंतु बच्चों को पढ़ाई करने में बेहद परेशानी हो रही है। बच्चों को धूप और वर्षा से बचने के लिए अलग-अलग जगह पर एकत्र करके बैठाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन कमेटी और प्रधान ग्राम पंचायत ने विभाग से यह अपील की है कि शीघ्र असुरक्षित कमरों को गिराने की व्यवस्था की जाए। ताकि नए कमरे बनाकर बच्चों को पढ़ने के लिए सुविधा दी जा सके।
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समाजसेवी ने ली निर्माण की जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत प्रधान राजकुमारी, स्कूल प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया की इसी गांव के प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय पंडित अमरनाथ शर्मा के पुत्र राजेश शर्मा ने असुरक्षित कमरे गिराने के उपरांत नए पांच कमरों का निर्माण अपनी जेब से खर्च करने की जिम्मेदारी ली है, ताकि बच्चे आराम से शिक्षा प्राप्त कर सकें।
बच्चों को बैठने की सुविधा जल्द मिले, इस संबंध में ग्राम पंचायत, प्रधान, और एसएमसी अध्यक्ष मेरे कार्यालय में आकर अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर कार्य शुरू कर सकते हैं।
देवेंद्र चंदेल, उपनिदेशक, जिला प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा विभाग
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यहां बच्चों को घर से लाने और छोड़ने के लिए वाहनों का प्रबंध भी है। यही वजह है कि आसपास के करीब सात गांव के बच्चे उक्त स्कूल में पढ़ाई करने के लिए आते हैं। बढेड़ा राजपूतां प्राथमिक स्कूल में इस समय करीब 400 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल के जिन कमरों को असुरक्षित घोषित किया गया है, उनका निर्माण साल 1988 में हुआ। लगभग एक महीना पहले एसडीएम गगरेट की अध्यक्षता में एसडीओ और कनिष्ठ अभियंता लोक निर्माण विभाग, ग्राम पंचायत प्रधान, स्कूल प्रबंधन कमेटी की अध्यक्ष तथा विद्यालय के मुख्य अध्यापक के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद इन कमरों को गिराने के आदेश दे दिए गए। कमरे गिराने के आदेश पर अमल करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी गगरेट ने उप शिक्षा निदेशक प्रारंभिक ऊना को भेज दी। हालांकि अभी तक स्कूल के असुरक्षित कमरों को गिराने की दिशा में प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई।
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जुगाड़ के सहारे वैकल्पिक व्यवस्था
नए कमरे तैयार होने तक पंचायत प्रधान की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई। परंतु बच्चों को पढ़ाई करने में बेहद परेशानी हो रही है। बच्चों को धूप और वर्षा से बचने के लिए अलग-अलग जगह पर एकत्र करके बैठाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन कमेटी और प्रधान ग्राम पंचायत ने विभाग से यह अपील की है कि शीघ्र असुरक्षित कमरों को गिराने की व्यवस्था की जाए। ताकि नए कमरे बनाकर बच्चों को पढ़ने के लिए सुविधा दी जा सके।
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समाजसेवी ने ली निर्माण की जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत प्रधान राजकुमारी, स्कूल प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने बताया की इसी गांव के प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय पंडित अमरनाथ शर्मा के पुत्र राजेश शर्मा ने असुरक्षित कमरे गिराने के उपरांत नए पांच कमरों का निर्माण अपनी जेब से खर्च करने की जिम्मेदारी ली है, ताकि बच्चे आराम से शिक्षा प्राप्त कर सकें।
बच्चों को बैठने की सुविधा जल्द मिले, इस संबंध में ग्राम पंचायत, प्रधान, और एसएमसी अध्यक्ष मेरे कार्यालय में आकर अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर कार्य शुरू कर सकते हैं।
देवेंद्र चंदेल, उपनिदेशक, जिला प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा विभाग