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प्याज के दाम ने सेब को भी पछाड़ा
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बंगाणा (ऊना)। प्याज के जायके ने फिर से गृहिणियों के आंसू निकालने शुरू कर दिए हैं। इन दिनों दुकानों पर 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज बिक रहा है। प्याज की कीमत में आए भारी उछाल ने सेब की कीमतों को भी पछाड़ दिया है।
की दुकानों पर जहां सेब 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है वहीं प्याज 75 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। प्याज की बढ़ी कीमत ने गृहिणियों का रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। अभी कुछ ही दिन पहले 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अचानक 80 रुपये तक पहुंच गया है जिससे गरीब परिवारों के लोग प्याज से दूरी बनाने लग गए हैं। पिछले वर्ष सूखे के कारण और इस वर्ष अत्यधिक बरसात के कारण प्याज की कीमतों में उछाल आया है।
अनुमान है कि प्याज की कीमतें अभी और रुलाएंगी। अन्य सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। गोभी 70 रुपये, टमाटर 60, शिमला मिर्च 80, बेंगन 40, आलू 20, कद्दू और घीया 40, भिंडी 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जा रही है। गरीब परिवारों के लिए प्याज महत्वपूर्ण मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है, लेकिन हर तीसरे वर्ष प्याज लोगों को आंसू बहाने पर मजबूर कर रहा है। लोगों में रोष है कि देश और प्रदेश की सरकारें इस दिशा में प्रयास नहीं कर पा रही हैं। लोगों में चर्चा है कि 15 से 20 रुपये बिकने वाला प्याज सेब से भी मंहगा हो गया है।
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सब्जी और प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को सोचने के लिए विवश कर दिया है कि भविष्य में भी अगर यही कीमतें रहीं तो वह परिवारों का पोषण किस तरह करेंगे। लगातार बढ़ रही मंहगाई की मार ने गरीब लोगों की कमर तोड़ दी है। लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की कि प्याज सस्ते दर में उपलब्ध करवाया जाए।
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की दुकानों पर जहां सेब 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है वहीं प्याज 75 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। प्याज की बढ़ी कीमत ने गृहिणियों का रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। अभी कुछ ही दिन पहले 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अचानक 80 रुपये तक पहुंच गया है जिससे गरीब परिवारों के लोग प्याज से दूरी बनाने लग गए हैं। पिछले वर्ष सूखे के कारण और इस वर्ष अत्यधिक बरसात के कारण प्याज की कीमतों में उछाल आया है।
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अनुमान है कि प्याज की कीमतें अभी और रुलाएंगी। अन्य सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। गोभी 70 रुपये, टमाटर 60, शिमला मिर्च 80, बेंगन 40, आलू 20, कद्दू और घीया 40, भिंडी 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जा रही है। गरीब परिवारों के लिए प्याज महत्वपूर्ण मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है, लेकिन हर तीसरे वर्ष प्याज लोगों को आंसू बहाने पर मजबूर कर रहा है। लोगों में रोष है कि देश और प्रदेश की सरकारें इस दिशा में प्रयास नहीं कर पा रही हैं। लोगों में चर्चा है कि 15 से 20 रुपये बिकने वाला प्याज सेब से भी मंहगा हो गया है।
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सब्जी और प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी को सोचने के लिए विवश कर दिया है कि भविष्य में भी अगर यही कीमतें रहीं तो वह परिवारों का पोषण किस तरह करेंगे। लगातार बढ़ रही मंहगाई की मार ने गरीब लोगों की कमर तोड़ दी है। लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की कि प्याज सस्ते दर में उपलब्ध करवाया जाए।