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ये मनोरंजन पार्क है या गोशाला
Una
Updated Tue, 21 Jan 2014 05:48 AM IST
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मैहतपुर (ऊना)। एक ओर गोबर के ढेर, दूसरी ओर पशु चारा पड़ा। चारों तरफ गोबर के उपले रखे गए। यह नजारा किसी गोशाला का नहीं नगर के मनोरंजन पार्क का है। यह मनोरंजन पार्क पशुओं को बांधने, पशु चारा रखने और गोबर के उपले तैयार करने में इस्तेमाल हो रहा है। देखने पर यह पार्क नहीं गोशाला लगता है।
पार्क का निर्माण आईडीएसएमटी (इंटीग्रेटेड डबलपमैंट ऑफ स्माल एंड मीडियम टाऊन) योजना 2002 के तहत हुआ। आधे-अधूरे निर्मित इस मनोरंजन पार्क की दुर्दशा साफ बयां होती है। जिस वक्त इस मनोरंजन पार्क की नींव रखी गई होगी, उस वक्त शायद ही स्थानीय बच्चाें के जहन में यह बात आई होगी, कि आगे चलकर उनके मनोरंजन के लिए बनने जा रहे इस पार्क की क्या दुर्गति होने वाली है। स्थानीय नगर पंचायत इस पार्क के निर्माण पर अब तक कुल 14 लाख 28 हजार और 533 रुपये की रकम खर्च कर चुकी है, लेकिन पार्क की दुर्दशा का आलम यह है कि यहां बच्चों का खेलना कूदना तो क्या, दो घड़ी खड़े होने का भी मन न करे। घास, पूस से और झाड़ियों से भरे पड़े इस मनोरंजन पार्क को स्थानीय नगर पंचायत 70 फीसदी तक तैयार हो हुआ मान रही है, लेकिन जिसमें एक भी झूला न हो, बच्चों की खेलकूद का कोई साधन न हो, बड़े बुजुर्गों के दो घड़ी बैठने का कोई बंदोबस्त तक न हो, क्या उसे पार्क कहेंगे? नगर पंचायत अगर इसे ही मनोरंजन पार्क कहती है, तो फिर इससे भद्दा मजाक इस इलाके के लोगों के साथ कोई दूसरा हो ही नहीं सकता। स्थानीय युवा नेता राजीव भारद्वाज को नपं द्वारा मिली सूचना में इस बात का खुलासा होता है कि पार्क का काम दिसंबर 2013 तक पूरी तरह पूरा किया जाना प्रस्तावित था।
इनका कहना है...
स्थानीय युवा नेता राजीव भारद्वाज, पार्षद वासुदेव शर्मा, पार्षद राजेंद्र कौर, पूर्व पार्षद राजपाल, क्षेत्र के युवाओं नितिन, सुलभ, मनी, कुलदीप, विवेक, नेहा, करण, तथा स्पनिल ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी, कि पार्क सुंदर ढंग से और जल्द बनकर तैयार होगा, लेकिन वहां तक इतनी गंदगी है, कि खड़े होने को भी दिल नहीं करता।
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क्या कहते हैं नपं अध्यक्ष
नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन सिंह ने कहा कि पार्क का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, वहां और पैसा खर्च होगा, जिस के बाद वह इस्तेमाल होने के काबिल हो सकेगा।
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पार्क का निर्माण आईडीएसएमटी (इंटीग्रेटेड डबलपमैंट ऑफ स्माल एंड मीडियम टाऊन) योजना 2002 के तहत हुआ। आधे-अधूरे निर्मित इस मनोरंजन पार्क की दुर्दशा साफ बयां होती है। जिस वक्त इस मनोरंजन पार्क की नींव रखी गई होगी, उस वक्त शायद ही स्थानीय बच्चाें के जहन में यह बात आई होगी, कि आगे चलकर उनके मनोरंजन के लिए बनने जा रहे इस पार्क की क्या दुर्गति होने वाली है। स्थानीय नगर पंचायत इस पार्क के निर्माण पर अब तक कुल 14 लाख 28 हजार और 533 रुपये की रकम खर्च कर चुकी है, लेकिन पार्क की दुर्दशा का आलम यह है कि यहां बच्चों का खेलना कूदना तो क्या, दो घड़ी खड़े होने का भी मन न करे। घास, पूस से और झाड़ियों से भरे पड़े इस मनोरंजन पार्क को स्थानीय नगर पंचायत 70 फीसदी तक तैयार हो हुआ मान रही है, लेकिन जिसमें एक भी झूला न हो, बच्चों की खेलकूद का कोई साधन न हो, बड़े बुजुर्गों के दो घड़ी बैठने का कोई बंदोबस्त तक न हो, क्या उसे पार्क कहेंगे? नगर पंचायत अगर इसे ही मनोरंजन पार्क कहती है, तो फिर इससे भद्दा मजाक इस इलाके के लोगों के साथ कोई दूसरा हो ही नहीं सकता। स्थानीय युवा नेता राजीव भारद्वाज को नपं द्वारा मिली सूचना में इस बात का खुलासा होता है कि पार्क का काम दिसंबर 2013 तक पूरी तरह पूरा किया जाना प्रस्तावित था।
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इनका कहना है...
स्थानीय युवा नेता राजीव भारद्वाज, पार्षद वासुदेव शर्मा, पार्षद राजेंद्र कौर, पूर्व पार्षद राजपाल, क्षेत्र के युवाओं नितिन, सुलभ, मनी, कुलदीप, विवेक, नेहा, करण, तथा स्पनिल ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी, कि पार्क सुंदर ढंग से और जल्द बनकर तैयार होगा, लेकिन वहां तक इतनी गंदगी है, कि खड़े होने को भी दिल नहीं करता।
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क्या कहते हैं नपं अध्यक्ष
नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन सिंह ने कहा कि पार्क का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, वहां और पैसा खर्च होगा, जिस के बाद वह इस्तेमाल होने के काबिल हो सकेगा।