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Solan News: कदौर स्कूल में अनूठी पहल छात्र उगा रहे ऑयस्टर मशरूम, मिड-डे मील में परोसा जा रहा पौष्टिक भोजन
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अभी तक तैयार की जा चुकी है 10 किलो मशरूम
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शिक्षा खंड कंडाघाट के तहत आने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कदौर में व्यावसायिक शिक्षा के तहत विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अभिनव प्रयोग से जहां एक ओर छात्र आधुनिक कृषि तकनीकों को सीख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनमें स्वरोजगार और कौशल विकास की भावना भी सुदृढ़ हो रही है।स्कूल के वोकेशनल ट्रेनर विवेक शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत कर अब तक लगभग 10 किलोग्राम ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम का सफल उत्पादन कर लिया है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि स्कूल में ही उत्पादित इस फ्रेश मशरूम का उपयोग बच्चों के मिड-डे मील (दोपहर के भोजन) में किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को प्रोटीन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर पौष्टिक भोजन थाली में मिल रहा है। गौरतलब है कि इसी वर्ष फ़रवरी में उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा कुमारी रीता गुप्ता और एमडीएम प्रभारी राजकुमार पराशार द्वारा भारती एयरटेल फाउंडेशन के सहयोग से एक शिक्षक एक्सपोज़र कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत वोकेशनल ट्रेनर विवेक शर्मा ने मशरूम अनुसंधान निदेशालय, चंबाघाट में मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक और व्यावहारिक बारीकियों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था। वहां से सीखी गई आधुनिक तकनीकों को अब वे स्कूल के छात्र-छात्राओं तक पहुंचा रहे हैं, जिससे बच्चे बेहद उत्साहित हैं और खुद अपने हाथों से मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। शिक्षा खंड कंडाघाट के तहत आने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कदौर में व्यावसायिक शिक्षा के तहत विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस अभिनव प्रयोग से जहां एक ओर छात्र आधुनिक कृषि तकनीकों को सीख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनमें स्वरोजगार और कौशल विकास की भावना भी सुदृढ़ हो रही है।स्कूल के वोकेशनल ट्रेनर विवेक शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत कर अब तक लगभग 10 किलोग्राम ऑयस्टर (ढिंगरी) मशरूम का सफल उत्पादन कर लिया है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि स्कूल में ही उत्पादित इस फ्रेश मशरूम का उपयोग बच्चों के मिड-डे मील (दोपहर के भोजन) में किया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को प्रोटीन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर पौष्टिक भोजन थाली में मिल रहा है। गौरतलब है कि इसी वर्ष फ़रवरी में उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा कुमारी रीता गुप्ता और एमडीएम प्रभारी राजकुमार पराशार द्वारा भारती एयरटेल फाउंडेशन के सहयोग से एक शिक्षक एक्सपोज़र कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत वोकेशनल ट्रेनर विवेक शर्मा ने मशरूम अनुसंधान निदेशालय, चंबाघाट में मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक और व्यावहारिक बारीकियों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था। वहां से सीखी गई आधुनिक तकनीकों को अब वे स्कूल के छात्र-छात्राओं तक पहुंचा रहे हैं, जिससे बच्चे बेहद उत्साहित हैं और खुद अपने हाथों से मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं।