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Solan News: धर्मपुर में श्रीमद्भागवत कथा में सुनाई माता सती की कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सनातन धर्म मंदिर धर्मपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आचार्य तरुण शर्मा ने कई प्रसंग सुनाए। माता सती की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार भगवान भोलेनाथ के ससुर दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया। भोलेनाथ को नीचा दिखाने के लिए उन्होंने सभी को यज्ञ का निमंत्रण दिया, मगर भोलेनाथ को नहीं बुलाया। इस पर माता सती यज्ञ में जाने की हट करने लगी। भोलेनाथ ने उन्हें मना नहीं किया। जब माता सती यज्ञ में पहुंची तो उन्होंने देखा कि वहां पर भागवान भोलेनाथ के लिए कोई आसन नहीं बिछाया था, जिस पर क्रोध में माता सती ने उसी यज्ञ के हवन कुंड में अपनी जान दे दी। जब भोलेनाथ को इसका पता चला तो वह क्रोधित हो गए। उन्होंने वीरभद्र नाम के गण को भेजा जिसने दक्ष प्रजापति का धड़ सिर से अलग कर दिया। कथा वाचक ने कहा कि यज्ञ व धार्मिक कार्य करने का मकसद दिखावा नहीं होना चाहिए। क्योंकि उससे कोई फल नहीं मिलता। उसके बाद उन्होंने बालक ध्रुव की कथा अजामिल की कथा समेत कई अन्य प्रसंग सुनाए। कथा के दौरान बीच-बीच में भजन-कीर्तन भी किया गया, जिससे श्रोता विभोर हुए। इस अवसर पर कई श्रोताओं ने कथा का रसपान किया।
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सोलन। सनातन धर्म मंदिर धर्मपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आचार्य तरुण शर्मा ने कई प्रसंग सुनाए। माता सती की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार भगवान भोलेनाथ के ससुर दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया। भोलेनाथ को नीचा दिखाने के लिए उन्होंने सभी को यज्ञ का निमंत्रण दिया, मगर भोलेनाथ को नहीं बुलाया। इस पर माता सती यज्ञ में जाने की हट करने लगी। भोलेनाथ ने उन्हें मना नहीं किया। जब माता सती यज्ञ में पहुंची तो उन्होंने देखा कि वहां पर भागवान भोलेनाथ के लिए कोई आसन नहीं बिछाया था, जिस पर क्रोध में माता सती ने उसी यज्ञ के हवन कुंड में अपनी जान दे दी। जब भोलेनाथ को इसका पता चला तो वह क्रोधित हो गए। उन्होंने वीरभद्र नाम के गण को भेजा जिसने दक्ष प्रजापति का धड़ सिर से अलग कर दिया। कथा वाचक ने कहा कि यज्ञ व धार्मिक कार्य करने का मकसद दिखावा नहीं होना चाहिए। क्योंकि उससे कोई फल नहीं मिलता। उसके बाद उन्होंने बालक ध्रुव की कथा अजामिल की कथा समेत कई अन्य प्रसंग सुनाए। कथा के दौरान बीच-बीच में भजन-कीर्तन भी किया गया, जिससे श्रोता विभोर हुए। इस अवसर पर कई श्रोताओं ने कथा का रसपान किया।