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Una News: चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट में दिखेगा नया नेतृत्व, दो नए चेहरे बनेंगे ट्रस्टी
Sun, 31 May 2026 12:14 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 31 May 2026 12:14 AM IST
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भरवाई (ऊना)। पंचायत चुनावों के परिणाम घोषित होने के साथ ही माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट के नए स्वरूप की तस्वीर भी साफ हो गई है। इस बार ट्रस्ट में दो नए चेहरे शामिल होंगे, जबकि एक अनुभवी प्रतिनिधि को लगातार दूसरी बार ट्रस्ट में जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला है। नए नेतृत्व से मंदिर और क्षेत्र के विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नारी, चिंतपूर्णी-छपरोह और गंगोट के निर्वाचित प्रधान ट्रस्ट के सदस्य (ट्रस्टी) बनते हैं। हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों के नतीजों के बाद इन तीनों पंचायतों के प्रतिनिधियों का चयन भी स्वतः हो गया है।
चुनाव परिणामों के अनुसार नारी पंचायत से परवीन कुमारी प्रधान निर्वाचित हुई हैं, जबकि चिंतपूर्णी-छपरोह पंचायत से अंजू कालिया ने जीत हासिल की है। दोनों पहली बार चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा बनेंगी। ट्रस्ट में शामिल होने के बाद वे मंदिर प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, विकास योजनाओं और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में अपनी भूमिका निभाएंगी।
वहीं गंगोट पंचायत से ऐश्वर्या शर्मा लगातार दूसरी बार प्रधान चुनी गई हैं। इसके साथ ही उन्हें दोबारा मंदिर ट्रस्ट में ट्रस्टी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला है। ट्रस्ट के कार्यों और व्यवस्थाओं का पूर्व अनुभव होने के कारण उनसे आगामी योजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद की जा रही है।
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माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर ट्रस्ट श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, आधारभूत ढांचे के विकास, विभिन्न निर्माण कार्यों, स्वच्छता व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों के संचालन में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में ट्रस्ट में शामिल होने वाले नए प्रतिनिधियों पर क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि तीनों पंचायतों का प्रतिनिधित्व करने वाले ट्रस्टी क्षेत्र की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए मंदिर और आसपास के क्षेत्रों के विकास को नई दिशा देंगे। विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने की उम्मीद की जा रही है।
पंचायत चुनावों के बाद अब लोगों की नजरें चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट की आगामी कार्ययोजना और नए नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि नए और अनुभवी नेतृत्व के समन्वय से मंदिर प्रबंधन तथा क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले आने वाले समय में देखने को मिल सकते हैं।
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चुनाव परिणामों के अनुसार नारी पंचायत से परवीन कुमारी प्रधान निर्वाचित हुई हैं, जबकि चिंतपूर्णी-छपरोह पंचायत से अंजू कालिया ने जीत हासिल की है। दोनों पहली बार चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा बनेंगी। ट्रस्ट में शामिल होने के बाद वे मंदिर प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, विकास योजनाओं और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में अपनी भूमिका निभाएंगी।
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वहीं गंगोट पंचायत से ऐश्वर्या शर्मा लगातार दूसरी बार प्रधान चुनी गई हैं। इसके साथ ही उन्हें दोबारा मंदिर ट्रस्ट में ट्रस्टी के रूप में कार्य करने का अवसर मिला है। ट्रस्ट के कार्यों और व्यवस्थाओं का पूर्व अनुभव होने के कारण उनसे आगामी योजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद की जा रही है।
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माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर ट्रस्ट श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, आधारभूत ढांचे के विकास, विभिन्न निर्माण कार्यों, स्वच्छता व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णयों के संचालन में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में ट्रस्ट में शामिल होने वाले नए प्रतिनिधियों पर क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि तीनों पंचायतों का प्रतिनिधित्व करने वाले ट्रस्टी क्षेत्र की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए मंदिर और आसपास के क्षेत्रों के विकास को नई दिशा देंगे। विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने की उम्मीद की जा रही है।
पंचायत चुनावों के बाद अब लोगों की नजरें चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट की आगामी कार्ययोजना और नए नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि नए और अनुभवी नेतृत्व के समन्वय से मंदिर प्रबंधन तथा क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले आने वाले समय में देखने को मिल सकते हैं।