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Solan News: 16वें वित्त आयोग के सदस्यों ने किया वाकनाघाट और राहों गांव का दौरा
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संवाद न्यूज एजेंसीसोलन। हिमाचल प्रवास पर आए 16वें वित्त आयोग के एक दल ने मंगलवार को सोलन जिला का दौरा किया। इस दल में आयोग के सदस्य अजय नारायण झा, डॉ. मनोज पांडा, ऐनी जॉर्ज मैथ्यू और डॉ. सौम्या कांति घोष शामिल रहे। इसके अतिरिक्त आयोग के सचिव ऋत्विक पांडे, संयुक्त सचिव राहुल जैन और संयुक्त निदेशक अम्रुता भी उनके साथ उपस्थित रहे। दल ने सबसे पहले औद्योगिक क्षेत्र वाकनाघाट स्थित बैकयार्ड गार्डन प्राइवेट लिमिटेड के फूड प्रोसेसिंग यूनिट का दौरा किया। हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में यह इकाई स्थापित की गई थी। कंपनी के मुख्य प्रमोटर शिमला से युवा उद्यमी साहिल दत्ता ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।
उन्होंने बताया कि उद्योग विभाग से 95 साल के लिए भूमि पट्टे पर ली है। संयंत्र में प्रतिदिन 2500 लीटर जूस बनाने की क्षमता है और अन्य पीपी खाद्य क्षमता 500 किलोग्राम प्रतिदिन है। इस इकाई में सभी आवश्यक घटक और ताजा फलों जैसे सेब, आम, लीची, रोडोडेंड्रोन, आंवला, चुकंदर, पपीता आदि को स्वच्छ और प्राकृतिक तरीके से संसाधित करने के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। वर्तमान में इस इकाई ने संयंत्र में 13 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया है और 10 व्यक्तियों को आसपास के राज्यों में बिक्री के लिए लगाया है।
इसके उपरांत आयोग का दल सपरून की उपजाऊ घाटी के मध्य स्थित ग्राम पंचायत डांगरी के राहों गांव में पहुंचा। इस आदर्श कृषि गांव में सात कृषक परिवार लगभग 70 बीघा भूमि पर कृषि कर रहे हैं। अनाज की पारंपरिक एकल-फसल प्रणाली अपनाकर टमाटर, फूलगोभी, मटर, सेब, कीवी आदि उगा रहे हैं।
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आयोग के सदस्य अजय नारायण झा ने किसानों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां के प्रगतिशील किसान अन्य राज्यों में भी किसानों को कृषि में विविधता के लिए प्रोत्साहित करने में आगे आएं। इस अवसर पर प्रदेश सरकार तथा जिला प्रशासन के उच्चाधिकारी, विभिन्न विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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उन्होंने बताया कि उद्योग विभाग से 95 साल के लिए भूमि पट्टे पर ली है। संयंत्र में प्रतिदिन 2500 लीटर जूस बनाने की क्षमता है और अन्य पीपी खाद्य क्षमता 500 किलोग्राम प्रतिदिन है। इस इकाई में सभी आवश्यक घटक और ताजा फलों जैसे सेब, आम, लीची, रोडोडेंड्रोन, आंवला, चुकंदर, पपीता आदि को स्वच्छ और प्राकृतिक तरीके से संसाधित करने के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। वर्तमान में इस इकाई ने संयंत्र में 13 व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया है और 10 व्यक्तियों को आसपास के राज्यों में बिक्री के लिए लगाया है।
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इसके उपरांत आयोग का दल सपरून की उपजाऊ घाटी के मध्य स्थित ग्राम पंचायत डांगरी के राहों गांव में पहुंचा। इस आदर्श कृषि गांव में सात कृषक परिवार लगभग 70 बीघा भूमि पर कृषि कर रहे हैं। अनाज की पारंपरिक एकल-फसल प्रणाली अपनाकर टमाटर, फूलगोभी, मटर, सेब, कीवी आदि उगा रहे हैं।
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आयोग के सदस्य अजय नारायण झा ने किसानों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां के प्रगतिशील किसान अन्य राज्यों में भी किसानों को कृषि में विविधता के लिए प्रोत्साहित करने में आगे आएं। इस अवसर पर प्रदेश सरकार तथा जिला प्रशासन के उच्चाधिकारी, विभिन्न विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।