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विशेष ओलंपिक विजेता अनदेखी पर खफा, नहीं मिल रहा मान-सम्मान

Mon, 06 Sep 2021 12:14 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Sep 2021 12:14 AM IST
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Special Olympics winner upset over ignoring, not getting respect and money
संतोषगढ़ (ऊना)। ओलंपिक और पैरालंपिक विजेताओं पर लाखों करोड़ों की धनवर्षा करने वाली केंद्र और राज्य सरकारें विशेष ओलंपिक विजेताओं को उचित सम्मान देने से कतरा रही हैं।
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ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों में मेडल हासिल करने वालों को सरकारी नौकरी के साथ सरकार की तरफ से लाखों-करोड़ों की राशि इनाम स्वरूप दी जा रहा है। वहीं विशेष ओलंपिक विजेताओं के मेडल किसी को भी नजर नहीं आ रहे हैं। बौद्धिक और शारीरिक विकलांगता से जूझ रहे देश के हजारों बच्चों ने विशेष ओलंपिक में सैकड़ों गोल्ड, रजत और कांस्य पदक जीत देश का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। अकेले वर्ष 2019 में आबू धाबी में 15वां समर स्पेशल ओलंपिक हुआ। इसमें 172 देशों के करीब 7500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इस टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों ने स्केटिंग, पॉवर लिफ्टिंग जैसे कई खेलों में 85 गोल्ड, 154 रजत और 129 कांस्य समेत 368 मेडल जीत कर 172 प्रतिभागी देशों में भारत को पहले स्थान पर पहुंचाया।
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इससे पहले भी विशेष ओलंपिक में हिमाचल सहित देश के अलग-अलग राज्यों के अक्षम बच्चों ने अपनी प्रतिभा के दम पर मेडल हासिल किए हैं। मेडल जीतने वाले इन खिलाड़ियों पर किसी भी सरकार की नजर नहीं पड़ी। मेडलों के साथ ही खिलाड़ी भी गुमनामी के अंधेरे में खो गए। हिमाचल से ही दर्जनों ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने विशेष ओलंपिक खेलों में पदक जीते हैं।
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स्पेशल ओलंपिक में देश को गोल्ड और दूसरे पदक दिलाने वाले खिलाड़ी केंद्र और हिमाचल सरकार की अनदेखी से खफा हैं। वर्ष 2015 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली ऊना के संतोषगढ़ की विशाखा शर्मा समेत छह विशेष खिलाड़ियों को हिमाचल सरकार ने दो साल बाद प्रोत्साहन राशि दी। वह भी मात्र 50 हजार। नाममात्र राशि मिलने से नाराज खिलाड़ियों और उनके परिजनों ने सरकार चेक लेने से इंकार कर दिया। निनाद प्रभाकर, विशाखा शर्मा, राकेश कुमार, प्रभा कुमारी, जीवन कुमार, योशिता कुमारी, पलक भारद्वाज, शिखा रानी, रघुनाथ सिंह कृष्ण, राहुल, राकेश, सुलोचना सहित दर्जनों ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं जिन्होंने विशेष ओलंपिक में एथलेटिक्स समेत विभिन्न स्पर्धाओं में देश के लिए पदक जीते हैं।

अभिभावकों का आरोप, सरकार कर रही अनदेखी
विशाखा के पिता सुलेख कुमार ने बताया कि विशाखा ने 2015 में अमेरिकी के लॉस एंजिल्स में 400 मीटर दौड़ में गोल्ड हासिल किया। निनाद प्रभाकर के पिता रामनारायण प्रभाकर का आरोप है कि निनाद ने 2009 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आयोजित विशेष ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत कर देश असैा प्रदेश का नाम रोशन किया। उनका कहना है कि बच्चों को प्रदेश सरकार उचित प्रोत्साहन तक नहीं दे पाई। सरकार के दिव्यांगों के उत्थान के दावे खोखले नजर आ रहे हैं। वर्ष 2018 में चंद बच्चों को 50-50 हजार के चेक देना, इन प्रतिभाओं का मजाक उड़ाना है। प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में ही इससे ज्यादा इनामी राशि दी जाती है।
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