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12वीं परीक्षा परिणाम में चमके सरकारी स्कूल के विद्यार्थी
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कामयाबी की मुस्कान......एमएमलाल पब्लिक स्कूल जलग्रां स्कूल के विद्यार्थी मैरिट सूची में नाम आने पर
- फोटो : Una
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अगर अनुशासन के साथ कठोर परिश्रम किया जाए तो सीमित सुविधाओं में भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। बारहवीं कक्षा के परिणाम में जिले के सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन रहा है। मेरिट में आए सात में से पांच विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से हैं, जबकि दो निजी स्कूलों से हैं।
ट्रक चालक, किसान, दुकानदारों और निजी कंपनी में कार्यरत अभिभावकों के बच्चों ने मेरिट में अपनी जगह बनाई है। जिले में सरकारी स्कूलों ने हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड की बारहवीं के परीक्षा परिणाम में निजी स्कूलों को मात दी है। बच्चों ने साबित कर दिया कि अगर आपकी नजर लक्ष्य पर है तो उसे हासिल किया जा सकता है। कॉमर्स संकाय में प्रदेश भर में टॉप करने वाली तनीषा भारद्वाज के पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और माता घर का कामकाज देखती हैं। 98.4 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल धुसाड़ा के आर्यन पुरी के पिता रामकुमार की गांव में ही छोटी सी दुकान है।
घर में ज्यादा संसाधन न होने के बावजूद इस गुदड़ी के लाल ने प्रदेश भर में अपने अभिभावकों का नाम चमका दिया। मेरिट में आए ठठल स्कूल के शुभम अत्री के पिता भी गांव में ही किराना की दुकान चलाते हैं। उसका कहना है कि माता-पिता उनके लिए कड़ी मेहनत करते हैं। उन्हीं से परिश्रम करने व आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। 97.4 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली एसडी पब्लिक स्कूल संतोषगढ़ की छात्रा अर्शदीप कौर के पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और माता गृहिणी हैं। अर्शदीप ने कहा कि उसके माता-पिता ने पढ़ाई के साथ खेलों में भी उसका समर्थन किया। हालांकि उसका किताबों से अधिक लगाव है।
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96.6 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली जलग्रां की सेजल के पिता किसान हैं। उसके पिता दिन-रात खेतों में मेहनत करते हैं। 96.8 फीसदी अंक हासिल करने वाले धुंधला स्कूल के छात्र साहिल कुमार के पिता ट्रक ड्राइवर और माता गृहिणी हैं। कहा कि मेरिट में आने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी वजह से अभिभावकों के चेहरे पर आई खुशी है। कहा कि पिता ट्रक चलाते हैं और कभी-कभी घर आना होता है। कहा कि लक्ष्य हासिल करने और घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने का एकमात्र विकल्प परिश्रम है।
उपनिदेशक ने दी बधाई
उप निदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग जनक सिंह ने परीक्षा परिणाम में शानदार प्रदर्शन करने वाले सभी स्कूलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन उम्मीद से बढ़कर रहा है। कहा कि यह अध्यापकों की मेहनत और विद्यार्थियों की सीखने के ललक से संभव हो पाया है।
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ऊना। अगर अनुशासन के साथ कठोर परिश्रम किया जाए तो सीमित सुविधाओं में भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। बारहवीं कक्षा के परिणाम में जिले के सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन रहा है। मेरिट में आए सात में से पांच विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से हैं, जबकि दो निजी स्कूलों से हैं।
ट्रक चालक, किसान, दुकानदारों और निजी कंपनी में कार्यरत अभिभावकों के बच्चों ने मेरिट में अपनी जगह बनाई है। जिले में सरकारी स्कूलों ने हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड की बारहवीं के परीक्षा परिणाम में निजी स्कूलों को मात दी है। बच्चों ने साबित कर दिया कि अगर आपकी नजर लक्ष्य पर है तो उसे हासिल किया जा सकता है। कॉमर्स संकाय में प्रदेश भर में टॉप करने वाली तनीषा भारद्वाज के पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और माता घर का कामकाज देखती हैं। 98.4 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल धुसाड़ा के आर्यन पुरी के पिता रामकुमार की गांव में ही छोटी सी दुकान है।
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घर में ज्यादा संसाधन न होने के बावजूद इस गुदड़ी के लाल ने प्रदेश भर में अपने अभिभावकों का नाम चमका दिया। मेरिट में आए ठठल स्कूल के शुभम अत्री के पिता भी गांव में ही किराना की दुकान चलाते हैं। उसका कहना है कि माता-पिता उनके लिए कड़ी मेहनत करते हैं। उन्हीं से परिश्रम करने व आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। 97.4 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली एसडी पब्लिक स्कूल संतोषगढ़ की छात्रा अर्शदीप कौर के पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और माता गृहिणी हैं। अर्शदीप ने कहा कि उसके माता-पिता ने पढ़ाई के साथ खेलों में भी उसका समर्थन किया। हालांकि उसका किताबों से अधिक लगाव है।
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96.6 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली जलग्रां की सेजल के पिता किसान हैं। उसके पिता दिन-रात खेतों में मेहनत करते हैं। 96.8 फीसदी अंक हासिल करने वाले धुंधला स्कूल के छात्र साहिल कुमार के पिता ट्रक ड्राइवर और माता गृहिणी हैं। कहा कि मेरिट में आने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी वजह से अभिभावकों के चेहरे पर आई खुशी है। कहा कि पिता ट्रक चलाते हैं और कभी-कभी घर आना होता है। कहा कि लक्ष्य हासिल करने और घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने का एकमात्र विकल्प परिश्रम है।
उपनिदेशक ने दी बधाई
उप निदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग जनक सिंह ने परीक्षा परिणाम में शानदार प्रदर्शन करने वाले सभी स्कूलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन उम्मीद से बढ़कर रहा है। कहा कि यह अध्यापकों की मेहनत और विद्यार्थियों की सीखने के ललक से संभव हो पाया है।