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पूर्व विधायक के निजी सहायक को नप खाते से पैसा देने का आरोप
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नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ के दो पार्षदों ने पूर्व विधायक के निजी सहायक को परिषद के खाते से प्रतिमाह 35,500 रुपये भुगतान करने का आरोप लगाया है। यह भुगतान टैक्सी बिल के एवज में पूर्व विधायक के निजी सहायक को दिया जाता था। वहीं नप अध्यक्ष ने सभी आरोपों को बुुनियाद बताया है।
नालागढ़ नगर परिषद की दो पार्षदों अलका वर्मा और वंदना बंसल ने नगर परिषद पर आरोप लगाया है कि परिषद के खाते से हर माह पूर्व विधायक के निजी सहायक के परिवार को 35,500 का मासिक भुगतान किया जा रहा है। यह भुगतान तथाकथित टैक्सी के नाम पर हो रहा है जो कि कभी किसी ने देखी ही नहीं। दोनों पार्षदों ने आरोप लगाया कि कभी भी इस टैक्सी का मुद्दा परिषद की बैठक में नहीं उठाया गया, बल्कि कई बार पार्षदों के हस्ताक्षर के बाद नप अध्यक्ष की ओर से कार्रवाई नहीं लिखी जाती थी जिसका उन्होंने कई बार विरोध किया था।
पिछले 6 महीने से ज्यादा समय हो गया जब से उन्होंने परिषद की ओर से किए जा रहे खर्चों की पुष्टि करने से मना कर दिया है। उस समय यह मामला भी काफी उछला था और भाजपा के एक पार्षद संजीव भारद्वाज ने इसके विरोध में प्रदेश भाजपा को अपना त्यागपत्र भी भेजा था, जो संगठन के कहने पर उन्होंने वापस ले लिया था। उनका भी कहना है कि पूर्व विधायक के निजी सहायक का वेतन नगर परिषद से टैक्सी बिल के नाम पर निकाला जा रहा है।
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आरोप बेबुनियाद : अध्यक्ष
उधर, नगर परिषद की अध्यक्ष रीना शर्मा ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद को आने जाने के लिए गाड़ी की जरूरत थी जिसके लिए विधिवत रूप से टेंडर मांगे गए थे और जिसका रेट सबसे कम दर पर था, उसी को टेंडर दिया गया है और उसी के अनुसार उसका भुगतान किया जा रहा है।
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नालागढ़ नगर परिषद की दो पार्षदों अलका वर्मा और वंदना बंसल ने नगर परिषद पर आरोप लगाया है कि परिषद के खाते से हर माह पूर्व विधायक के निजी सहायक के परिवार को 35,500 का मासिक भुगतान किया जा रहा है। यह भुगतान तथाकथित टैक्सी के नाम पर हो रहा है जो कि कभी किसी ने देखी ही नहीं। दोनों पार्षदों ने आरोप लगाया कि कभी भी इस टैक्सी का मुद्दा परिषद की बैठक में नहीं उठाया गया, बल्कि कई बार पार्षदों के हस्ताक्षर के बाद नप अध्यक्ष की ओर से कार्रवाई नहीं लिखी जाती थी जिसका उन्होंने कई बार विरोध किया था।
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पिछले 6 महीने से ज्यादा समय हो गया जब से उन्होंने परिषद की ओर से किए जा रहे खर्चों की पुष्टि करने से मना कर दिया है। उस समय यह मामला भी काफी उछला था और भाजपा के एक पार्षद संजीव भारद्वाज ने इसके विरोध में प्रदेश भाजपा को अपना त्यागपत्र भी भेजा था, जो संगठन के कहने पर उन्होंने वापस ले लिया था। उनका भी कहना है कि पूर्व विधायक के निजी सहायक का वेतन नगर परिषद से टैक्सी बिल के नाम पर निकाला जा रहा है।
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आरोप बेबुनियाद : अध्यक्ष
उधर, नगर परिषद की अध्यक्ष रीना शर्मा ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद को आने जाने के लिए गाड़ी की जरूरत थी जिसके लिए विधिवत रूप से टेंडर मांगे गए थे और जिसका रेट सबसे कम दर पर था, उसी को टेंडर दिया गया है और उसी के अनुसार उसका भुगतान किया जा रहा है।