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सभी अपराधों को जन्म देता है नशा : सतीश
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बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गुगलैहड़ में वीरवार को नशा निवारण पर कार्यशाला करवाई गई। इसमें बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। सेवानिवृत्त प्रवक्ता सतीश शर्मा ने बच्चों को बताया कि सभी अपराधों की जननी नशा ही है। बच्चा परिपक्व न होने की वजह से नशे की चपेट में आ जाता है। इसके बाद उसे वापस आना मुश्किल हो जाता है। बताया कि नशे का मतलब ही अकाल मृत्यु है। नशे से बचने के लिए उन्होंने बुरी संगत आज ही छोड़ने के लिए बच्चों को प्रेरित किया। बताया कि बुरी संगत छोड़ते ही नशा अपने आप दूर भागना शुरू हो जाएगा। केमिकल नशा सामने होता है, उसका किसी न किसी ढंग से इलाज भी हो सकता है परंतु छुप कर किया जाने वाला नशा बहुत ही भयानक होता है। जिसे ज्यादातर बच्चे रात के समय फोन पर वीडियोगेम, अन्य वीडियो पोर्नोग्राफी इत्यादि जो चीज उनके देखने वाली नहीं होती, उन्हें उनकी लत लग जाती है। इससे छुटकारा पाना बहुत ही मुश्किल होता है। मोबाइल फोन का नशा भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बच्चों को इससे बचाना अभिभावकों और अध्यापकों का कर्तव्य है। नशे की चपेट से बाहर निकालने के लिए आध्यात्मिक का भी सहारा लिया जा सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गुगलैहड़ में वीरवार को नशा निवारण पर कार्यशाला करवाई गई। इसमें बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। सेवानिवृत्त प्रवक्ता सतीश शर्मा ने बच्चों को बताया कि सभी अपराधों की जननी नशा ही है। बच्चा परिपक्व न होने की वजह से नशे की चपेट में आ जाता है। इसके बाद उसे वापस आना मुश्किल हो जाता है। बताया कि नशे का मतलब ही अकाल मृत्यु है। नशे से बचने के लिए उन्होंने बुरी संगत आज ही छोड़ने के लिए बच्चों को प्रेरित किया। बताया कि बुरी संगत छोड़ते ही नशा अपने आप दूर भागना शुरू हो जाएगा। केमिकल नशा सामने होता है, उसका किसी न किसी ढंग से इलाज भी हो सकता है परंतु छुप कर किया जाने वाला नशा बहुत ही भयानक होता है। जिसे ज्यादातर बच्चे रात के समय फोन पर वीडियोगेम, अन्य वीडियो पोर्नोग्राफी इत्यादि जो चीज उनके देखने वाली नहीं होती, उन्हें उनकी लत लग जाती है। इससे छुटकारा पाना बहुत ही मुश्किल होता है। मोबाइल फोन का नशा भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बच्चों को इससे बचाना अभिभावकों और अध्यापकों का कर्तव्य है। नशे की चपेट से बाहर निकालने के लिए आध्यात्मिक का भी सहारा लिया जा सकता है।