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चिट्टा मतलब मौत, सोच समझकर संगत करें : एमआर नायक

Sat, 09 Nov 2024 01:02 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2024 01:02 AM IST
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Chitta means death, do company thoughtfully: MR Nayak
स्वदेश मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी प​ब्लिक स्कूल जखेड़ा में हुई पुलिस की पाठशाला के दौरान मौजूद वि
बोले- सोशल मीडिया और फेसबुक से दूरी बनाएं बच्चे, समाज में लापरवाही से अपराध का बढ़ रहा ग्राफ
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अमर उजाला फाउंडेशन के पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में किया जागरूक
संवाद न्यूज एजेंसी


जखेड़ा (ऊना)। समाज में लापरवाही की वजह से अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है। बच्चों के बिना लाइसेंस वाहन चलाने की सूरत में दुर्घटनाएं हो रही हैं। बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाने पर सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं। इससे बचने के लिए बच्चों और अभिभावकों को जागरूक करना जरूरी है। स्वदेश मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल जखेड़ा में शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में मैहतपुर थाना प्रभारी एमआर नायक ने मुख्य वक्ता के रूप में ये बातें कहीं हैं।
एमआर नायक ने बच्चों को ट्रैफिक नियम, साइबर क्राइम, सोशल मीडिया और नशे के दुष्परिणाम के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे अपने पड़ोस में भी लोगों को ड्रिंक एंड ड्राइव न करने के बारे में जागरूक करने के लिए प्रेरित करें। मोबाइल सुनते समय वाहन न चलाएं। दुर्घटना के मामलों में हेड इंजरी से अधिकतर मौतें हुई हैं। फोन बहुत बड़ी बीमारी है। समाज में बच्चों पर उनकी संगत का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इनकार करने की आदत डालें और अच्छी संगत करें। आज की युवा पीढ़ी नशे की चपेट में है। चिट्टा मतलब मौत। इसके लिए खुद को जागरूक करके ही बचाव किया जा सकता है। गलत संगत में बच्चे भी आरोपी साबित हो रहे हैं। सोच समझकर संगत करें। सोशल मीडिया से दूर रहें। फेसबुक पर कोई भी सूचना शेयर न करें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। साइबर क्राइम अनवांटेड लिंक पर क्लिक करने से बढ़ रहे हैं और इसमें सबसे बड़ी लापरवाही खुद की है। बिना हेलमेट के वाहन चलाने की सूरत में 1000 का चालान है और बिना लाइसेंस के शराब पीकर गाड़ी चलाने की सूरत में 25000 जुर्माना और तीन महीने की सजा है। आस-पड़ोस में बिना पंजीकरण के अगर कोई भी फेरी वाला घूम रहा है तो उससे पूछताछ अवश्य करें। कार्यक्रम में स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल वस्त विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
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विद्यार्थी अश्मित ने कहा कि कार्यक्रम में सोशल मीडिया से दूर रहने की जानकारी मिली। सोशल मीडिया से जुड़े खतरों के बारे में पता नहीं था। भविष्य में सावधानी के साथ इसका इस्तेमाल करेंगे या इससे दूरी बनाना ही बेहतर है।
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छात्र पार्थ ने कहा कि पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में ट्रैफिक नियमों के बारे में जानकारी मिली। वह अपने आसपास 18 साल से कम आयु के बच्चों को वाहन न चलाने के बारे में जागरूक करेंगे। इसके साथ उसे लाइसेंस और हेलमेट के महत्व का भी पता चला।
छात्रा श्रेया ने कहा कि पुलिस की पाठशाला में लड़कियों के लिए बनाए गए कानून के बारे में जानकारी मिली। जिससे वह समाज में भी लोगों को जागरूक करेंगी।
छात्रा समीक्षा ने कहा कि पुलिस की पाठशाला में महिलाओं के मन में पुलिस के प्रति जो डर था, वह दूर हुआ है। अब पता चला कि पुलिस हमारी दोस्त है।
छात्र अक्षु ने कहा कि कार्यक्रम में नाबालिग को वाहन ड्राइव न करने के बारे में जानकारी मिली। कहा कि साइबर क्राइम और हेल्पलाइन नंबर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी इस कार्यक्रम से मिली।
छात्रा आनंदी ने सवाल किया कि लड़कियों को लड़कों की तरह आने-जाने में ज्यादा रोक टोक क्यों की जाती है। जबकि दोनों बराबर हैं। इसका भी मुख्यातिथि ने जवाब दिया।

छात्रा खुशी ने कहा कि साइबर क्राइम बढ़ रहा है। सरकार ऐसी साइटों पर बैन क्यों नहीं लगा देती है ताकि लोग इसके झांसे में न आएं।
रिदम ने कहा कि सोशल मीडिया का प्रचलन बढ़ने से अधिकतर मामले ठगी के सामने आ रहे हैं। इस दिशा में सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।
वानव शर्मा ने सवाल किया कि रोजाना इतनी मात्रा में ड्रग पकड़ी जाती है। इसका आगे सरकार और पुलिस क्या करती है। ड्रग को खत्म करने की दिशा में क्या पहल की जा रही है।
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