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Una News: प्राथमिक पाठशाला ऊना के शौचालय में गंदगी का अंबार, कैसे संवरेगा देश का भविष्य

Wed, 21 Aug 2024 03:27 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Wed, 21 Aug 2024 03:27 AM IST
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Piles of filth in the toilet of primary school Una, how will the future of the country improve?
ऊना। शहर के बीच में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला ऊना में दूरदराज से विद्यार्थी पढ़ाई करने आते हैं। इस स्कूल की आधुनिक इमारत है। इसके बावजूद शौचालय से लेकर अन्य कई महत्वपूर्ण सुविधाओं की स्थिति नर्क से भी बदतर है।
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विद्यार्थियों के लिए टूटे-फूचे शौचालय हैं। वहां की हालत देखकर और बदबू से कोई अच्छा-भला इंसान भी बीमार पड़ जाए। वहां वर्षों से सफाई नहीं हुई लगती। सवाल है कि शिक्षा विभाग बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ी डींगे हांकता है, निरीक्षण भी होते आए हैं, लेकिन सुधार शून्य है।
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जानकारी के अनुसार राजकीय प्राथमिक पाठशाला ऊना में पांचवीं कक्षा तक 200 से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। शहर का स्कूल होने के कारण यहां पर कई आसपास के गांवों से भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करने पहुंचते हैं। इस स्कूल की आधुनिक इमारत हर किसी के आकर्षण का केंद्र है, लेकिन हैरत की बात है कि यहां बच्चों के लिए शौचालय तक की सुविधा नहीं है। बच्चे आज भी शौच के लिए गंदे पानी के लिए बने नाले को पार करके वर्षों पुराने खस्ताहाल शौचालय में जाते हैं। वहां न तो पानी की कोई सुविधा है और निकासी भी पूरी तरह बंद है।
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अमर उजाला संवाददाता ने जब बच्चों से पूछा कि क्या आप यहीं आते हो कोई और बेहतर शौचालय स्कूल में नहीं है। इस पर बच्चों ने कहा कि जब से पढ़ाई कर रहे हैं, यही आते हैं। यहां पानी नहीं है, इसलिए पेयजल के लिए लगे नलों से हाथ धोते हैं। वहीं, शौच पैरों को न लगे इसके लिए पैर रखने को दो ईंटें रखी गई हैं। कई साल पुराने शौचालय की हालत यह है कि कभी भी इसकी छत गिर सकती है। आसपास गंदगी का आलम है। पेयजल के लिए बनाई गैलरी के पास ही गंदगी का अंबार लगा है। पॉलिथीन से लेकर हर प्रकार की गंदगी फेंकी गई है, लेकिन उसकी सफाई आज तक नहीं हुई।

स्कूल के साथ दो नए शौचालय पर लटका है ताला

प्राथमिक स्कूल ऊना के साथ ही दो नए शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन वहां 24 घंटे ताला लटका रहता है। उसके पास ही पेयजल के लिए नल लगाए गए हैं। स्कूल की प्रधानाचार्य मनोरमा देवी से इस बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि नए शौचालय बीआरसी भवन के हैं। वहीं, शहर के बीच स्कूल होने के कारण कोई भी उन्हें इस्तेमाल करने आ जाता है, इसलिए वहां ताला लगाया गया है। लेकिन सवाल उठता है कि स्कूल के समय में बच्चों को उनका लाभ क्यों नहीं दिया जाता, क्यों उनके जर्जर होने का इंतजार किया जा रहा है।


कन्या स्कूल की बच्चियां पुराने भवन पर निर्भर

प्राथमिक स्कूल की इमारत में भूतल और पहली मंजिल पर पांचवीं तक कक्षाएं संचालित होती है। वहीं, दूसरी मंजिल पर कन्या स्कूल की कुछ कक्षाएं चलती हैं। हैरत की बात है कि उन बच्चियों के लिए भी भवन में शौचालय अभी तक निर्मित नहीं हुए। उन्हें 300 मीटर दूर स्थित स्कूल के पुराने भवन को जाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
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