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बेहतर इमरजेंसी सेवाओं के लिए क्षेत्रीय अस्पताल का प्लान तैयार
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल में इमरजेंसी में बेहतर सेवाओं के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ने प्लान बनाया है। आपात काल में मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने 10 कमेटियों का गठन किया है। इमरजेंसी से निपटने के लिए अस्पताल में टीम पहले से ज्यादा मुस्तैद रहेगी। यहां तक कि अस्पताल प्रशासन ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी लिखित जानकारी दी है।
जानकारी के अनुसार, आपात काल में मरीज का अस्पताल में तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा। अब तक आपात काल में मात्र छह चिकित्सकों और अन्य कर्मियों की टीम होती थी। अब यह संख्या बढ़ा दी गई है।
साथ ही अन्य व्यवस्थाओं से निपटने के लिए भी अस्पताल प्रशासन ने 10 कमेटियों का गठन किया है। हर टीम की जवाबदेही भी तय की गई है। उपायुक्त कृतिका कुलहरी और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र शर्मा को पत्र भेजकर अस्पताल में गठित कमेटियों की सूचना दे दी गई है। आपात समय में अकसर अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा जाती हैं जिसमें सुधार की उम्मीद है।
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क्षेत्रीय अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है। किसी भी दुर्घटना के बाद व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने के बाद क्षेत्रीय अस्पताल में हालत को देखते हुए रेफर किया जाता है। बीते वर्ष 23 अगस्त को कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर बस हादसा हुआ था। इस हादसे के घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद सोलन रेफर किया गया था। इस दौरान पीड़ितों को एक घंटे तक एक्सरे के लिए इंतजार करना पड़ा था। अब ऐसा नहीं होगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने खाका तैयार कर लिया है।
उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल वर्मा ने कहा कि अस्पताल में किसी भी आपात समय से निपटने के लिए तैयारियां पूरी कर दी हैं। सभी की जवाबदेही भी तय की गई है। कोताही नहीं बरती जाएगी। 10 टीमें बनाई गई हैं।
कभी भी हो सकती है जांच
आपदा से निपटने के लिए अस्पताल की तैयारियों पर कभी भी जांच की जा सकती है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन समेत स्टॉफ कर्मियों को अलर्ट रहने के लिए कहा है ताकि इसके इंतजामों के बारे में पता लगाया जा सके।
मोबाइल बंद रखा तो होगी कार्रवाई
आदेशों के अनुसार आपदा के समय स्टाफ को टेलीफोन, एसएमएस, व्हाट्सएप से अलर्ट दिया जाएगा। इस दौरान अगर किसी का मोबाइल बंद होता है तो उन पर कार्रवाई भी की जाएगी।
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सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल में इमरजेंसी में बेहतर सेवाओं के लिए क्षेत्रीय अस्पताल ने प्लान बनाया है। आपात काल में मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने 10 कमेटियों का गठन किया है। इमरजेंसी से निपटने के लिए अस्पताल में टीम पहले से ज्यादा मुस्तैद रहेगी। यहां तक कि अस्पताल प्रशासन ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी लिखित जानकारी दी है।
जानकारी के अनुसार, आपात काल में मरीज का अस्पताल में तुरंत इलाज शुरू हो जाएगा। अब तक आपात काल में मात्र छह चिकित्सकों और अन्य कर्मियों की टीम होती थी। अब यह संख्या बढ़ा दी गई है।
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साथ ही अन्य व्यवस्थाओं से निपटने के लिए भी अस्पताल प्रशासन ने 10 कमेटियों का गठन किया है। हर टीम की जवाबदेही भी तय की गई है। उपायुक्त कृतिका कुलहरी और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र शर्मा को पत्र भेजकर अस्पताल में गठित कमेटियों की सूचना दे दी गई है। आपात समय में अकसर अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा जाती हैं जिसमें सुधार की उम्मीद है।
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क्षेत्रीय अस्पताल जिले का सबसे बड़ा अस्पताल है। किसी भी दुर्घटना के बाद व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने के बाद क्षेत्रीय अस्पताल में हालत को देखते हुए रेफर किया जाता है। बीते वर्ष 23 अगस्त को कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर बस हादसा हुआ था। इस हादसे के घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद सोलन रेफर किया गया था। इस दौरान पीड़ितों को एक घंटे तक एक्सरे के लिए इंतजार करना पड़ा था। अब ऐसा नहीं होगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने खाका तैयार कर लिया है।
उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल वर्मा ने कहा कि अस्पताल में किसी भी आपात समय से निपटने के लिए तैयारियां पूरी कर दी हैं। सभी की जवाबदेही भी तय की गई है। कोताही नहीं बरती जाएगी। 10 टीमें बनाई गई हैं।
कभी भी हो सकती है जांच
आपदा से निपटने के लिए अस्पताल की तैयारियों पर कभी भी जांच की जा सकती है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन समेत स्टॉफ कर्मियों को अलर्ट रहने के लिए कहा है ताकि इसके इंतजामों के बारे में पता लगाया जा सके।
मोबाइल बंद रखा तो होगी कार्रवाई
आदेशों के अनुसार आपदा के समय स्टाफ को टेलीफोन, एसएमएस, व्हाट्सएप से अलर्ट दिया जाएगा। इस दौरान अगर किसी का मोबाइल बंद होता है तो उन पर कार्रवाई भी की जाएगी।