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भारी बारिश से टमाटर की फसल में लगा सड़न रोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। भारी बारिश से जिले के अधिकतर क्षेत्रों में टमाटर की फसल खराब होने लगी है। आलम यह है कि टमाटर की फसल में काले दाग का रोग लग रहा है। इससे रातोंरात फसल बरबाद हो रही है। किसानों की मानें तो इस बार टमाटर बहुत कम है, उस पर इसमें लगी बीमारी से फसल तबाह हो रही है। इससे किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए चिंता सताने लगी है।
जिले में सालाना करीब 40 से 50 करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। इस साल टमाटर के उचित दाम नहीं मिलने से किसान पहले से ही परेशान हैं। रही-सही कसर सड़न रोग ने पूरी कर दी है। सड़न रोग छोटे-बड़े सभी टमाटर को अपना ग्रास बना रहा है।
एक सड़ा हुआ टमाटर दूसरे टमाटरों में संक्रमण कर रहा है। क्षेत्र के किसान भूपेंद्र, जगदीश चौहान, अंकुश, मनोज, हीरानंद, राम लाल, सीता राम, प्रकाश आदि ने बताया कि काले दाग की बीमारी करीब तीन वर्षों से ही लगना शुरू हुई है। इससे पहले ऐसी बीमारी टमाटर में नहीं पाई जाती है।
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अब यह बिमारी हर वर्ष टमाटर की फसल को खराब कर रही है। शुरूआत में टमाटर में एक छोटा काले रंग का दाग पड़ता है जो रातोंरात पूरे टमाटर को खराब कर देता है। हलांकि जब यह दाग लगना शुरू होता है, उस समय टमाटर कठोर बन जाता है। जैसे ही यह पूरी तरह से फैल जाता तो टमाटर को कमजोर कर पिलपिला कर देता है।
किसान रिडोमिल एमएजैड का करें छिड़काव
जिला कृषि अधिकारी सीमा कंसल ने बताया कि टमाटर में लगने वाले काले दाग का मुख्य कारण अधिक बारिश या खेत में पानी का खड़ा रहना होता है। इसके चलते यह रोग लग जाता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को टमाटर के खेत में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए।
टमाटर की जड़ से लेकर करीब 15 से 20 सेमी की उंचाई तक के पत्तों को काट देना चाहिए। किसान रिडोमिल एमजैड फफूंदनाशी, और इंडोफिल एम 45 प्लस सैंडोविट 40 ग्राम 15 मिली पानी के साथ समय-समय पर साफ मौसम में 7-10 दिन बाद छिड़काव करें।
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सोलन। भारी बारिश से जिले के अधिकतर क्षेत्रों में टमाटर की फसल खराब होने लगी है। आलम यह है कि टमाटर की फसल में काले दाग का रोग लग रहा है। इससे रातोंरात फसल बरबाद हो रही है। किसानों की मानें तो इस बार टमाटर बहुत कम है, उस पर इसमें लगी बीमारी से फसल तबाह हो रही है। इससे किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए चिंता सताने लगी है।
जिले में सालाना करीब 40 से 50 करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। इस साल टमाटर के उचित दाम नहीं मिलने से किसान पहले से ही परेशान हैं। रही-सही कसर सड़न रोग ने पूरी कर दी है। सड़न रोग छोटे-बड़े सभी टमाटर को अपना ग्रास बना रहा है।
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एक सड़ा हुआ टमाटर दूसरे टमाटरों में संक्रमण कर रहा है। क्षेत्र के किसान भूपेंद्र, जगदीश चौहान, अंकुश, मनोज, हीरानंद, राम लाल, सीता राम, प्रकाश आदि ने बताया कि काले दाग की बीमारी करीब तीन वर्षों से ही लगना शुरू हुई है। इससे पहले ऐसी बीमारी टमाटर में नहीं पाई जाती है।
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अब यह बिमारी हर वर्ष टमाटर की फसल को खराब कर रही है। शुरूआत में टमाटर में एक छोटा काले रंग का दाग पड़ता है जो रातोंरात पूरे टमाटर को खराब कर देता है। हलांकि जब यह दाग लगना शुरू होता है, उस समय टमाटर कठोर बन जाता है। जैसे ही यह पूरी तरह से फैल जाता तो टमाटर को कमजोर कर पिलपिला कर देता है।
किसान रिडोमिल एमएजैड का करें छिड़काव
जिला कृषि अधिकारी सीमा कंसल ने बताया कि टमाटर में लगने वाले काले दाग का मुख्य कारण अधिक बारिश या खेत में पानी का खड़ा रहना होता है। इसके चलते यह रोग लग जाता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को टमाटर के खेत में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए।
टमाटर की जड़ से लेकर करीब 15 से 20 सेमी की उंचाई तक के पत्तों को काट देना चाहिए। किसान रिडोमिल एमजैड फफूंदनाशी, और इंडोफिल एम 45 प्लस सैंडोविट 40 ग्राम 15 मिली पानी के साथ समय-समय पर साफ मौसम में 7-10 दिन बाद छिड़काव करें।