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महिलाएं यौन उत्पीड़न की करें शिकायत : आकांक्षा
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अज्ञानता और बदनामी के डर से आगे नहीं आतीं ज्यादातर महिलाएं
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर कार्यशाला आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन की सचिव आकांक्षा डोगरा की अध्यक्षता में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध एवं निवारण अधिनियम-2013) को लेकर सोलन में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
आकांक्षा डोगरा ने अधिनियम की पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान प्रावधानों तक विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला अधिकारी या कर्मचारी के साथ यौन शोषण की घटना होती है, तो वह विभागीय स्तर पर गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) में शिकायत कर सकती है। यदि समिति का गठन न हुआ हो, तो स्थानीय शिकायत समिति को भी शिकायत दी जा सकती है।
आकांक्षा डोगरा ने बताया कि महिलाओं की झूठी शिकायत पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी दंड का प्रावधान है। सभी समितियों को शी पोर्टल पर अपडेट होना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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पीड़ित को जल्द मिले न्याय
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है ताकि वे कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा सकें। ऐसे मामलों की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई जरूरी है ताकि पीड़ित को शीघ्र न्याय मिल सके।
अज्ञानता और बदनामी सबसे बड़ी बाधा
उन्होंने कहा कि कई मामलों में अज्ञानता और बदनामी के डर से महिलाएं शिकायत दर्ज नहीं करातीं। सामाजिक दबाव के कारण कई पीड़िताएं अपराध होने के बाद भी चुप रहती हैं। सभी महिलाओं को अपने अधिकारों और कानूनी जानकारी से सशक्त होना चाहिए।
कार्यशाला में भ्रष्टाचार विषय पर चर्चा की गई और ऑनलाइन शिकायत लोकपाल के समक्ष दर्ज करने की प्रक्रिया बताई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को नशा निवारण की शपथ भी दिलाई गई। कार्यशाला में समेकित बाल विकास परियोजना अधिकारी सोलन कविता गौतम, पुलिस विभाग, चिकित्सा, शिक्षा विभाग और अन्य विभागों की महिला कर्मचारियों ने भाग लिया।
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कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर कार्यशाला आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन की सचिव आकांक्षा डोगरा की अध्यक्षता में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध एवं निवारण अधिनियम-2013) को लेकर सोलन में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
आकांक्षा डोगरा ने अधिनियम की पृष्ठभूमि से लेकर वर्तमान प्रावधानों तक विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला अधिकारी या कर्मचारी के साथ यौन शोषण की घटना होती है, तो वह विभागीय स्तर पर गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) में शिकायत कर सकती है। यदि समिति का गठन न हुआ हो, तो स्थानीय शिकायत समिति को भी शिकायत दी जा सकती है।
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आकांक्षा डोगरा ने बताया कि महिलाओं की झूठी शिकायत पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी दंड का प्रावधान है। सभी समितियों को शी पोर्टल पर अपडेट होना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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पीड़ित को जल्द मिले न्याय
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है ताकि वे कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा सकें। ऐसे मामलों की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई जरूरी है ताकि पीड़ित को शीघ्र न्याय मिल सके।
अज्ञानता और बदनामी सबसे बड़ी बाधा
उन्होंने कहा कि कई मामलों में अज्ञानता और बदनामी के डर से महिलाएं शिकायत दर्ज नहीं करातीं। सामाजिक दबाव के कारण कई पीड़िताएं अपराध होने के बाद भी चुप रहती हैं। सभी महिलाओं को अपने अधिकारों और कानूनी जानकारी से सशक्त होना चाहिए।
कार्यशाला में भ्रष्टाचार विषय पर चर्चा की गई और ऑनलाइन शिकायत लोकपाल के समक्ष दर्ज करने की प्रक्रिया बताई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को नशा निवारण की शपथ भी दिलाई गई। कार्यशाला में समेकित बाल विकास परियोजना अधिकारी सोलन कविता गौतम, पुलिस विभाग, चिकित्सा, शिक्षा विभाग और अन्य विभागों की महिला कर्मचारियों ने भाग लिया।