{"_id":"682489c7ba548778ce09b19d","slug":"along-with-devotion-to-god-patriotism-is-also-necessary-una-news-c-93-1-una1002-153716-2025-05-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईश्वर की भक्ति के साथ देश भक्ति भी जरूरी : सहप्रिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ईश्वर की भक्ति के साथ देश भक्ति भी जरूरी : सहप्रिया
विज्ञापन
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। ईश्वर की भक्ति के साथ हम सब में देश भक्ति की भावना भी होनी चाहिए। जिस प्रकार आध्यात्मिक शुद्धि के लिए ईश्वर भक्ति जरूरी है, उसी प्रकार राष्ट्र की रक्षा के लिए देशभक्ति का होना जरूरी है। अभी पाकिस्तान के दुस्साहस का करारा जवाब देते हुए हमारी भारतीय सेना ने जो पराक्रम दिखाया उससे प्रत्येक भारतीय के अंदर देश भक्ति को देखा गया। रायपुर सहोड़ा गांव के प्राचीन रामेश्वर शिव मंदिर में श्री भक्त माल की कथा के पहले दिन व्यासपीठ से यह बात कही। कहा कि ईश्वर की भक्ति करने से पूर्व पहले ईश्वर या भक्ति को जानना जरूरी है। जब तक हम ईश्वर की भक्ति को जान नहीं लेते तब तक ईश्वर की भक्ति नहीं हो सकती। साध्वी ने कहा कि जिस प्रकार से श्रीमद् भागवत सप्ताह की कथा को राजा परीक्षित ने सुना था, ठीक उसी प्रकार श्री भक्तमाल की कथा को स्वयं ईश्वर सुनते हैं। भक्ति में वह शक्ति है जो ईश्वर को भी अपने वश में कर सकती है।
श्री भक्त माल का अर्थ बताते हुए साध्वी सहप्रिया ने कहा कि माला के मोती को भक्त कहा गया है। माला के धागे को भक्ति और सुमेरु को गुरु की संज्ञा दी गई है और जो माला के शिखर पर पुष्प है उसे ईश्वर कहा गया है। श्री भक्त माल की कथा में उन तमाम भक्तों की कथा का वर्णन बताया गया है, जिन्होंने अपना जीवन ईश्वर की अनंत भक्ति में लगा दिया।
विज्ञापन
मैहतपुर (ऊना)। ईश्वर की भक्ति के साथ हम सब में देश भक्ति की भावना भी होनी चाहिए। जिस प्रकार आध्यात्मिक शुद्धि के लिए ईश्वर भक्ति जरूरी है, उसी प्रकार राष्ट्र की रक्षा के लिए देशभक्ति का होना जरूरी है। अभी पाकिस्तान के दुस्साहस का करारा जवाब देते हुए हमारी भारतीय सेना ने जो पराक्रम दिखाया उससे प्रत्येक भारतीय के अंदर देश भक्ति को देखा गया। रायपुर सहोड़ा गांव के प्राचीन रामेश्वर शिव मंदिर में श्री भक्त माल की कथा के पहले दिन व्यासपीठ से यह बात कही। कहा कि ईश्वर की भक्ति करने से पूर्व पहले ईश्वर या भक्ति को जानना जरूरी है। जब तक हम ईश्वर की भक्ति को जान नहीं लेते तब तक ईश्वर की भक्ति नहीं हो सकती। साध्वी ने कहा कि जिस प्रकार से श्रीमद् भागवत सप्ताह की कथा को राजा परीक्षित ने सुना था, ठीक उसी प्रकार श्री भक्तमाल की कथा को स्वयं ईश्वर सुनते हैं। भक्ति में वह शक्ति है जो ईश्वर को भी अपने वश में कर सकती है।
श्री भक्त माल का अर्थ बताते हुए साध्वी सहप्रिया ने कहा कि माला के मोती को भक्त कहा गया है। माला के धागे को भक्ति और सुमेरु को गुरु की संज्ञा दी गई है और जो माला के शिखर पर पुष्प है उसे ईश्वर कहा गया है। श्री भक्त माल की कथा में उन तमाम भक्तों की कथा का वर्णन बताया गया है, जिन्होंने अपना जीवन ईश्वर की अनंत भक्ति में लगा दिया।
विज्ञापन