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जब गुरु ही नहीं, तो कैसे मिलेगा ज्ञान
Updated Thu, 22 Nov 2018 10:32 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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दौलतपुर चौक (ऊना)। रायपुर पंचायत की प्राथमिक पाठशाला मल्ला द पिंड मात्र एक अध्यापक के सहारे चल रहा है। इससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक परेशान हैं। एक तरफ सरकार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए अनेकों प्रयास कर रही है। दूसरी तरफ स्कूलों में अध्यापकों की कमी अभिभावकों और बच्चों दोनों के लिए अभिशाप बन रही है।
रायपुर ग्राम पंचायत की महिला मंडल प्रधान रक्षा देवी ने बताया कि स्कूल में 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल में एक ही अध्यापक है जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल में हेड टीचर भी नहीं है। 60 विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूल में हेडटीचर के अलावा तीन अध्यापक होने चाहिए। लेकिन मल्ला द पिड में अध्यापकों की कमी के चलते अभिभावकों में शिक्षा विभाग के प्रति रोष पनप रहा है। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अनुरोध किया है कि मल्ला द पिंड में खाली शिक्षकों के पद शीघ्र भरे जाएं ताकि गरीब विद्यार्थियों को गुणवत्ता आधारित शिक्षा मिल सके।
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इस बारे में प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक हंसराज गुलेरिया का कहना है कि मामला उनके ध्यान में आया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में खाली पड़े पदों के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जल्द स्कूलों में खाली पड़े पदों पर शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
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