{"_id":"5a01ad824f1c1bd1538bb67a","slug":"121510059394-una-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विनम्रता के लिए जरूरी है संतों की संगति: हेमानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विनम्रता के लिए जरूरी है संतों की संगति: हेमानंद
Updated Tue, 07 Nov 2017 06:58 PM IST
विज्ञापन
bhadsali
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो।
विज्ञापन
ऊना।
भदसाली गांव में मंगलवार को धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें डेरा बाबा रुद्रानंद से स्वामी हेमानंद महाराज ने शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रवचनों की रसवर्षा की। उन्होंने कहा कि आज के युवकों को भगवान के आदर्शों को अपने जीवन में उतार धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धन भाग्य से मिलता है। जब धन धर्म पर लगता है, तो वह सौभाग्य में बदल जाता है। उन्होंने कहा कि ऊंचे पदों का मिलना भाग्य है और ऊंचे पद मिलने के बाद विनम्र रहना सौभाग्य है। वहीं व्यक्ति की बेवकूफियां भाग्य को दुर्भाग्य में बदल देती है। उन्होंने कहा कि विनम्रता के लिए संतों की संगति आवश्यक है।
विज्ञापन
उन्होंने एक वाक्य को भी श्रद्धालुओं के बीच में सुनाया, जिसमें उन्होंने प्रभु भक्ति को सबसे बड़ा नशा बताया। उन्होंने कहा कि शराब के नशे में व्यक्ति कुछ समय तक ही डूबा रहता है, लेकिन प्रभु नाम का नशा ऐसा है, जो बार चढ़ गया, तो जिंदगी आखिरी पलों तक मनुष्य के साथ रहता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कुछ समर्पण करना है, तो हमें अपना दिल श्याम सुंदर को दे देना चाहिए, तभी कल्याण और मंगल का रास्ता खुलेगा। इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया गया।
विज्ञापन