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Solan News: डगशाई छावनी में लावारिस पशुओं का आतंक
Tue, 15 Sep 2026 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Tue, 15 Sep 2026 12:54 AM IST
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आक्रामक कुत्तों के झुंड और बंदर सड़कों पर घूम रहे बेखौफ
संवाद न्यूज एजेंसी
कसौली(सोलन)। ऐतिहासिक डगशाई छावनी क्षेत्र इन दिनों आवारा पशुओं के बढ़ते आतंक से जूझ रहा है। सड़कों और रिहायशी इलाकों में आवारा गोवंश, आक्रामक कुत्तों के झुंड और बंदर बेखौफ घूम रहे हैं। इस समस्या से स्थानीय नागरिकों, राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी हो रही है।
यह समस्या डगशाई से लेकर कुमारहट्टी और धर्मपुर तक के मार्गों पर साफ देखी जा सकती है। डगशाई सैन्य प्रशिक्षण और कोचिंग कैंपों के लिए जाना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए सेना के जवान यहां नियमित दौड़, पैदल अभ्यास और खेल गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। तड़के और शाम के अभ्यास के दौरान आवारा कुत्तों व बंदरों के पीछे दौड़ने तथा काटने का जोखिम लगातार बना रहता है। इससे जवानों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहाड़ी और घुमावदार सड़कों पर अचानक सामने आने वाला बेसहारा गोवंश भीषण सड़क हादसों का कारण बन रहा है। आपातकालीन ब्रेक लगाने के कारण गाड़ियां अनियंत्रित हो रही हैं।
वहीं गलियों में खूंखार कुत्तों का डर बना रहता है। छतों पर बंदरों के हमले का खौफ भी है। इस कारण बच्चों और बुजुर्गों का घरों से निकलना मुश्किल हो चुका है। स्थानीय जनता ने कैंटोनमेंट बोर्ड और संबंधित प्रशासनिक विभागों से इस मुद्दे के स्थायी समाधान की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना से पहले ही कोई ठोस कदम उठाए। सड़कों पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित गोशालाओं में भेजने की बात कही गई है। कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण कराने की भी मांग है। आबादी वाले क्षेत्रों से बंदरों को पकड़कर दूर जंगलों में छोड़ने के लिए तुरंत प्रभावी अभियान शुरू किया जाना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कसौली(सोलन)। ऐतिहासिक डगशाई छावनी क्षेत्र इन दिनों आवारा पशुओं के बढ़ते आतंक से जूझ रहा है। सड़कों और रिहायशी इलाकों में आवारा गोवंश, आक्रामक कुत्तों के झुंड और बंदर बेखौफ घूम रहे हैं। इस समस्या से स्थानीय नागरिकों, राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी हो रही है।
यह समस्या डगशाई से लेकर कुमारहट्टी और धर्मपुर तक के मार्गों पर साफ देखी जा सकती है। डगशाई सैन्य प्रशिक्षण और कोचिंग कैंपों के लिए जाना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए सेना के जवान यहां नियमित दौड़, पैदल अभ्यास और खेल गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। तड़के और शाम के अभ्यास के दौरान आवारा कुत्तों व बंदरों के पीछे दौड़ने तथा काटने का जोखिम लगातार बना रहता है। इससे जवानों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहाड़ी और घुमावदार सड़कों पर अचानक सामने आने वाला बेसहारा गोवंश भीषण सड़क हादसों का कारण बन रहा है। आपातकालीन ब्रेक लगाने के कारण गाड़ियां अनियंत्रित हो रही हैं।
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वहीं गलियों में खूंखार कुत्तों का डर बना रहता है। छतों पर बंदरों के हमले का खौफ भी है। इस कारण बच्चों और बुजुर्गों का घरों से निकलना मुश्किल हो चुका है। स्थानीय जनता ने कैंटोनमेंट बोर्ड और संबंधित प्रशासनिक विभागों से इस मुद्दे के स्थायी समाधान की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना से पहले ही कोई ठोस कदम उठाए। सड़कों पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित गोशालाओं में भेजने की बात कही गई है। कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण कराने की भी मांग है। आबादी वाले क्षेत्रों से बंदरों को पकड़कर दूर जंगलों में छोड़ने के लिए तुरंत प्रभावी अभियान शुरू किया जाना चाहिए।
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