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डीए की किस्त एकमुश्त जारी करे सरकार : कैलाश
Fri, 04 Sep 2026 12:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 04 Sep 2026 12:45 AM IST
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अंब(ऊना)। हिमाचल पेंशनर्स संघ अंब इकाई की मासिक बैठक देवी मंदिर अंब में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष कैलाश चंद ने की। बैठक में उपस्थित पेंशनरों ने हिमाचल प्रदेश सरकार से अपनी लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की।
संघ ने सरकार से मांग की कि पेंशनरों का जुलाई 2023 का 1 प्रतिशत और जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक का 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) का बकाया एकमुश्त जारी किया जाए।
इसके साथ ही 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और कम्यूटेशन राशि का भुगतान भी तुरंत किया जाए। वक्ताओं ने दुख जताते हुए कहा कि आर्थिक लाभ न मिलने के कारण कई पेंशनर दुनिया छोड़ चुके हैं।
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सेवानिवृत्ति के बाद भी बुजुर्ग पेंशनरों को अपने हक के पैसों के लिए भटकना पड़ रहा है जबकि माननीय अपनी सैलरी में हर वर्ष भारी बढ़ोतरी का लाभ ले रहे हैं।
प्रस्ताव पारित करते हुए संघ के महासचिव देव राज शांडिल ने कहा कि पेंशनरों के इंडोर मेडिकल बिल लंबे समय से कार्यालयों में लंबित पड़े हैं, जिनके लिए समुचित बजट आवंटित नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने चेताया कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो पेंशनरों को अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
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संघ ने सरकार से मांग की कि पेंशनरों का जुलाई 2023 का 1 प्रतिशत और जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक का 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) का बकाया एकमुश्त जारी किया जाए।
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इसके साथ ही 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और कम्यूटेशन राशि का भुगतान भी तुरंत किया जाए। वक्ताओं ने दुख जताते हुए कहा कि आर्थिक लाभ न मिलने के कारण कई पेंशनर दुनिया छोड़ चुके हैं।
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सेवानिवृत्ति के बाद भी बुजुर्ग पेंशनरों को अपने हक के पैसों के लिए भटकना पड़ रहा है जबकि माननीय अपनी सैलरी में हर वर्ष भारी बढ़ोतरी का लाभ ले रहे हैं।
प्रस्ताव पारित करते हुए संघ के महासचिव देव राज शांडिल ने कहा कि पेंशनरों के इंडोर मेडिकल बिल लंबे समय से कार्यालयों में लंबित पड़े हैं, जिनके लिए समुचित बजट आवंटित नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने चेताया कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो पेंशनरों को अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।