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आत्म कल्याण के लिए परीक्षित चले गए थे गंगा किनारे : डॉ. नरोत्तम
Fri, 06 Sep 2024 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 06 Sep 2024 11:51 PM IST
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बौनी में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सुनाई राजा परीक्षित की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। भटौली कलां पंचायत के प्राचीन शिव मंदिर बौनी में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक डॉ. नरोत्तम दत्त शर्मा ने भगवान की अनेक दिव्य कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने राजा परीक्षित के जन्म की कथा, दिग्विजय और गौ रूपी पृथ्वी व बैल रूपी धर्म का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कर्मानुसार सुख-दुख प्रदान करते हैं। कहा कि राजा परीक्षित को श्राप मिलने के बाद आत्म कल्याण के लिए गंगा के किनारे चले जाते हैं और अपने राज्य को बड़े पुत्र जन्मेजय को सौंप देते हैं।
वेदव्यास के पुत्र भगवान शुकदेव जो महाभारत काल के मुनि थे, इन्होंने ही परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण की कथा सुनाई थी। इस अवसर पर राम दित्ता, राम सरूप, पदम ठाकुर, जगदीश ठाकुर, राकेश शर्मा, भगवान दास, सुभाष, रामपाल समेत सैकड़ों श्रद्धालू उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। भटौली कलां पंचायत के प्राचीन शिव मंदिर बौनी में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक डॉ. नरोत्तम दत्त शर्मा ने भगवान की अनेक दिव्य कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने राजा परीक्षित के जन्म की कथा, दिग्विजय और गौ रूपी पृथ्वी व बैल रूपी धर्म का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कर्मानुसार सुख-दुख प्रदान करते हैं। कहा कि राजा परीक्षित को श्राप मिलने के बाद आत्म कल्याण के लिए गंगा के किनारे चले जाते हैं और अपने राज्य को बड़े पुत्र जन्मेजय को सौंप देते हैं।
वेदव्यास के पुत्र भगवान शुकदेव जो महाभारत काल के मुनि थे, इन्होंने ही परीक्षित को श्रीमद्भागवत पुराण की कथा सुनाई थी। इस अवसर पर राम दित्ता, राम सरूप, पदम ठाकुर, जगदीश ठाकुर, राकेश शर्मा, भगवान दास, सुभाष, रामपाल समेत सैकड़ों श्रद्धालू उपस्थित रहे।
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