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Una News: वैट केसों के मकड़जाल में उलझीं दर्जनों औद्योगिक इकाइयां
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औद्योगिक क्षेत्र का हाल भाग 4
जीएसटी लागू होने के पांच वर्ष बाद भी असेसमेंट केस पेंडिंग
पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर वैट पेंडिंग केसों को बंद करे सरकार
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। औद्योगिक इकाइयों को वैट ने भी अपने मकड़जाल में फांस रखा है। इससे बाहर निकल पाना औद्योगिक इकाइयों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उद्योग संघ वैट केसों का निपटारा फॉर्म सी के बिना करवाने को लेकर इस प्रकार की पॉलिसी की घोषणा सरकार से चाहते हैं, जिसमें फार्म सी का कोई झंझट न हो। 5 साल पूर्व 2017 में जीएसटी पूरे देश में लागू हुआ था। ऐसे में पांच साल का लंबा समय गुजर जाने के बाद भी वैट संबंधी केसों का निपटारा क्यों नहीं हो पा रहा है, यह बड़ा सवाल है। दर्जनों छोटी औद्योगिक इकाइयों के बंद होने की एक प्रमुख वजह वैट के पेंडिंग केस भी हैं, जिनका हल न होने के कारण छोटी औद्योगिक इकाइयां चलाने वाले उद्योगपति हाथ खड़े कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक सप्लायरों को फॉर्म सी की उपलब्धता न होने से वैट असेसमेंट केस पेंडिंग हो रहे हैं, जिनका जल्द हल करवा पाना उद्योगपतियों के लिए कठिन हो गया है। उद्योग संघों का मानना है कि जिस प्रकार पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड तथा यूपी राज्यों ने वैट केसों में जीएसटी लागू होने के वर्ष 2017 से पांच साल तक के सभी केसों को बंद कर दिया है, उसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश सरकार को संज्ञान लेना चाहिए, ताकि वैट के मामलों का पुख्ता हल बिना फार्म सी के ही हो सके। इससे न केवल औद्योगिक इकाइयों को राहत मिलेगी, बल्कि उद्योगपति भी इस मकड़जाल से बाहर निकालकर स्वतंत्र रूप से अपनी औद्योगिक इकाइयों को गति दे पाएंगे।
अधिकारियों को जीएसटी कलेक्शन में लगाकर लंबित केसों का हो निपटारा
जिला इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रोफेसर बीएन कश्यप और महासचिव सीएस कपूर ने कहा कि वैट के मामलों के पेंडिंग रहने से उद्योगपतियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन पदाधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों को टाइम फ्रेम में एमनेस्टी स्कीम डिक्लेयर कर इसका पुख्ता समाधान किया जाना चाहिए। विशेष तौर पर अधिकारियों को जीएसटी कलेक्शन में लगाकर पेंडिंग सभी मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए, ऐसी मांग उद्योग जगत से जुड़े सभी उद्योगपतियों की है।
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जीएसटी लागू होने के पांच वर्ष बाद भी असेसमेंट केस पेंडिंग
पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर वैट पेंडिंग केसों को बंद करे सरकार
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। औद्योगिक इकाइयों को वैट ने भी अपने मकड़जाल में फांस रखा है। इससे बाहर निकल पाना औद्योगिक इकाइयों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उद्योग संघ वैट केसों का निपटारा फॉर्म सी के बिना करवाने को लेकर इस प्रकार की पॉलिसी की घोषणा सरकार से चाहते हैं, जिसमें फार्म सी का कोई झंझट न हो। 5 साल पूर्व 2017 में जीएसटी पूरे देश में लागू हुआ था। ऐसे में पांच साल का लंबा समय गुजर जाने के बाद भी वैट संबंधी केसों का निपटारा क्यों नहीं हो पा रहा है, यह बड़ा सवाल है। दर्जनों छोटी औद्योगिक इकाइयों के बंद होने की एक प्रमुख वजह वैट के पेंडिंग केस भी हैं, जिनका हल न होने के कारण छोटी औद्योगिक इकाइयां चलाने वाले उद्योगपति हाथ खड़े कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक सप्लायरों को फॉर्म सी की उपलब्धता न होने से वैट असेसमेंट केस पेंडिंग हो रहे हैं, जिनका जल्द हल करवा पाना उद्योगपतियों के लिए कठिन हो गया है। उद्योग संघों का मानना है कि जिस प्रकार पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड तथा यूपी राज्यों ने वैट केसों में जीएसटी लागू होने के वर्ष 2017 से पांच साल तक के सभी केसों को बंद कर दिया है, उसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश सरकार को संज्ञान लेना चाहिए, ताकि वैट के मामलों का पुख्ता हल बिना फार्म सी के ही हो सके। इससे न केवल औद्योगिक इकाइयों को राहत मिलेगी, बल्कि उद्योगपति भी इस मकड़जाल से बाहर निकालकर स्वतंत्र रूप से अपनी औद्योगिक इकाइयों को गति दे पाएंगे।
अधिकारियों को जीएसटी कलेक्शन में लगाकर लंबित केसों का हो निपटारा
जिला इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रोफेसर बीएन कश्यप और महासचिव सीएस कपूर ने कहा कि वैट के मामलों के पेंडिंग रहने से उद्योगपतियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन पदाधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों को टाइम फ्रेम में एमनेस्टी स्कीम डिक्लेयर कर इसका पुख्ता समाधान किया जाना चाहिए। विशेष तौर पर अधिकारियों को जीएसटी कलेक्शन में लगाकर पेंडिंग सभी मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए, ऐसी मांग उद्योग जगत से जुड़े सभी उद्योगपतियों की है।
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