{"_id":"69c83205e8793e3c9c0273cd","slug":"poonam-lata-became-self-reliant-by-making-biscuits-from-millet-flour-and-jaggery-una-news-c-93-1-una1002-186300-2026-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: मिलेट आटा और देसी गुड़ के बिस्कुट बनाकर पूनम लता बनीं आत्मनिर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: मिलेट आटा और देसी गुड़ के बिस्कुट बनाकर पूनम लता बनीं आत्मनिर्भर
Sun, 29 Mar 2026 01:24 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 29 Mar 2026 01:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नारी (ऊना)। बटूही गांव की पूनम लता ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए मिलेट आटा और देसी गुड़ से बिस्कुट तैयार कर न केवल अपनी आय का साधन बनाया बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ दिया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मास्टर ट्रेनर से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पूनम ने घर तक सीमित रहने के बजाय स्वरोजगार का रास्ता चुना।
पूनम लता ज्वार, बाजरा, मक्की, सफेद व काला गेहूं, मंडुवा (रागी) जैसे विभिन्न अनाज का आटा स्वयं घर पर तैयार करती हैं। इन प्राकृतिक और पौष्टिक अनाज में देसी गुड़ मिलाकर घर पर ही बिस्कुट बनाए जाते हैं और उन्हें आकर्षक डिब्बों में पैक कर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है। ये बिस्कुट स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार पूनम अनाज की खेती स्वयं करती हैं और अच्छी देखभाल से गुणवत्तापूर्ण फसल प्राप्त करती हैं। तैयार बिस्कुटों की स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग है। इसके अलावा खंड विकास अधिकारी ऊना की ओर से आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में इनके स्टॉल लगाए जाते हैं, जहां उत्पादों की अच्छी बिक्री होती है। आजीविका मिशन से जुड़ाव के चलते ऑनलाइन माध्यम से भी इनके उत्पादों की बिक्री हो रही है। पूनम लता को इस कार्य में लगभग 40 प्रतिशत तक लाभ मिल रहा है और औसतन 12 से 15 हजार रुपये मासिक आय हो रही है। इससे उनके परिवार के खर्चों में सहयोग मिल रहा है।
विज्ञापन
पूनम ने अपने साथ कंचन, रामादेवी, सीमा, सरोज, पूजा और उषा सहित आठ महिलाओं को भी जोड़ा है और उन्हें प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया है। इन महिलाओं की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। पूनम का कहना है कि जैसे-जैसे कार्य में दक्षता बढ़ेगी, उत्पाद की गुणवत्ता और मूल्य दोनों में सुधार होगा।
मीना ठाकुर का कहना है कि आसपास के गांवों की महिलाएं, जो पहले केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, अब आत्मनिर्भर बन रही हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है बल्कि उनके जीवन स्तर में भी लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।
विज्ञापन
पूनम लता ज्वार, बाजरा, मक्की, सफेद व काला गेहूं, मंडुवा (रागी) जैसे विभिन्न अनाज का आटा स्वयं घर पर तैयार करती हैं। इन प्राकृतिक और पौष्टिक अनाज में देसी गुड़ मिलाकर घर पर ही बिस्कुट बनाए जाते हैं और उन्हें आकर्षक डिब्बों में पैक कर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है। ये बिस्कुट स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जा रहे हैं।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार पूनम अनाज की खेती स्वयं करती हैं और अच्छी देखभाल से गुणवत्तापूर्ण फसल प्राप्त करती हैं। तैयार बिस्कुटों की स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग है। इसके अलावा खंड विकास अधिकारी ऊना की ओर से आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में इनके स्टॉल लगाए जाते हैं, जहां उत्पादों की अच्छी बिक्री होती है। आजीविका मिशन से जुड़ाव के चलते ऑनलाइन माध्यम से भी इनके उत्पादों की बिक्री हो रही है। पूनम लता को इस कार्य में लगभग 40 प्रतिशत तक लाभ मिल रहा है और औसतन 12 से 15 हजार रुपये मासिक आय हो रही है। इससे उनके परिवार के खर्चों में सहयोग मिल रहा है।
विज्ञापन
पूनम ने अपने साथ कंचन, रामादेवी, सीमा, सरोज, पूजा और उषा सहित आठ महिलाओं को भी जोड़ा है और उन्हें प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया है। इन महिलाओं की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। पूनम का कहना है कि जैसे-जैसे कार्य में दक्षता बढ़ेगी, उत्पाद की गुणवत्ता और मूल्य दोनों में सुधार होगा।
मीना ठाकुर का कहना है कि आसपास के गांवों की महिलाएं, जो पहले केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, अब आत्मनिर्भर बन रही हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है बल्कि उनके जीवन स्तर में भी लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।