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बीस साल में सोलन शहर ने उगला 35 हजार टन कचरा

Fri, 07 Jan 2022 11:03 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jan 2022 11:03 PM IST
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Solan city spewed 35 thousand tons of garbage in twenty years
सोलन नगर निगम की सलोगड़ा डंपिग साइट में कई सालों से पड़े कचरे का बना पहाड़। संवाद - फोटो : SOLAN
सोलन। नगर परिषद से निगम बने सोलन शहर ने पिछले 20 वर्षों में करीब 35 हजार टन कचरा उगला है। कूड़े का यह ढेर करीब बीस साल पुराना है, जो 2001 से डंप किया गया है। कचरे के इस पहाड़ को ठिकाने लगाना अब नगर निगम के गले की फांस बन गया है। बहरहाल, निगम ने निजी कंपनी से करार कर इस कचरे को ठिकाने लगाने की कवायद शुरू कर दी है।
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नगर निगम की सलोगड़ा स्थित कूड़ा डंपिग साइट पर दबे हजारों टन कचरे को निकालने का काम शुरू कर दिया गया है। 10 दिन के भीतर साइट पर निजी कंपनी के कर्मचारियों ने अभी तक 300 टन कचरा बाहर निकाल दिया है। अभी तक नगर निगम ने कूड़ा साइट से 500 टन कचरा पंचकूला के लिए भेज दिया है।
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गौर हो कि नगर निगम की ओर से कूड़े को लेकर पंचकूला की निजी सनटेन लाइफ कंपनी से करार किया गया है। सोमवार से बारिश रहने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। कंपनी की ओर से पुराने कचरे पर एक टन के हिसाब से 837 रुपये लिए जा रहे हैं। वहीं, गीले कचरे का कंपनी 1962 रुपये प्रति टन वसूल कर रही है। नगर निगम कूड़ा संयंत्र से हजारों टन के हिसाब से निकलने वाले कचरे की बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा रही है। सलोगड़ा में बनी डंपिंग साइट पर गूगल अर्थ के सर्वे में 25 से 35 हजार कचरा दबे होने की संभावना जताई गई है।
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उधर, सनटेन लाइफ कंपनी के एमडी शौर्य गल्होत्रा ने कहा कि गीले कूड़े से बायोमैथेनेशन प्लांट मेें बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा रही है। इंदौर के बाद सोलन नगर निगम इस तकनीक को इस्तेमाल कर रहा है। डंपिंग साइट पर गूगल अर्थ के सर्वे में 25 से 35 हजार टन कचरा दबे होने की संभावना जताई गई है। बीते दस दिन में 300 टन कचरा बाहर निकाला गया है। नगर निगम कूड़ा साइट से 500 टन कचरा पंचकूला के लिए भेज दिया है। पुराने कचरे पर एक टन के हिसाब से 837 रुपये जबकि गीले कचरे पर 1962 रुपये लिए जा रहे हैं।

वहीं, नगर निगम आयुक्त एलआर वर्मा ने कहा कि सलोगड़ा डंपिंग साइट से कचरा पंचकूला भेजना शुरू कर दिया गया है। निजी कंपनी को इसका कार्यभार सौंपा गया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में उभरने के लिए नगर निगम इस तकनीक को इस्तेमाल कर रही है। संवाद
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