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यूक्रेन से घर अजौली पहुंची अनामिका की मां ने उतारी आरती
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संवाद न्यूज एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। टेलीविजन पर रूस और यूक्रेन के बीच आ रही तनाव की खबरों से मन में बेचैनी बढ़ती जा रही थी। उन समाचारों से हमारे परिजन भी काफी चिंतित हो गए थे, ऐसे में स्वदेश लौटने के सिवाय हमारे सामने कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचा था। ऊना के सीमावर्ती गांव अजौली निवासी विजय कुमार की पुत्री अनामिका ने यूक्रेन से अपने घर लौटने के उपरांत शनिवार को खास बातचीत के दौरान यह बात कही। घर पहुंचने पर अनामिका की माता ने बेटी का आरती उतारकर स्वागत किया।
अनामिका बताती हैं कि 24 फरवरी को लास्ट फ्लाइट इंडिया के लिए थी, उसी फ्लाइट में वह अपने अन्य दोस्तों के साथ दिल्ली पहुंची। अनामिका ने कहा कि जब हम लौट रहे थे, उस वक्त भी बहुत से भारतीय छात्र-छात्राएं यूक्रेन में ही फंसे हुए थे। यूक्रेन से आने वाली उस लास्ट फ्लाइट में करीबन 240 भारतीय छात्र-छात्राएं लौटे हैं।
इस फ्लाइट में हिमाचल के हम तीन लोग थे। जमा दो तक की पढ़ाई स्थानीय सेंट सोल्जर डिवाइन पब्लिक स्कूल में करने के बाद उसकी सीधे ऑनलाइन एडमिशन हुई थी। 2020 को वह यूक्रेन की नेशनल उजहोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए गई थी। द्वितीय वर्ष की छात्रा अनामिका बताती है कि कोविड काल के दौरान भी ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन हुई, अभी भी उनकी ऑनलाइन क्लासेज ही लग रही थीं।
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टिकट के रुपये नहीं थे, लेकिन उनके अभिभावकों ने टिकट बुक करवा दी, जिसके चलते वह अपने वतन लौट सकी। पिता विजय कुमार सेना में है तथा माता गृहिणी हैं। छोटा भाई अभी स्कूलिंग कर रहा है। अनामिका के सकुशल घर पहुंचने पर उनके परिजन तथा तमाम संबंधी बेहद प्रसन्न हैं। अनामिका की मानें तो यूक्रेन के इस युद्ध का खामियाजा न केवल भारतीय छात्र-छात्राओं को बल्कि वहां के निर्दोष लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है।
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मैहतपुर (ऊना)। टेलीविजन पर रूस और यूक्रेन के बीच आ रही तनाव की खबरों से मन में बेचैनी बढ़ती जा रही थी। उन समाचारों से हमारे परिजन भी काफी चिंतित हो गए थे, ऐसे में स्वदेश लौटने के सिवाय हमारे सामने कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचा था। ऊना के सीमावर्ती गांव अजौली निवासी विजय कुमार की पुत्री अनामिका ने यूक्रेन से अपने घर लौटने के उपरांत शनिवार को खास बातचीत के दौरान यह बात कही। घर पहुंचने पर अनामिका की माता ने बेटी का आरती उतारकर स्वागत किया।
अनामिका बताती हैं कि 24 फरवरी को लास्ट फ्लाइट इंडिया के लिए थी, उसी फ्लाइट में वह अपने अन्य दोस्तों के साथ दिल्ली पहुंची। अनामिका ने कहा कि जब हम लौट रहे थे, उस वक्त भी बहुत से भारतीय छात्र-छात्राएं यूक्रेन में ही फंसे हुए थे। यूक्रेन से आने वाली उस लास्ट फ्लाइट में करीबन 240 भारतीय छात्र-छात्राएं लौटे हैं।
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इस फ्लाइट में हिमाचल के हम तीन लोग थे। जमा दो तक की पढ़ाई स्थानीय सेंट सोल्जर डिवाइन पब्लिक स्कूल में करने के बाद उसकी सीधे ऑनलाइन एडमिशन हुई थी। 2020 को वह यूक्रेन की नेशनल उजहोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए गई थी। द्वितीय वर्ष की छात्रा अनामिका बताती है कि कोविड काल के दौरान भी ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन हुई, अभी भी उनकी ऑनलाइन क्लासेज ही लग रही थीं।
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टिकट के रुपये नहीं थे, लेकिन उनके अभिभावकों ने टिकट बुक करवा दी, जिसके चलते वह अपने वतन लौट सकी। पिता विजय कुमार सेना में है तथा माता गृहिणी हैं। छोटा भाई अभी स्कूलिंग कर रहा है। अनामिका के सकुशल घर पहुंचने पर उनके परिजन तथा तमाम संबंधी बेहद प्रसन्न हैं। अनामिका की मानें तो यूक्रेन के इस युद्ध का खामियाजा न केवल भारतीय छात्र-छात्राओं को बल्कि वहां के निर्दोष लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है।