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Una News: डीजल महंगा होने से निजी बस कारोबार पर संकट

Wed, 20 May 2026 05:58 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Wed, 20 May 2026 05:58 PM IST
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Private bus business in trouble due to high diesel prices
महंगाई, टैक्स और रखरखाव के बोझ के बीच प्रतिदिन का खर्च 5000 से बढ़कर 5600 रुपये पहुंचा
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एडब्लू के दाम बढ़ने से मासिक खर्च में 2000 रुपए तक का इजाफा, ऑपरेटरों ने जताई चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने निजी बस ट्रांसपोर्ट कारोबार की रफ्तार धीमी कर दी है। पहले से ही महंगाई, टैक्स और वाहनों के रखरखाव के बढ़ते खर्च से जूझ रहे निजी बस ऑपरेटर अब डीजल और एडब्लू की महंगी दरों से और अधिक परेशान हैं।
निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि जिस बस का प्रतिदिन डीजल खर्च पहले करीब 5000 रुपये आता था, वह अब बढ़कर लगभग 5600 रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा बसों में इस्तेमाल होने वाले एडब्लू के दामों में भी करीब 600 रुपये प्रति बकेट की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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ऑपरेटरों के अनुसार, एक बस में महीनेभर में करीब चार बकेट एडब्लू की खपत होती है। पहले इसका मासिक खर्च लगभग 7200 रुपये आता था, जो अब बढ़कर 9200 रुपये तक पहुंच गया है।
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निजी बस संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से डीजल और अन्य संबंधित खर्चों पर राहत देने की मांग की है।

बाक्स
डीजल मंहगा होने का असर निजी बसों के संचालन खर्च पर भी पड़ा है। डीजल के साथ-साथ अब एडब्लू भी मंहगा हो गया है। ऐसे में कारोबार को पूरा गणित बिगड़ गया। सरकार न्यूनतम किराया को 15 रुपये कर दे तो इससे राहत मिल सकती है।- मोहिंदर मनकोटिया, अध्यक्ष, बस ऑपरेटर वेलफेयर सोसायटी ऊना
सरकार पंजाब की तर्ज टैक्स व्यवस्था लागू कर दे तो भी कुछ राहत मिल सकती है। डीजल महंगा हाेने के बाद से कारोबार पर काफी असर पड़ा है । डीजल के साथ गाड़ियों के अन्य खर्च भी बढ़ गए हैं। -रविंद्र शर्मा ऋषि, बस ऑपरेटर
केवल डीजल ही नहीं इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स, टायर और अन्य जरूरी सामान भी लगातार महंगे हो रहे हैं। इसके बावजूद बस किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में आमदनी और खर्च के बीच का अंतर तेजी से बढ़ रहा है। -सुकेश ठाकुर,बस ऑपरेटर


लगातार बढ़ती लागत के कारण बसों का संचालन दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। डीजल के दाम बढ़ने से लंबी दूरी के रूट सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। रोजाना सैकड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च होने से छोटे ऑपरेटर आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं।- वरिंद्र मंडयाल, बस ऑपरेटर
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