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10 जुलाई तक मानसून पहुंचने के आसार
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ऊना। इस साल एक सप्ताह पहले मानसून आने का पूर्वानुमान था लेकिन एक सप्ताह से भी अधिक समय होने के बाद भी अभी मानसून हिमचल नहीं पहुंचा है। इससे लोगों के साथ-साथ किसानों में भारी बेरुखी है।
मौसम विभाग ने प्रदेश में 28 जून तक मानसून पहुंचने के आसार जताए थे। अभी तक भी मानसून प्रदेश में नहीं पहुंच पाए हैं। विभाग की नई भविष्यवाणी के अनुसार हिमाचल में 10 जुलाई के बाद मानसून आएगा। अभी तक मानसून देश की राजधानी दिल्ली से भी पीछे है। इसे हिमाचल पहुंचने के लिए करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है। पिछले वर्ष ऊना जिले में मानसून में 60 फीसदी से कम बारिश हुई थी। इससे किसानों और लोगों में काफी मायूसी देखने को मिली थी। इस वर्ष भी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के बाद भी मानसून जल्द न पहुंचने से लोगों और कृषकों में निाराशा देखने को मिल रही है।
गौरतलब है कि कम और बेमौसमी बारिश से ऊना जिला में बीते नवंबर और दिसंबर में 20 प्रतिशत तो जनवरी से मार्च तक 37 प्रतिशत गेहूं को सूखे की मार पड़ी थी। सूखे से कृषि प्रधान जिले के किसानों को 15 करोड़ का नुकसान हुआ था। 5500 हेक्टेयर भूमि में 33 प्रतिशत गेहूं क्षतिग्रस्त हो गई थी।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि जिले मं सिंचित क्षेत्र 7840 हेक्टेयर और गैर सिंचित क्षेत्र 35160 हेक्टेयर भूमि है। अगर समय पर बरसात न हो तो गैर सिंचित क्षेत्रों के किसानों को भारी घाटा सहना पड़ता है।
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मौसम विभाग ने प्रदेश में 28 जून तक मानसून पहुंचने के आसार जताए थे। अभी तक भी मानसून प्रदेश में नहीं पहुंच पाए हैं। विभाग की नई भविष्यवाणी के अनुसार हिमाचल में 10 जुलाई के बाद मानसून आएगा। अभी तक मानसून देश की राजधानी दिल्ली से भी पीछे है। इसे हिमाचल पहुंचने के लिए करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है। पिछले वर्ष ऊना जिले में मानसून में 60 फीसदी से कम बारिश हुई थी। इससे किसानों और लोगों में काफी मायूसी देखने को मिली थी। इस वर्ष भी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के बाद भी मानसून जल्द न पहुंचने से लोगों और कृषकों में निाराशा देखने को मिल रही है।
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गौरतलब है कि कम और बेमौसमी बारिश से ऊना जिला में बीते नवंबर और दिसंबर में 20 प्रतिशत तो जनवरी से मार्च तक 37 प्रतिशत गेहूं को सूखे की मार पड़ी थी। सूखे से कृषि प्रधान जिले के किसानों को 15 करोड़ का नुकसान हुआ था। 5500 हेक्टेयर भूमि में 33 प्रतिशत गेहूं क्षतिग्रस्त हो गई थी।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि जिले मं सिंचित क्षेत्र 7840 हेक्टेयर और गैर सिंचित क्षेत्र 35160 हेक्टेयर भूमि है। अगर समय पर बरसात न हो तो गैर सिंचित क्षेत्रों के किसानों को भारी घाटा सहना पड़ता है।