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Una News: कुटलैहड़ में दिन प्रतिदिन खत्म हो रही वन संपदा
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जंगली जानवर आबादी की तरफ कर रहे रुख, लोगों ने उजाड़ दिए जंगल
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के हरे भरे जंगल प्रतिदिन घटते जा रहे हैं। वन संपदा समाप्त होती जा रही है। जंगली जानवर घरों का रुख कर रहे हैं। इंसानों ने जंगली जानवरों के घर उजाड़ दिए, उनका चारा समाप्त कर दिया। अब यह जानवर आबादी का ही रुख करेंगे। सरकार और संबंधित विभाग कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे जंगल अवैध कटान से खत्म हो रहे हैं। जंगली जानवरों को जंगल में हरा चारा नहीं मिल रहा है। इसे लेकर स्थानीय बुजुर्गों ने अपने विचार इस प्रकार से साझा किए।
ढियूगली पंचायत के 80 वर्षीय सीता राम का कहना है कि जंगलों को हम लोग जला रहे हैं। वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जंगलों में पहले बहुत किस्म के पौधे, खुशबूदार फूल देखने को मिलते थे। यह सब जंगलों से खत्म हो चुका है।
दोवड के 82 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक गुलजारा परमार का कहना है कि आज जंगली जानवर आबादी का रुख कर रहे हैं। इसके जिम्मेदार हम लोग ही हैं। जंगलों को खाली कर दिया है। कुछ जला कर, कुछ काट कर। आज जंगली जानवरों को जंगल में हरा चारा नहीं मिल रहा है।
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रायपुर मैदान की 75 वर्षीय कृष्णा ठाकुर का कहना है कि हमने कुटलैहड़ विरासत के राजा महेंद्र पाल के पास काम किया है। उस समय जंगल भी सुरक्षित रहते थे। पहले जंगल से एक पेड़ की भी चोरी होती थी तो उन लोगों पर सख्त कार्रवाई होती थी। आग लगाना तो दूर की बात थी। आज जंगलों के जंगल अवैध कटान से खत्म हो रहे हैं। सरकार व संबंधित विभाग कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
पिपलू से 95 वर्षीय हुकम्मी देवी का कहना है कि पहले जंगल हरे-भरे होते थे तो बीमारियां भी बहुत कम होती थीं। आज जंगलों को जलाया जा रहा है। काटा जा रहा है। कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।अगर कोई व्यक्ति जंगलों में अवैध कटान करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसको पकड़ने से पहले छुड़वाने वाले पहले आगे आ जाते हैं। ऐसे में जंगल कैसे सुरक्षित रह सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। हिमाचल प्रदेश के हरे भरे जंगल प्रतिदिन घटते जा रहे हैं। वन संपदा समाप्त होती जा रही है। जंगली जानवर घरों का रुख कर रहे हैं। इंसानों ने जंगली जानवरों के घर उजाड़ दिए, उनका चारा समाप्त कर दिया। अब यह जानवर आबादी का ही रुख करेंगे। सरकार और संबंधित विभाग कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे जंगल अवैध कटान से खत्म हो रहे हैं। जंगली जानवरों को जंगल में हरा चारा नहीं मिल रहा है। इसे लेकर स्थानीय बुजुर्गों ने अपने विचार इस प्रकार से साझा किए।
ढियूगली पंचायत के 80 वर्षीय सीता राम का कहना है कि जंगलों को हम लोग जला रहे हैं। वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जंगलों में पहले बहुत किस्म के पौधे, खुशबूदार फूल देखने को मिलते थे। यह सब जंगलों से खत्म हो चुका है।
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दोवड के 82 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक गुलजारा परमार का कहना है कि आज जंगली जानवर आबादी का रुख कर रहे हैं। इसके जिम्मेदार हम लोग ही हैं। जंगलों को खाली कर दिया है। कुछ जला कर, कुछ काट कर। आज जंगली जानवरों को जंगल में हरा चारा नहीं मिल रहा है।
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रायपुर मैदान की 75 वर्षीय कृष्णा ठाकुर का कहना है कि हमने कुटलैहड़ विरासत के राजा महेंद्र पाल के पास काम किया है। उस समय जंगल भी सुरक्षित रहते थे। पहले जंगल से एक पेड़ की भी चोरी होती थी तो उन लोगों पर सख्त कार्रवाई होती थी। आग लगाना तो दूर की बात थी। आज जंगलों के जंगल अवैध कटान से खत्म हो रहे हैं। सरकार व संबंधित विभाग कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
पिपलू से 95 वर्षीय हुकम्मी देवी का कहना है कि पहले जंगल हरे-भरे होते थे तो बीमारियां भी बहुत कम होती थीं। आज जंगलों को जलाया जा रहा है। काटा जा रहा है। कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।अगर कोई व्यक्ति जंगलों में अवैध कटान करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसको पकड़ने से पहले छुड़वाने वाले पहले आगे आ जाते हैं। ऐसे में जंगल कैसे सुरक्षित रह सकते हैं।