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मछलियों, मवेशियों का काल बना सोमभद्रा का पानी
Updated Sun, 05 Aug 2018 11:14 PM IST
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भैंस की माैत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराे
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एसडी शर्मा
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मैहतपुर (ऊना)। बीते सप्ताह सोमभद्रा नदी में आए दूषित पानी से दर्जनों मछलियां मर गई हैं। इससे पंजाब के सरहदी गांवों के किसानों में भय है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पंजाब के आला अधिकारियों ने मछलियों के मरने का मुख्य वजह प्रदूषित पानी बताया है।
बोर्ड ने कहा है कि प्रदूषित पानी हिमाचल के उद्योगों से आ रहा है। इससे न केवल सोमभद्रा नदी में मछलियों के लिए काल साबित हो रहा है, बल्कि इस पानी के सेवन से मवेशियों की जान तक जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कुछ अरसा पहले भी सोमभद्रा नदी में उद्योगों का काला गंदा पानी आया था। इससे सोमभद्रा नदी के किनारे पंजाब के किसानों की भैंसें मर गई थीं। उस वक्त भी मामला रफा-दफा कर दिया गया। बीते सप्ताह दर्जनों मछलियों के मरने से पुराने जख्म ताजा हो गए हैं।
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सोमभद्रा किनारे मवेशी चराने वाले मदनलाल ने कहा कि वह करीब 40 साल से पशु चरा रहा है। उसे अकसर नदी के पानी से गुजरा करना पड़ता है। इससे उसके पांव भी सड़ गए हैं। वह नंगल अस्पताल में उपचार करवा रहा है। पंजाब के नानग्रां गांव के निवासी सतपाल, मोहन सिंह, गुरमेल सिंह, संदीप, राकेश ने कहा कि सोमभद्रा नदी में अकसर गंदा काला पानी आता है। किसी ने भी आज दिन तक इस ओर कदम नहीं उठाया है। इनका कहना है कि अगर इस पानी को मवेशी पी ले तो उनकी मौत निश्चित है। बीते सप्ताह इसी गंदे पानी में दर्जनों मछलियों ने तड़प तड़प कर मर गईं।
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मजदूर बोरियों में ले गए मरी मछलियां
नानग्रां गांव के लोगों ने बताया कि सोमभद्रा में मरी दर्जनों मछलियों को कई मजदूर बोरियों में भर ले गए। नानग्रां में जहां मछलियां मरीं वहां पर अवैध खनन के चलते बड़े-बड़े गड्ढे हैं। मछलियों का इन दिनों ब्रीडिंग सीजन चल रहा है। वह प्रजजन के लिए इन खड्डों में एकत्र होती है। स्थानीय निवासी सतपाल ने कहा कि कुछ साल पूर्व स्वां नदी में इसी स्थान पर जमा हुए काले गंदा पानी को पीने की कारण सोहन सिंह तीन भैंसें मर गई थीं। उसे चार लाख का नुकसान उठाना पड़ा था।
हिमाचल के उद्योगों से आ रहा गंदा पानी : जोशी
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ जतिन जोशी ने कहा कि सोमभद्रा में प्रदूषित पानी की मुख्य वजह हिमाचल के उद्योगों से आने वाला दूषित पानी है। उधर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ऊना के अधिशासी अभियंता एसके धीमान का कहना है कि पंजाब के दयापुर गांव के पास नंगल के कैमिकल उद्योग का एंफुलैंट का पाइप नदी में गिरता है। उस क्षेत्र के आगे ही जहां मछलियां मरीं वह उस उद्योग का कैमिकलयुक्त पानी मुख्य वजह हो सकता है। टाहलीवाल के उद्योगों से ऐसा कोई पानी नहीं जाता, फिर भी इस मामले की जांच की जाएगी। हिमाचल प्रदेश ने भी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।