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Una News: अंबोटा में सरकारी भूमि से खैर के दर्जनों पेड़ काटे
Fri, 13 Mar 2026 06:43 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 13 Mar 2026 06:43 AM IST
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अंबोटा में सरकारी भूमि से काटे खैर के पेड़। संवाद
गगरेट (ऊना)। विकास खंड गगरेट के अंबोटा गांव के पास जंगल में सरकारी भूमि पर वन विभाग की नाक तले बहुमूल्य खैर के दर्जनों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने का मामला सामने आया है। पेड़ों के कटान से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हैरत की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए इस कटान के बावजूद न तो वन विभाग हरकत में आया है और न ही मामले में पुलिस में कोई प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है। सवाल उठने लगे हैं कि वनों की रक्षा करने वाले विभाग की ऐसी कार्यप्रणाली में प्रदेश सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना कैसे सफल होगी।
जिला ऊना के जंगल अव्वल दर्जे के खैर के पेड़ों के लिए पूरे प्रदेश में जाने जाते हैं। इन पेड़ों से तैयार होने वाला कत्था गुणवत्ता के लिहाज से देशभर में खास पहचान रखता है। बाजार में खैर की लकड़ी ऊंचे दामों पर बिकती है जिसके चलते जिले के जंगल अक्सर वन माफिया के निशाने पर रहते हैं। खैर के पेड़ों को काटने के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। निजी भूमि पर उगे खैर के पेड़ भी बिना वन विभाग की अनुमति के मालिक नहीं काट सकता। निर्धारित प्रक्रिया के तहत करीब दस वर्ष बाद ही खैर के पेड़ों के कटान की अनुमति दी जाती है। इसके लिए वन व राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर पेड़ों की शुमारी करते हैं और नंबरिंग के बाद ही कटान की अनुमति मिलती है।
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उधर फॉरेस्ट रेंज अफसर राहुल ठाकुर ने कहा कि यदि सरकारी भूमि पर खैर के पेड़ों का अवैध कटान हुआ है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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हैरत की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए इस कटान के बावजूद न तो वन विभाग हरकत में आया है और न ही मामले में पुलिस में कोई प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है। सवाल उठने लगे हैं कि वनों की रक्षा करने वाले विभाग की ऐसी कार्यप्रणाली में प्रदेश सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना कैसे सफल होगी।
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जिला ऊना के जंगल अव्वल दर्जे के खैर के पेड़ों के लिए पूरे प्रदेश में जाने जाते हैं। इन पेड़ों से तैयार होने वाला कत्था गुणवत्ता के लिहाज से देशभर में खास पहचान रखता है। बाजार में खैर की लकड़ी ऊंचे दामों पर बिकती है जिसके चलते जिले के जंगल अक्सर वन माफिया के निशाने पर रहते हैं। खैर के पेड़ों को काटने के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। निजी भूमि पर उगे खैर के पेड़ भी बिना वन विभाग की अनुमति के मालिक नहीं काट सकता। निर्धारित प्रक्रिया के तहत करीब दस वर्ष बाद ही खैर के पेड़ों के कटान की अनुमति दी जाती है। इसके लिए वन व राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर पेड़ों की शुमारी करते हैं और नंबरिंग के बाद ही कटान की अनुमति मिलती है।
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उधर फॉरेस्ट रेंज अफसर राहुल ठाकुर ने कहा कि यदि सरकारी भूमि पर खैर के पेड़ों का अवैध कटान हुआ है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।