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Una News: यूट्यूब से निखारा हुनर, अब घर बैठे कमाई
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क्रोशिया की मदद से सलोई की सीता द्वारा बनाया गया वॉल हैंगिंग। संवाद
ऊना। बचपन में सीखा क्रोशिया का हुनर शादी के बाद जिम्मेदारियों के बीच छूट गया था। उपमंडल अंब के सलोई गांव की सीता पत्नी बलविंद्र कुमार ने यूट्यूब के जरिये इस हुनर को फिर निखारा और अब इसे घर बैठे कमाई का जरिया बना लिया है।
वह क्रोशिया से कई तरह के उत्पाद तैयार कर हर माह करीब पांच हजार रुपये कमा रही हैं। सीता ने बताया कि बचपन में अपनी बुआ को क्रोशिया चलाते देखकर उन्होंने इसे शौक के तौर पर सीखा था।
शादी के बाद घर-गृहस्थी में व्यस्त होने से यह काम छूट गया। बाद में स्मार्टफोन पर क्रोशिया से उत्पाद बनाने के वीडियो देखे तो नए डिजाइन और आइडिया मिले। इसके बाद उन्होंने दोबारा क्रोशिया का काम शुरू किया।
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अब वह बाल गोपाल की अलग-अलग आकार की पोशाकें, झूले, स्वेटर, जैकेट, डोरमैट, शॉलपोश, फ्रिज-टेबल कवर, मिरर वर्क वाली वॉल हैंगिंग और लेडीज पर्स तैयार करती हैं। महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह अंब से जुड़ने के बाद उनके उत्पादों को पहचान मिली। ऊना और आसपास के क्षेत्रों से उन्हें घर बैठे ऑर्डर मिलने लगे हैं।
सर्दियों में ऊनी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। सीता के अनुसार इस काम से होने वाली आय से वह घर की छोटी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं।
महीने में मिल रहे पांच से आठ ऑर्डर
महीने में पांच से आठ ऑर्डर मिल जाते हैं। बाल गोपाल की पोशाकें 80 से 200 रुपये, ऊनी जैकेट 600 रुपये और सजावटी सामान 200 से 500 रुपये तक में बिकता है। एक ऑर्डर तैयार करने में तीन से पांच दिन लगते हैं। पोशाकों में 20 से 50 रुपये और जैकेट में 200 से 300 रुपये तक की बचत हो जाती है।
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वह क्रोशिया से कई तरह के उत्पाद तैयार कर हर माह करीब पांच हजार रुपये कमा रही हैं। सीता ने बताया कि बचपन में अपनी बुआ को क्रोशिया चलाते देखकर उन्होंने इसे शौक के तौर पर सीखा था।
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शादी के बाद घर-गृहस्थी में व्यस्त होने से यह काम छूट गया। बाद में स्मार्टफोन पर क्रोशिया से उत्पाद बनाने के वीडियो देखे तो नए डिजाइन और आइडिया मिले। इसके बाद उन्होंने दोबारा क्रोशिया का काम शुरू किया।
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अब वह बाल गोपाल की अलग-अलग आकार की पोशाकें, झूले, स्वेटर, जैकेट, डोरमैट, शॉलपोश, फ्रिज-टेबल कवर, मिरर वर्क वाली वॉल हैंगिंग और लेडीज पर्स तैयार करती हैं। महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह अंब से जुड़ने के बाद उनके उत्पादों को पहचान मिली। ऊना और आसपास के क्षेत्रों से उन्हें घर बैठे ऑर्डर मिलने लगे हैं।
सर्दियों में ऊनी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। सीता के अनुसार इस काम से होने वाली आय से वह घर की छोटी जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं।
महीने में मिल रहे पांच से आठ ऑर्डर
महीने में पांच से आठ ऑर्डर मिल जाते हैं। बाल गोपाल की पोशाकें 80 से 200 रुपये, ऊनी जैकेट 600 रुपये और सजावटी सामान 200 से 500 रुपये तक में बिकता है। एक ऑर्डर तैयार करने में तीन से पांच दिन लगते हैं। पोशाकों में 20 से 50 रुपये और जैकेट में 200 से 300 रुपये तक की बचत हो जाती है।

क्रोशिया की मदद से सलोई की सीता द्वारा बनाया गया वॉल हैंगिंग। संवाद