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अब मक्की की फसल को लगा कीड़ा, किसान चिंतित
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जोल (ऊना)। खरयालता पंचायत के तलमेहड़ा, रौणखर, वही, बडोआ, बेहलां, टकोली, भलखूं, लालशाह गांव में मक्की की फसल पर तना खोखले करने वाले कीड़े (फाल आर्मी वर्म) ने हमला कर दिया है। इसमें मक्की की फसल बर्बाद होने के कगार पर है।
किसान रिटायर्ड मेजर रघुवीर सिंह डढवाल, बीडीसी सदस्य राजेंद्र सिंह ठाकुर, पवन कुमार, रणधीर सिंह, विनोद कुमार, अशोक कुमार, नवीन कुमार, अमर चंद, सुखदेव शर्मा, बिशन दास, देसराज, मंगतराम, मक्खन सिंह, शंकर दास ने बताया कि मक्की की फसल में कीड़ा लग गया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया है कि एक बार गांव में आकर लोगों को जागरूक करें।
कृषि उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि इस कीड़े को मारने के लिए 5-6 से फीरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ में लगाएं या एजाडिटिक्टन 1500 पीपीएम को 5 एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। पौधे के पत्तों के समूह में पानी अथवा रेत मिट्टी डालने से भी कीड़े की पौधे के अंदर मर जाते हैं। बेसिलस थ्युरीन्जनेसिस दो ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि पहाड़ी इलाकों में मक्खी के लिए देसी उपचार भी है। इसके इस्तेमाल से मक्की उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। गोबर, गोमूत्र और छाछ मिलाकर भी छिड़काव किया जा सकता है। इससे भी कीड़ा मर जाता है। उन्होंने बताया कृषि विभाग बंगाणा के अधिकारी खरयालता में जाकर किसानों की समस्या का हल करेंगे।
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किसान रिटायर्ड मेजर रघुवीर सिंह डढवाल, बीडीसी सदस्य राजेंद्र सिंह ठाकुर, पवन कुमार, रणधीर सिंह, विनोद कुमार, अशोक कुमार, नवीन कुमार, अमर चंद, सुखदेव शर्मा, बिशन दास, देसराज, मंगतराम, मक्खन सिंह, शंकर दास ने बताया कि मक्की की फसल में कीड़ा लग गया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया है कि एक बार गांव में आकर लोगों को जागरूक करें।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि इस कीड़े को मारने के लिए 5-6 से फीरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ में लगाएं या एजाडिटिक्टन 1500 पीपीएम को 5 एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। पौधे के पत्तों के समूह में पानी अथवा रेत मिट्टी डालने से भी कीड़े की पौधे के अंदर मर जाते हैं। बेसिलस थ्युरीन्जनेसिस दो ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि पहाड़ी इलाकों में मक्खी के लिए देसी उपचार भी है। इसके इस्तेमाल से मक्की उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। गोबर, गोमूत्र और छाछ मिलाकर भी छिड़काव किया जा सकता है। इससे भी कीड़ा मर जाता है। उन्होंने बताया कृषि विभाग बंगाणा के अधिकारी खरयालता में जाकर किसानों की समस्या का हल करेंगे।