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क्रिटिकल केयर यूनिट भवन से नहीं बनेगी बात, विशेषज्ञ भी हों तैनात : जीआर वर्मा
Fri, 01 Mar 2024 12:41 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 01 Mar 2024 12:41 AM IST
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क्रिटिकल केयर यूनिट की ऊना में घोषणा हुई है। यह ठीक है, लेकिन यहां विशेषज्ञ चिकित्सक होना भी जरूरी है। केवल भवन खड़े करने से काम नहीं चलेगा। यह बात जिला वरिष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष जीआर वर्मा ने वीरवार को एमसी पार्क ऊना में हुई बैठक के दौरान कही। बैठक में जिला भर से वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने विभिन्न समस्याओं को लेकर अपने सुझाव रखे।
जीआर वर्मा ने कहा कि मातृ एवं शिशु अस्पताल के नये भवन में स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं गायनी की ओपीडी शुरू कर दी गई है, लेकिन गायनी वार्ड प्रसव कक्ष और शिशु रोग ओपीडी शुरू नहीं हुई है। इस ओपीडी को ऊना अस्पताल के पुराने भवन से चलाया जा रहा है। और तो और ब्लड सेपेरेशन मशीन अभी तक स्थापित नहीं हो पाई है। मरीजों को इसकी सुविधा के लिए होशियारपुर पंजाब एवं चंडीगढ़ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है।
क्षेत्रीय अस्पताल में माईनर ओटी की भी कमी है। बड़ा हादसा होने पर स्ट्रेचरों पर ही इलाज लेना पड़ता है। यहां तक की उम्र के इस पड़ाव में बुजुर्गों को स्थानीय स्तर पर हृदय रोग विशेषज्ञ की सुविधा के लिए सरकारों के चेताया गया। लेकिन यहां से आज भी हार्ट अटैक आने पर मरीजों को मौत का ही सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पीजीआई ले जाते समय रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। यूरोलॉजी विशेषज्ञ की तैनाती के लिए भी कई बार मांग उठाई गई, लेकिन सरकार इसे पूरा नहीं कर पाई।
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पीजीआई सेटेलाईट सेंटर की ओपीडी बेशक शुरू है, लेकिन यहां भी कोई विशेषज्ञ तैनात नहीं किया गया। ऊना अस्पताल में पीली पर्ची बुजुर्गों को दी जाती है, लेकिन चिकित्सकों को दिखाने के लिए प्राथमिकता नहीं दी जाती। बुजुर्गों के प्रति गठित नीति उद्योग की सिफारिश की गई है। इसमें मेहनतकश मजदूर जो कि अपनी बचत पर निर्भर करते हैं, उनकी बचत पर ब्याज दर सीमा निश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ऊना में सरकारी स्तर पर मात्र एक नशा मुक्ति केंद्र घालुवाल में है। इसमें 15 मरीजों को दाखिल किया जा सकता है, जबकि तीन मरीज यहां प्रतिदिन आ रहे हैं। सरकार इस समस्या का समाधान करे।
इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी लिखा है। इन सभी समस्याओं का सरकारें जल्द समाधान करें।
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जीआर वर्मा ने कहा कि मातृ एवं शिशु अस्पताल के नये भवन में स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं गायनी की ओपीडी शुरू कर दी गई है, लेकिन गायनी वार्ड प्रसव कक्ष और शिशु रोग ओपीडी शुरू नहीं हुई है। इस ओपीडी को ऊना अस्पताल के पुराने भवन से चलाया जा रहा है। और तो और ब्लड सेपेरेशन मशीन अभी तक स्थापित नहीं हो पाई है। मरीजों को इसकी सुविधा के लिए होशियारपुर पंजाब एवं चंडीगढ़ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है।
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क्षेत्रीय अस्पताल में माईनर ओटी की भी कमी है। बड़ा हादसा होने पर स्ट्रेचरों पर ही इलाज लेना पड़ता है। यहां तक की उम्र के इस पड़ाव में बुजुर्गों को स्थानीय स्तर पर हृदय रोग विशेषज्ञ की सुविधा के लिए सरकारों के चेताया गया। लेकिन यहां से आज भी हार्ट अटैक आने पर मरीजों को मौत का ही सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पीजीआई ले जाते समय रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। यूरोलॉजी विशेषज्ञ की तैनाती के लिए भी कई बार मांग उठाई गई, लेकिन सरकार इसे पूरा नहीं कर पाई।
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पीजीआई सेटेलाईट सेंटर की ओपीडी बेशक शुरू है, लेकिन यहां भी कोई विशेषज्ञ तैनात नहीं किया गया। ऊना अस्पताल में पीली पर्ची बुजुर्गों को दी जाती है, लेकिन चिकित्सकों को दिखाने के लिए प्राथमिकता नहीं दी जाती। बुजुर्गों के प्रति गठित नीति उद्योग की सिफारिश की गई है। इसमें मेहनतकश मजदूर जो कि अपनी बचत पर निर्भर करते हैं, उनकी बचत पर ब्याज दर सीमा निश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ऊना में सरकारी स्तर पर मात्र एक नशा मुक्ति केंद्र घालुवाल में है। इसमें 15 मरीजों को दाखिल किया जा सकता है, जबकि तीन मरीज यहां प्रतिदिन आ रहे हैं। सरकार इस समस्या का समाधान करे।
इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी लिखा है। इन सभी समस्याओं का सरकारें जल्द समाधान करें।