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Una News: बाल स्कूल ऊना में छह साल से दो सत्रों में लग रही कक्षाएं, 10 घंटे खुला रहता है स्कूल
Fri, 23 Aug 2024 03:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 23 Aug 2024 03:49 AM IST
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ऊना के बाल स्कूल में कक्षा में बैठे छात्र।संवाद
ऊना। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक बाल स्कूल ऊना में कमरों की कमी बच्चों और अध्यापकों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। आलम यह है कि दो सत्र में कक्षाओं का संचालन हो रहा। सुबह सात बजे स्कूल खुलता है और शाम पांच बजे तक करीब 10 घंटे पढ़ाई जारी रहती है।
इसमें छठी से दसवीं तक पहले सत्र में और ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा की दूसरे सत्र में कक्षाएं लग रही हैं। हैरत की बात यह है कि यह समस्या पिछले छह साल से बनी है। यानी सैकड़ों विद्यार्थी इस अव्यवस्था के बीच पढ़ाई कर गए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो पाया। जानकारी के अनुसार बाल स्कूल ऊना में कुल 498 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन यहां कुल कमरे मात्र 11 हैं। इसी में अध्यापकों के लिए कमरे हैं और कक्षाएं भी इन्हीं में संचालित होती हैं। बच्चों की पढ़ाई बेहतर तरीके से चले, इसके लिए प्रबंधन ने एक कमरे के बीच अलमारियां लगाकर उसमें दो कक्षाएं लगानी शुरू कर दीं, लेकिन स्कूल में बच्चों की संख्या अच्छी है, इसलिए कई बार बच्चों को तंग होकर बैठना पड़ता है। डेस्क और बेंच जोड़कर चार-चार बच्चों का बैठना तो हर दिन की बात है।
वहीं, सर्दी के मौसम में चुनौतियां और बढ़ जाती है। कई बार बच्चों को बाहर धूप में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। शाम के समय अंधेरा जल्दी हो जाता है, जिस कारण दूर दराज से आने वाले बच्चों को खासी परेशानी होती है।
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नहीं खत्म हुआ वर्षों का इंतजार
ध्यान रहे कि बाल स्कूल ऊना का नया भवन करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा है। यह निर्माण करीब पांच साल से जारी है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ। बजट के अभाव में स्कूल की नई इमारत खराब हो रही है। उधर, स्कूल अध्यापक और विद्यार्थी इस इंतजार में हैं कि कब नए भवन का निर्माण पूरा हो, ताकि उसमें कक्षाएं शुरू हो सकें।
कोट्स
बाल स्कूल ऊना में करीब छह साल से दो सत्र में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। नए भवन का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ, जिसका बेसब्री से इंतजार है। मौजूदा भवन में सुविधाजनक तरीके से पढ़ाई संभव नहीं है। फिर भी अध्यापक व स्टाफ अपना शत प्रतिशत योगदान दे रहे हैं। सरकार व प्रशासन से अपील है कि बाल स्कूल ऊना के नए भवन के अटके कार्य को जल्द पूरा किया जाए।
सुरेंद्र कौंडल, प्रधानाचार्य, रावमापा बाल ऊना
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इसमें छठी से दसवीं तक पहले सत्र में और ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा की दूसरे सत्र में कक्षाएं लग रही हैं। हैरत की बात यह है कि यह समस्या पिछले छह साल से बनी है। यानी सैकड़ों विद्यार्थी इस अव्यवस्था के बीच पढ़ाई कर गए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो पाया। जानकारी के अनुसार बाल स्कूल ऊना में कुल 498 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन यहां कुल कमरे मात्र 11 हैं। इसी में अध्यापकों के लिए कमरे हैं और कक्षाएं भी इन्हीं में संचालित होती हैं। बच्चों की पढ़ाई बेहतर तरीके से चले, इसके लिए प्रबंधन ने एक कमरे के बीच अलमारियां लगाकर उसमें दो कक्षाएं लगानी शुरू कर दीं, लेकिन स्कूल में बच्चों की संख्या अच्छी है, इसलिए कई बार बच्चों को तंग होकर बैठना पड़ता है। डेस्क और बेंच जोड़कर चार-चार बच्चों का बैठना तो हर दिन की बात है।
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वहीं, सर्दी के मौसम में चुनौतियां और बढ़ जाती है। कई बार बच्चों को बाहर धूप में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। शाम के समय अंधेरा जल्दी हो जाता है, जिस कारण दूर दराज से आने वाले बच्चों को खासी परेशानी होती है।
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नहीं खत्म हुआ वर्षों का इंतजार
ध्यान रहे कि बाल स्कूल ऊना का नया भवन करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा है। यह निर्माण करीब पांच साल से जारी है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ। बजट के अभाव में स्कूल की नई इमारत खराब हो रही है। उधर, स्कूल अध्यापक और विद्यार्थी इस इंतजार में हैं कि कब नए भवन का निर्माण पूरा हो, ताकि उसमें कक्षाएं शुरू हो सकें।
कोट्स
बाल स्कूल ऊना में करीब छह साल से दो सत्र में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। नए भवन का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ, जिसका बेसब्री से इंतजार है। मौजूदा भवन में सुविधाजनक तरीके से पढ़ाई संभव नहीं है। फिर भी अध्यापक व स्टाफ अपना शत प्रतिशत योगदान दे रहे हैं। सरकार व प्रशासन से अपील है कि बाल स्कूल ऊना के नए भवन के अटके कार्य को जल्द पूरा किया जाए।
सुरेंद्र कौंडल, प्रधानाचार्य, रावमापा बाल ऊना

ऊना के बाल स्कूल में कक्षा में बैठे छात्र।संवाद