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Solan News: तंबाकू मुक्ति के लिए स्कूल करेंगे स्व-मूल्यांकन
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90 से अधिक स्कोर लेने वाला स्कूल तंबाकू मुक्त होगा घोषित
स्कूल में गठित हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर की टीम करेगी काम
जिलास्तर की टीम स्व-मूल्यांकन के स्कोर कार्ड का करेगी सत्यापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बच्चों में बढ़ती नशे की लत को देखते हुए प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग ने भी कमर कस ली है। इसके लिए स्कूलों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
स्कूल तंबाकू पर नियंत्रण के लिए नौ बिंदुओं पर काम करेंगे और स्व-मूल्यांकन करके खुद स्कोर कार्ड बनाएंगे। इसके लिए स्कूल में तीन सदस्यों की कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी का मुखिया हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर होगा। साथ में दो अन्य शिक्षकों को जोड़ा गया है। इस अभियान के तहत 90 या इससे अधिक अंक लेने वाले स्कूलों को तंबाकू मुक्त घोषित करने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बैनर को स्कूल में प्रदर्शित करना होगा। इससे पहले यह अभियान सर्दी में छुट्टियों वाले स्कूलों में चल रहा था। वहीं अब इसे गर्मी में छुट्टियों वाले स्कूलों में शुरू कर दिया है।
स्कूलों के 100 गज के दायरे में किसी भी तरह के तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं करने का नियम है। इस कानून के बाद भी जगह-जगह इसका उल्लंघन दिखाई देता है। इसे देखते हुए ही प्रदेश के समस्त शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान घोषित करने के निर्देश दिए हैं। सभी माध्यमिक और बेसिक शिक्षण संस्थानों को नौ बिंदुओं पर खुद को वेटेज प्वाइंट के आधार पर नंबर देना होगा। अगर संस्थान के आसपास गुटखा और तंबाकू की दुकानें हैं तो उनसे तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ या नोडल अधिकारी से शिकायत की भी अपेक्षा की गई है।
स्कूलों को शैक्षणिक संस्थान परिसर के अंदर सभी प्रमुख स्थानों पर तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान एवं धूम्रपान रहित क्षेत्र के बोर्ड भी लगाने होंगे। बच्चों को जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थान परिसरों में तंबाकू के हानिकारक प्रभावों से संबंधित पोस्टर व जागरूकता सामग्री भी लगानी होगी। इन प्रावधानों को लागू करने के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य छह-छह माह बाद स्व-मूल्यांकन करेंगे और प्राप्त अंकों का हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र शिक्षाधिकारी के कार्यालय में जमा करेंगे।
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उप जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा जिला सोलन राजकुमार पराशर ने बताया कि सभी स्कूलों को स्व-मूल्यांकन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्कूलों के मूल्यांकन के बाद जिला स्तर की शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की टीम संबंधित स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। इसमें स्कूलों द्वारा दिए स्कोर कार्ड का सत्यापन भी किया जाएगा। सभी स्कूलों को इस योजना के तहत कार्य करना जरूरी होगा।
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स्कूल में गठित हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर की टीम करेगी काम
जिलास्तर की टीम स्व-मूल्यांकन के स्कोर कार्ड का करेगी सत्यापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बच्चों में बढ़ती नशे की लत को देखते हुए प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग ने भी कमर कस ली है। इसके लिए स्कूलों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
स्कूल तंबाकू पर नियंत्रण के लिए नौ बिंदुओं पर काम करेंगे और स्व-मूल्यांकन करके खुद स्कोर कार्ड बनाएंगे। इसके लिए स्कूल में तीन सदस्यों की कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी का मुखिया हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर होगा। साथ में दो अन्य शिक्षकों को जोड़ा गया है। इस अभियान के तहत 90 या इससे अधिक अंक लेने वाले स्कूलों को तंबाकू मुक्त घोषित करने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बैनर को स्कूल में प्रदर्शित करना होगा। इससे पहले यह अभियान सर्दी में छुट्टियों वाले स्कूलों में चल रहा था। वहीं अब इसे गर्मी में छुट्टियों वाले स्कूलों में शुरू कर दिया है।
स्कूलों के 100 गज के दायरे में किसी भी तरह के तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं करने का नियम है। इस कानून के बाद भी जगह-जगह इसका उल्लंघन दिखाई देता है। इसे देखते हुए ही प्रदेश के समस्त शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान घोषित करने के निर्देश दिए हैं। सभी माध्यमिक और बेसिक शिक्षण संस्थानों को नौ बिंदुओं पर खुद को वेटेज प्वाइंट के आधार पर नंबर देना होगा। अगर संस्थान के आसपास गुटखा और तंबाकू की दुकानें हैं तो उनसे तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ या नोडल अधिकारी से शिकायत की भी अपेक्षा की गई है।
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स्कूलों को शैक्षणिक संस्थान परिसर के अंदर सभी प्रमुख स्थानों पर तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान एवं धूम्रपान रहित क्षेत्र के बोर्ड भी लगाने होंगे। बच्चों को जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थान परिसरों में तंबाकू के हानिकारक प्रभावों से संबंधित पोस्टर व जागरूकता सामग्री भी लगानी होगी। इन प्रावधानों को लागू करने के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य छह-छह माह बाद स्व-मूल्यांकन करेंगे और प्राप्त अंकों का हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र शिक्षाधिकारी के कार्यालय में जमा करेंगे।
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उप जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा जिला सोलन राजकुमार पराशर ने बताया कि सभी स्कूलों को स्व-मूल्यांकन करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्कूलों के मूल्यांकन के बाद जिला स्तर की शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की टीम संबंधित स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी। इसमें स्कूलों द्वारा दिए स्कोर कार्ड का सत्यापन भी किया जाएगा। सभी स्कूलों को इस योजना के तहत कार्य करना जरूरी होगा।