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Una News: नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के आरोपों से आरोपी बरी
Fri, 04 Sep 2026 12:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 04 Sep 2026 12:52 AM IST
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दुलैहड़ (ऊना)। विशेष न्यायाधीश ऊना की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और उसे बहला फुसलाकर ले जाने के आरोप में चल रहे मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। फैसले में अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पीड़िता के घटना के समय नाबालिग होने का तथ्य कानूनी रूप से संदेह से परे साबित नहीं कर सका। वहीं, जिरह के दौरान पीड़िता के अपने बयान में आरोपी के साथ अपनी मर्जी से जाने और किसी तरह की जबरदस्ती नहीं होने की बात भी सामने आई। अदालत ने आरोपी को नाबालिग से दुष्कर्म और उसे बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोपों से बरी किया है। अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों में रही कमियों, गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पीड़िता की उम्र साबित करने में हुई चूक को महत्वपूर्ण माना। सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान और जिरह को अदालत ने भी विचार में लिया। जिरह के दौरान पीड़िता ने स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी से नंगल गई थी। मेडिकल जांच के दौरान दिए गए बयान में भी शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बनने की बात सामने आई थी। अभियोजन ने पीड़िता की जन्मतिथि 18 जून 2006 दर्शाने वाला जन्म प्रमाणपत्र अदालत में पेश किया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि पीड़िता उस समय बीए में पढ़ रही थी और उसकी दसवीं कक्षा की मार्कशीट को जांच में कब्जे में लेकर अदालत में पेश नहीं किया गया। फैसले में सुप्रीम कोर्ट और प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए आयु निर्धारण से जुड़े साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। जन्म संबंधी रिकॉर्ड में सामने आई कमियों के चलते अदालत ने माना कि अभियोजन पीड़िता के नाबालिग होने को निर्णायक रूप से साबित नहीं कर सका। फॉरेंसिक साक्ष्यों को लेकर भी अदालत ने अभियोजन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। मेडिकल जांच के दौरान लिए गए सैंपल किसे सौंपे गए, इसे लेकर गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया। अदालत ने इन परिस्थितियों को देखते हुए केवल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर दोषसिद्धि को उचित नहीं माना। 10 फरवरी को हुई मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर या गुप्तांग पर चोट के निशान नहीं पाए गए। मेडिकल जांच में शारीरिक संबंध बनने के संकेत मिले लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इसे जबरदस्ती का निर्णायक प्रमाण नहीं माना। मामले के अनुसार पीड़िता के पिता ने 24 जनवरी 2024 को बंगाणा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी 23 जनवरी को कंप्यूटर सेंटर जाने के लिए घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। पिता ने आशंका जताई थी कि आरोपी उसे शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया है। पुलिस ने मोबाइल टावर लोकेशन और आईएमईआई ट्रैकिंग के आधार पर जांच की। नौ फरवरी को बिलासपुर के कुड्डी क्षेत्र में एक मकान से पीड़िता और आरोपी को बरामद किया गया था।
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