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कचरा संचालन पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार : ग्रामीण
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माजरा में शिवालिक वेस्ट मैनेजमेंट के खिलाफ धरना जारी
नालागढ़ बस स्टैंड से रविदास मंदिर तक निकाली रैली, कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
दूषित पानी की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। माजरा में शिवालिक मैनेजमेंट कंपनी के संचालन को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन करीब 100 दिनों से जारी है। ग्रामीणों ने एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर कंपनी के संचालन और इसके पर्यावरणीय प्रभावों पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन के बावजूद अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल जनवरी 2027 को लेकर है। उनका दावा है कि शिवालिक मैनेजमेंट की 20 वर्ष की संचालन अवधि जनवरी 2027 में पूरी हो रही है। ऐसे में अवधि समाप्त होने के बाद माजरा में नए कचरे को लाने, उसके प्रसंस्करण और निस्तारण की अनुमति किस आधार पर दी जाएगी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जनवरी 2027 के बाद केवल पुराने लैंडफिल की देखरेख होनी है तो नए कचरे के संचालन और निस्तारण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने जनवरी 2027 की समयसीमा से पहले सरकार से स्पष्ट नीति और निर्णय सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप की भी अपील की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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माजरा गांव की महिलाओं सहित ग्रामीणों ने पंचायत प्रधान गुरदयाल, पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा, देवभूमि के अध्यक्ष रूमित ठाकुर और पूर्व विधायक केएल ठाकुर के नेतृत्व में रैली निकाली। लोग नालागढ़ बस स्टैंड पर एकत्र हुए और जुलूस की शक्ल में रविदास मंदिर परिसर पहुंचे। यहां से एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा गया।
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नालागढ़ बस स्टैंड से रविदास मंदिर तक निकाली रैली, कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
दूषित पानी की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। माजरा में शिवालिक मैनेजमेंट कंपनी के संचालन को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन करीब 100 दिनों से जारी है। ग्रामीणों ने एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर कंपनी के संचालन और इसके पर्यावरणीय प्रभावों पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन के बावजूद अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल जनवरी 2027 को लेकर है। उनका दावा है कि शिवालिक मैनेजमेंट की 20 वर्ष की संचालन अवधि जनवरी 2027 में पूरी हो रही है। ऐसे में अवधि समाप्त होने के बाद माजरा में नए कचरे को लाने, उसके प्रसंस्करण और निस्तारण की अनुमति किस आधार पर दी जाएगी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जनवरी 2027 के बाद केवल पुराने लैंडफिल की देखरेख होनी है तो नए कचरे के संचालन और निस्तारण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
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ज्ञापन में ग्रामीणों ने जनवरी 2027 की समयसीमा से पहले सरकार से स्पष्ट नीति और निर्णय सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप की भी अपील की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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माजरा गांव की महिलाओं सहित ग्रामीणों ने पंचायत प्रधान गुरदयाल, पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा, देवभूमि के अध्यक्ष रूमित ठाकुर और पूर्व विधायक केएल ठाकुर के नेतृत्व में रैली निकाली। लोग नालागढ़ बस स्टैंड पर एकत्र हुए और जुलूस की शक्ल में रविदास मंदिर परिसर पहुंचे। यहां से एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा गया।