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शौकीनों को पंसद आई नई आबकारी नीति
Updated Tue, 27 Feb 2018 10:18 PM IST
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red wine
अमर उजाला ब्यूरो
मैहतपुर (ऊना)। राज्य सरकार की नई आबकारी नीति से भले ही आम लोगों का कोई वास्ता हो न हो, लेकिन रूटीन में दारू पीने वाले शराब के शौकीनों ने मौजूदा सरकार की इस नीति का खुले दिल से समर्थन एवं आभार प्रकट करते हुए इसे सरकार का अच्छा कदम करार दिया है। इनका मानना है कि वह जब भी दारू की खरीद करते हैं, तो शराब की दुकानों पर दारू के मनमाने दाम वसूले जाते हैं और इसी वजह से शराब की दुकानों पर तैनात ठेकेदारों के कारिंदे शराब की बिक्री पर बिल नहीं देते हैं। यही कारण है कि शराब की बोतल पर अंकित दामों से ज्यादा वसूली की जाती है। राज्य सरकार ने शराब की बिक्री को लेकर आबकारी नीति में जो बड़ा निर्णय लिया है, उससे आम शराब उपभोक्ताओं को तो बड़ा फायदा होगा ही, साथ ही शराब की दुकानों पर होने वाली इस लूट पर भी नकेल लग सकेगी। रूटीन में दारू पीने वाले इन दारूबाजों को प्रतिदिन एक सौ से लेकर डेढ़ सौ रुपये तक प्रति बोतल की चपत लगती है, जिससे अब राहत मिलने की इन्हें उम्मीद जगी है। इन दारूबाजों की राज्य सरकार से यह भी मांग है कि अन्य वस्तुओं की बिक्री करने पर जिस प्रकार बिल काटे जाते हैं, उसी तरह शराब की बोतल की बिक्री पर भी खरीदार को मांगने पर शराब की दुकानों से बिल दिया जाना आवश्यक किया जाना चाहिए। शराब उपभोक्ता विवेक कुमार, सुभाष, रमेशचंद, निक्का राम, बलजीत सिंह, सोहन समेत अनेक अन्य उपभोक्ताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार की नई आबकारी नीति को कठोरता से लागू किया जाना लाजमी है, जिससे ठेकेदारों के कारिंदे शराब की बोतल पर प्रिंट एमआरपी का कोई तोड़ न निकाल पाए और न ही शराब की दुकानों पर शराब के मनमाने दाम वसूले जा सकें।
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मैहतपुर (ऊना)। राज्य सरकार की नई आबकारी नीति से भले ही आम लोगों का कोई वास्ता हो न हो, लेकिन रूटीन में दारू पीने वाले शराब के शौकीनों ने मौजूदा सरकार की इस नीति का खुले दिल से समर्थन एवं आभार प्रकट करते हुए इसे सरकार का अच्छा कदम करार दिया है। इनका मानना है कि वह जब भी दारू की खरीद करते हैं, तो शराब की दुकानों पर दारू के मनमाने दाम वसूले जाते हैं और इसी वजह से शराब की दुकानों पर तैनात ठेकेदारों के कारिंदे शराब की बिक्री पर बिल नहीं देते हैं। यही कारण है कि शराब की बोतल पर अंकित दामों से ज्यादा वसूली की जाती है। राज्य सरकार ने शराब की बिक्री को लेकर आबकारी नीति में जो बड़ा निर्णय लिया है, उससे आम शराब उपभोक्ताओं को तो बड़ा फायदा होगा ही, साथ ही शराब की दुकानों पर होने वाली इस लूट पर भी नकेल लग सकेगी। रूटीन में दारू पीने वाले इन दारूबाजों को प्रतिदिन एक सौ से लेकर डेढ़ सौ रुपये तक प्रति बोतल की चपत लगती है, जिससे अब राहत मिलने की इन्हें उम्मीद जगी है। इन दारूबाजों की राज्य सरकार से यह भी मांग है कि अन्य वस्तुओं की बिक्री करने पर जिस प्रकार बिल काटे जाते हैं, उसी तरह शराब की बोतल की बिक्री पर भी खरीदार को मांगने पर शराब की दुकानों से बिल दिया जाना आवश्यक किया जाना चाहिए। शराब उपभोक्ता विवेक कुमार, सुभाष, रमेशचंद, निक्का राम, बलजीत सिंह, सोहन समेत अनेक अन्य उपभोक्ताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार की नई आबकारी नीति को कठोरता से लागू किया जाना लाजमी है, जिससे ठेकेदारों के कारिंदे शराब की बोतल पर प्रिंट एमआरपी का कोई तोड़ न निकाल पाए और न ही शराब की दुकानों पर शराब के मनमाने दाम वसूले जा सकें।