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पिसाचिन से यूक्रेन बॉर्डर के लिए निकला झंबर का पुनीत
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यूक्रेन से ऊना अपने निवास स्थान पंहुचे प्रथम का स्वागत करते परिजन।संवाद
- फोटो : Una
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ऊना। यूक्रेन में युद्ध से प्रभावित पिसाचिन क्षेत्र में फंसे विद्यार्थी अब अपने स्तर पर बसें बुक करके बॉर्डर की ओर निकल पड़े हैं। इन विद्यार्थियों में ऊजा जिले के झंबर के सुरजेड़ा गांव का पुनीत शर्मा भी शामिल हैं। पुनीत शनिवार रात को बॉर्डर के निकला है। मंगलवार तक उसके यूक्रेन की सीमा तक पहुंचने की उम्मीद है। दरअसल, यूक्रेन में इस समय बर्फबारी हो रही है और इस कारण विद्यार्थियों को ले जा रही बस की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
वहीं पिसाचिन में भूखे पेट दिन काट रहे इन विद्यार्थियों को बस मिलने के बाद खाने को लेकर भी हल्की राहत मिली। बताया जा रहा है कि विद्यार्थियों ने रास्ते में पड़ते गांवों में स्थित दुकानों से खाने का सामान खरीदकर पेट भरा। पुनीत के पिता रविंदर शर्मा ने बताया पिसाचिन में बच्चों की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। गोलीबारी और बमबारी के बीच बच्चे भूखे पेट ही एक स्कूल के हॉस्टल में दिन काट रहे थे। बॉर्डर के लिए बस मिलने से सभी बच्चों को राहत मिली है। साथ ही उनकी चिंता भी कम हुई है। कहा कि बच्चों को बॉर्डर पहुंचने में अभी दो दिन और लगेंगे। रविंदर शर्मा ने कहा कि बच्चों को सरकार ने कोई राहत नहीं मिली और उन्हें अपने खर्च पर गोलीबारी के बीच बॉर्डर के लिए बस लेकर निकलना पड़ा।
बॉक्स
रोमानिया पहुंचा बंगाणा का कार्तिक
पिसाचिन से शुक्रवार शाम को निकला बंगाणा का कार्तिक राणा रविवार को रोमानिया पहुंच गया। यूक्रेन से बेटे के सकुशल बाहर निकलने पर कार्तिक की मां सरोज राणा ने राहत की सांस लेते हुए भगवान का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि कार्तिक से उनकी दो दिन से कोई बात नहीं हो पाई और केवल एक वॉयस मैसेज से उसने बताया कि वह रोमानिया में है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें कार्तिक के सुरक्षित भारत लौटने का इंतजार है।
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वहीं पिसाचिन में भूखे पेट दिन काट रहे इन विद्यार्थियों को बस मिलने के बाद खाने को लेकर भी हल्की राहत मिली। बताया जा रहा है कि विद्यार्थियों ने रास्ते में पड़ते गांवों में स्थित दुकानों से खाने का सामान खरीदकर पेट भरा। पुनीत के पिता रविंदर शर्मा ने बताया पिसाचिन में बच्चों की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। गोलीबारी और बमबारी के बीच बच्चे भूखे पेट ही एक स्कूल के हॉस्टल में दिन काट रहे थे। बॉर्डर के लिए बस मिलने से सभी बच्चों को राहत मिली है। साथ ही उनकी चिंता भी कम हुई है। कहा कि बच्चों को बॉर्डर पहुंचने में अभी दो दिन और लगेंगे। रविंदर शर्मा ने कहा कि बच्चों को सरकार ने कोई राहत नहीं मिली और उन्हें अपने खर्च पर गोलीबारी के बीच बॉर्डर के लिए बस लेकर निकलना पड़ा।
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रोमानिया पहुंचा बंगाणा का कार्तिक
पिसाचिन से शुक्रवार शाम को निकला बंगाणा का कार्तिक राणा रविवार को रोमानिया पहुंच गया। यूक्रेन से बेटे के सकुशल बाहर निकलने पर कार्तिक की मां सरोज राणा ने राहत की सांस लेते हुए भगवान का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि कार्तिक से उनकी दो दिन से कोई बात नहीं हो पाई और केवल एक वॉयस मैसेज से उसने बताया कि वह रोमानिया में है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें कार्तिक के सुरक्षित भारत लौटने का इंतजार है।
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