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Solan News: बीपी और पाइल्स से राहत दिलाएगी ब्लैक ईयर मशरूम
Fri, 11 Sep 2026 12:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 11 Sep 2026 12:39 AM IST
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खुंब निदेशालय द्वारा ईजात की गई ब्लैक ईयर मशरूम। संवाद
खुंब निदेशालय ने हाल ही में किया है इस मशरूम को ईजाद
सूप के रूप में करते हैं ज्यादातर सेवन, नॉर्थ ईस्ट लोगों की पहली पसंद
गेहूं के भूसे पर होती है तैयार, तीन दिन का लगता है समय
पहली बार राष्ट्रीय मेले के दौरान लगाई गई इसकी प्रदर्शनी
ललित कश्यप
सोलन। स्वास्थ्य लाभ और औषधीय गुणों से भरपूर ब्लैक ईयर मशरूम अब जल्द ही आम लोगों की थाली का हिस्सा बनने जा रही है। राष्ट्रीय खुंब अनुसंधान निदेशालय द्वारा हाल ही में विकसित की गई यह खास प्रजाति पहली बार राष्ट्रीय खुंब मेले की प्रदर्शनी में लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रही। विशेषज्ञों का दावा है कि उच्च रक्तचाप (बीपी) को नियंत्रित करने और पाइल्स (बवासीर) जैसी गंभीर समस्याओं से लड़ने में यह मशरूम बेहद कारगर मानी जा रही है।
देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों नॉर्थ-ईस्ट में ब्लैक ईयर मशरूम का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से काफी समय से किया जाता रहा है। वहां के लोग इसे अपने दैनिक आहार में विशेष स्थान देते हैं। औषधीय गुणों से लबरेज होने के कारण इसका सबसे ज्यादा सेवन सूप और काढ़े के रूप में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइबर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं और बीपी को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। खुंब निदेशालय के वैज्ञानिक डॉ. परमेश ने बताया कि इस मशरूम की खेती करना किसानों के लिए भी काफी आसान और लाभदायक सौदा साबित हो सकता है। इसे उगाने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती, यह साधारण गेहूं के भूसे पर आसानी से तैयार हो जाती है। सबसे खास बात यह है कि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम लागत और कम समय में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
इनसेट
किसानों और आम जनता में दिखा भारी उत्साह
प्रदर्शनी में पहुंचे लोगों और प्रगतिशील किसानों में इस नई मशरूम प्रजाति को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। मेले में आए किसानों ने न केवल इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी ली, बल्कि इसकी खेती की तकनीक सीखने में भी रुचि दिखा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में यह मशरूम कुपोषण और गंभीर बीमारियों से बचाव में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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सूप के रूप में करते हैं ज्यादातर सेवन, नॉर्थ ईस्ट लोगों की पहली पसंद
गेहूं के भूसे पर होती है तैयार, तीन दिन का लगता है समय
पहली बार राष्ट्रीय मेले के दौरान लगाई गई इसकी प्रदर्शनी
ललित कश्यप
सोलन। स्वास्थ्य लाभ और औषधीय गुणों से भरपूर ब्लैक ईयर मशरूम अब जल्द ही आम लोगों की थाली का हिस्सा बनने जा रही है। राष्ट्रीय खुंब अनुसंधान निदेशालय द्वारा हाल ही में विकसित की गई यह खास प्रजाति पहली बार राष्ट्रीय खुंब मेले की प्रदर्शनी में लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रही। विशेषज्ञों का दावा है कि उच्च रक्तचाप (बीपी) को नियंत्रित करने और पाइल्स (बवासीर) जैसी गंभीर समस्याओं से लड़ने में यह मशरूम बेहद कारगर मानी जा रही है।
देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों नॉर्थ-ईस्ट में ब्लैक ईयर मशरूम का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से काफी समय से किया जाता रहा है। वहां के लोग इसे अपने दैनिक आहार में विशेष स्थान देते हैं। औषधीय गुणों से लबरेज होने के कारण इसका सबसे ज्यादा सेवन सूप और काढ़े के रूप में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइबर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं और बीपी को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं। खुंब निदेशालय के वैज्ञानिक डॉ. परमेश ने बताया कि इस मशरूम की खेती करना किसानों के लिए भी काफी आसान और लाभदायक सौदा साबित हो सकता है। इसे उगाने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती, यह साधारण गेहूं के भूसे पर आसानी से तैयार हो जाती है। सबसे खास बात यह है कि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम लागत और कम समय में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
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किसानों और आम जनता में दिखा भारी उत्साह
प्रदर्शनी में पहुंचे लोगों और प्रगतिशील किसानों में इस नई मशरूम प्रजाति को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। मेले में आए किसानों ने न केवल इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी ली, बल्कि इसकी खेती की तकनीक सीखने में भी रुचि दिखा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में यह मशरूम कुपोषण और गंभीर बीमारियों से बचाव में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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