{"_id":"6a885e9fea8c5551690b312b","slug":"the-glories-of-shri-krishna-were-extolled-on-the-final-day-solan-news-c-176-1-ssml1040-176988-2026-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Solan News: अंतिम दिन किया गया श्रीकृष्ण महिमा का बखान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Solan News: अंतिम दिन किया गया श्रीकृष्ण महिमा का बखान
विज्ञापन
फनेवटी में श्री विष्णु महापुराण ज्ञान यज्ञ का समापनसंवाद न्यूज एजेंसी
चायल(सोलन)। चायल से करीब सात किलोमीटर दूर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल फनेवटी में चल रहे श्री विष्णु महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुक्रवार को कथा एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन आचार्य ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को अनेक जन्म लेने के बाद भी अंततः ठाकुर जी के चरणों में ही आना है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सदैव लोक कल्याण का संदेश दिया है। हमें गाय माता का सम्मान एवं पूजा करनी चाहिए और अपने जीवन में धार्मिक एवं संस्कारयुक्त कार्यों को अपनाना चाहिए। आचार्य ने गोवर्धन पर्वत की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा और लोक कल्याण के लिए सात दिन-रात तक गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर धारण किया था। यह प्रसंग भगवान के भक्तों के प्रति प्रेम, करुणा और संरक्षण का प्रतीक है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में सद्कर्म, भक्ति, सेवा और मानवता को अपनाएं। दूसरों की भलाई करना ही जीवन की सच्ची सार्थकता है। कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
चायल(सोलन)। चायल से करीब सात किलोमीटर दूर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल फनेवटी में चल रहे श्री विष्णु महापुराण ज्ञान यज्ञ का शुक्रवार को कथा एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन आचार्य ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को अनेक जन्म लेने के बाद भी अंततः ठाकुर जी के चरणों में ही आना है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सदैव लोक कल्याण का संदेश दिया है। हमें गाय माता का सम्मान एवं पूजा करनी चाहिए और अपने जीवन में धार्मिक एवं संस्कारयुक्त कार्यों को अपनाना चाहिए। आचार्य ने गोवर्धन पर्वत की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा और लोक कल्याण के लिए सात दिन-रात तक गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर धारण किया था। यह प्रसंग भगवान के भक्तों के प्रति प्रेम, करुणा और संरक्षण का प्रतीक है।
विज्ञापन
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में सद्कर्म, भक्ति, सेवा और मानवता को अपनाएं। दूसरों की भलाई करना ही जीवन की सच्ची सार्थकता है। कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।
विज्ञापन