{"_id":"688ccd92203f0b804107f5ac","slug":"41-thousand-devotees-paid-obeisance-on-the-day-of-ashtami-una-news-c-93-1-una1002-161108-2025-08-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: अष्टमी के दिन 41 हजार श्रद्धालुओं ने नवाया शीश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: अष्टमी के दिन 41 हजार श्रद्धालुओं ने नवाया शीश
विज्ञापन
मां चिंतपूर्णी के दरबार माता टेकने के लिए उमड़ी श्रदालुओं की भीड़।संवाद
सावन अष्टमी मेले में रही कोरोना काल के बाद सबसे ज्यादा भीड़
लंगर संस्थाओं ने समेटा अपना सामान, ज्यादातर लंगर बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
चिंतपूर्णी (ऊना)। माता चिंतपूर्णी दरबार में सावन अष्टमी मेले के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने माता रानी के चरणों में शीश नवाकर सुख-शांति की प्रार्थना की। अष्टमी के दिन कुल 41 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की डबल लाइनें लगी रहीं। बीते चार दिनों से लगातार दिन-रात श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। हालांकि, अष्टमी की रात तक यह संख्या सामान्य हो जाती है। बताया जा रहा है कि कोरोना काल के बाद इस बार सावन अष्टमी मेले में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली है। महामारी के बाद पिछले वर्षों में मेले में श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन इस बार मेले की शुरुआत से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई। अष्टमी के दिन कई लंगर संस्थाओं ने अपना सेवा कार्य समेट लिया और अधिकांश लंगर बंद हो गए हैं। अब सिर्फ कुछ ही लंगर चालू हैं। मंदिर न्यास की ओर से संचालित ‘लंगर सदन’ में अब भी सेवा जारी है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई श्रद्धालुओं को इसके बारे में पता ही नहीं है। मंदिर न्यास द्वारा इस लंगर के प्रचार-प्रसार में भी कमी रही है। इस बीच होटल और ढाबा संचालकों ने भी अपने भोजनालय फिर से शुरू करने की तैयारी कर ली है, क्योंकि लंगर चलने के कारण कई दिनों से उनका काम ठप पड़ा था। अष्टमी के दिन रुक-रुक कर बारिश होती रही, जिससे मेला क्षेत्र में काफी सफाई हो गई। कुछ स्थानों पर लंगर के कारण गंदगी और बदबू फैलने लगी थी, लेकिन बारिश ने स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया। बारिश के चलते कई श्रद्धालु छाता और रेनकोट लेकर मेला क्षेत्र में नजर आए। मंदिर अधिकारी अजय मंडियाल ने बताया कि अष्टमी के दिन कुल 41 हजार श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाया और मेला पूरी तरह शांतिपूर्वक संपन्न हो रहा है। सुलभ शौचालयों के इंचार्ज अभय सिंह ने भी बताया कि बारिश से क्षेत्र में सफाई बेहतर हुई है। मौसम ठीक रहने पर कीटनाशक, चूना आदि का छिड़काव भी किया जाएगा।
विज्ञापन
लंगर संस्थाओं ने समेटा अपना सामान, ज्यादातर लंगर बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
चिंतपूर्णी (ऊना)। माता चिंतपूर्णी दरबार में सावन अष्टमी मेले के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने माता रानी के चरणों में शीश नवाकर सुख-शांति की प्रार्थना की। अष्टमी के दिन कुल 41 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की डबल लाइनें लगी रहीं। बीते चार दिनों से लगातार दिन-रात श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। हालांकि, अष्टमी की रात तक यह संख्या सामान्य हो जाती है। बताया जा रहा है कि कोरोना काल के बाद इस बार सावन अष्टमी मेले में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली है। महामारी के बाद पिछले वर्षों में मेले में श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन इस बार मेले की शुरुआत से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई। अष्टमी के दिन कई लंगर संस्थाओं ने अपना सेवा कार्य समेट लिया और अधिकांश लंगर बंद हो गए हैं। अब सिर्फ कुछ ही लंगर चालू हैं। मंदिर न्यास की ओर से संचालित ‘लंगर सदन’ में अब भी सेवा जारी है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई श्रद्धालुओं को इसके बारे में पता ही नहीं है। मंदिर न्यास द्वारा इस लंगर के प्रचार-प्रसार में भी कमी रही है। इस बीच होटल और ढाबा संचालकों ने भी अपने भोजनालय फिर से शुरू करने की तैयारी कर ली है, क्योंकि लंगर चलने के कारण कई दिनों से उनका काम ठप पड़ा था। अष्टमी के दिन रुक-रुक कर बारिश होती रही, जिससे मेला क्षेत्र में काफी सफाई हो गई। कुछ स्थानों पर लंगर के कारण गंदगी और बदबू फैलने लगी थी, लेकिन बारिश ने स्थिति को काफी हद तक संभाल लिया। बारिश के चलते कई श्रद्धालु छाता और रेनकोट लेकर मेला क्षेत्र में नजर आए। मंदिर अधिकारी अजय मंडियाल ने बताया कि अष्टमी के दिन कुल 41 हजार श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाया और मेला पूरी तरह शांतिपूर्वक संपन्न हो रहा है। सुलभ शौचालयों के इंचार्ज अभय सिंह ने भी बताया कि बारिश से क्षेत्र में सफाई बेहतर हुई है। मौसम ठीक रहने पर कीटनाशक, चूना आदि का छिड़काव भी किया जाएगा।