{"_id":"6344607fff6ac62b07023f0d","slug":"patients-waits-for-treatment-sitting-on-floor-due-to-pen-down-strike-of-doctors-in-solan-solan-news-sml4245233124","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिकित्सक हड़ताल पर, मरीजों ने दो घंटे फर्श पर बैठकर किया इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिकित्सक हड़ताल पर, मरीजों ने दो घंटे फर्श पर बैठकर किया इंतजार
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। अस्पतालों में चिकित्सकों की हड़ताल के चलते मरीजों को दो घंटे तक मरीजों को फर्श पर बैठ कर इंतजार करना पड़ा है। हालात ऐसे थे कि जिला भर के अस्पतालों में ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं।
अस्पतालों में बैठने के लिए लगाए बेंच भी भर गए। 11:30 बजे तक मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। पेन डाउन हड़ताल के खत्म होने के बाद ही मरीजों को उपचार मिला लेकिन तब तक भीड़ इतनी हो चुकी थी कि बारी आने में भी घंटों लग गए। सबसे ज्यादा परेशानी दूरदराज से आए मरीजों को हुई। उन्हें शाम तक इलाज और टेस्ट करवाने में लग गए। शाम को घर पहुंचने में देरी हो गई।
क्षेत्रीय अस्पताल में दूरदराज से आने वाले मरीजों को काफी देर तक काफी समस्या झेलनी पड़ी। मरीजों ने आपातकालीन कक्ष में बैठे चिकित्सक से ही परामर्श लेना उचित समझा। इस कारण आपातकालीन कक्ष के बाहर भी काफी भीड़ रही।
विज्ञापन
जैसे ही 11:30 बजे चिकित्सकों ने ओपीडी संभाली, वैसे ही कई एक साथ मरीज ओपीडी के अंदर आ गए। इसके बाद होमगार्डों ने मशक्कत से उन्हें बाहर भेजा और एक-एक कर ओपीडी में बुलाया।
सोमवार को मेडिसन, आई, चाइल्ड, गायनी, स्किन और ऑर्थो ओपीडी के बाहर अधिक कतारें लगी रही और लोगों को ओपीडी शुरू होने के बाद भी कई घंटों तक कतारें लगी रही। वहीं एक छुट्टी के बाद खुले अस्पतालों में मरीज काफी परेशान हुए। अस्पतालों में अधिक भीड़ को देखते कई मरीजों ने निजी क्लीनिकों का सहारा भी लिया।
72 चिकित्सक छह सूत्रीय मांगों को लेकर चिकित्सक पेन डाउन स्ट्राइक करने पर मजबूर हुए हैं। इसके चलते शनिवार से चिकित्सक पेन डाउन स्ट्राइक कर रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य निदेशक की सेवानिवृत्ति के बाद पद को अब तक नहीं भरा गया है। इससे कार्य में काफी दिक्कतें आ रही है। इसी के संघ चिकित्सक के सेवा विस्तार करने का विरोध में रहा है।
संघ का कहना है कि प्रदेश में पहले से ही अधिकांश बेरोजगार युवा चिकित्सक मौजूद हैं। किसी भी चिकित्सक को सेवा विस्तार देना युवा चिकित्सकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा और जिन चिकित्सा अधिकारियों को सेवा विस्तार दिया गया है उन्हें शीघ्र ही सेवानिवृत्त किया जाए।
वहीं अनुबंध पर चयनित चिकित्सकों का ग्रेड पे का 150 फीसदी मानदेय देने और नए वेतन आयोग में चिकित्सकों का 4-9-14 का टाइम स्केल बहाल करने की मांग की है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की प्रोत्साहन में वृद्धि और मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं दे रहे फैकेल्टी मेंबर्स को भी एकेडमिक एलाउंस देने की मांग है। यदि सरकार मांग को पूरा कर लेती है तो वे इस स्ट्राइक को वापस लेंगे। यह स्ट्राइक रविवार को भी जारी रहेगी। उधर, चिकित्सा संघ सोलन के प्रधान डॉ. कमल कुमार ने कहा कि छह सूत्रीय मांगों को लेकर जिला भर से 72 चिकित्सक स्ट्राइक कर है। यदि सरकार मांग पूरी करती है तो स्ट्राइक को वापस लिया जाएगा।
सुबह से ही आए अस्पताल
सुबह से अस्पताल में आए हुए हैं। लेकिन अस्पताल में आकर पता चला कि स्ट्राइक है और 11:30 बजे के बाद मरीजों को उपचार दिया गया है। एक साथ सभी चिकित्सकों को स्ट्राइक पर नहीं जाना चाहिए।
-तारा, ओच्छघाट
मरीज के बारे में भी नहीं सोचते
कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर स्ट्राइक पर रहते है। लेकिन जनता के बारे में कोई सोचता नहीं है। मरीज के पहले ही बीमारी के कारण हालात काफी खराब होते है। पर इसकी किसी कोई सूध नहीं लेता है। अगर चिकित्सकों को स्ट्राइक करनी है तो कोई अलग से प्रबंध भी करने चाहिए।
-सुमन, शामती
कामकाज छोडकर समय से उपचार मिलने को लेकर अस्पताल पहुंची। लेकिन अस्पताल में आधा घंटा पर्ची बनाने के लिए लग गए। इसके बाद दो घंटे तक चिकित्स के इंतजार में बैठना पड़ा और करीब 12:00 बजे के बाद स्वास्थ्य सुविधा मिली।
सुनीता, चायल
बच्चों के साथ खड़ा होना मुश्किल
10 बजे से अस्पताल में खड़े हुए हैं। बच्चा काफी बीमार है और बच्चों के साथ कतारों में खड़ा होना काफी मुश्किल है। लेकिन चिकित्सकों की दो घंटे की स्ट्राइक से परेशान हो गए हैं। भीड़ अधिक होने से बैठने की जगह भी नहीं हैं।
-कमला, नारग
जिला भर में टीम रही तैनात
मुख्य चिकित्सक अधिकारी डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि जिला भर में चिकित्सकों की दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक से किसी भी तरह की मरीजों को परेशानी नहीं आने दी है। मरीजों का उपचार आपातस्थिति में किया गया है। साथ ही अतिरिक्त टीमों को तैनात किया गया है। वहीं, चिकित्सा अधीक्षक सोलन डॉ. एसएल वर्मा ने बताया कि पेन डाउन स्ट्राइक को लेकर आपात स्थिति में मरीजों को सुविधा मिलती दी गई है। अस्पताल में व्यवस्था को बनाया गया था।
विज्ञापन
सोलन। अस्पतालों में चिकित्सकों की हड़ताल के चलते मरीजों को दो घंटे तक मरीजों को फर्श पर बैठ कर इंतजार करना पड़ा है। हालात ऐसे थे कि जिला भर के अस्पतालों में ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं।
अस्पतालों में बैठने के लिए लगाए बेंच भी भर गए। 11:30 बजे तक मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। पेन डाउन हड़ताल के खत्म होने के बाद ही मरीजों को उपचार मिला लेकिन तब तक भीड़ इतनी हो चुकी थी कि बारी आने में भी घंटों लग गए। सबसे ज्यादा परेशानी दूरदराज से आए मरीजों को हुई। उन्हें शाम तक इलाज और टेस्ट करवाने में लग गए। शाम को घर पहुंचने में देरी हो गई।
विज्ञापन
क्षेत्रीय अस्पताल में दूरदराज से आने वाले मरीजों को काफी देर तक काफी समस्या झेलनी पड़ी। मरीजों ने आपातकालीन कक्ष में बैठे चिकित्सक से ही परामर्श लेना उचित समझा। इस कारण आपातकालीन कक्ष के बाहर भी काफी भीड़ रही।
विज्ञापन
जैसे ही 11:30 बजे चिकित्सकों ने ओपीडी संभाली, वैसे ही कई एक साथ मरीज ओपीडी के अंदर आ गए। इसके बाद होमगार्डों ने मशक्कत से उन्हें बाहर भेजा और एक-एक कर ओपीडी में बुलाया।
सोमवार को मेडिसन, आई, चाइल्ड, गायनी, स्किन और ऑर्थो ओपीडी के बाहर अधिक कतारें लगी रही और लोगों को ओपीडी शुरू होने के बाद भी कई घंटों तक कतारें लगी रही। वहीं एक छुट्टी के बाद खुले अस्पतालों में मरीज काफी परेशान हुए। अस्पतालों में अधिक भीड़ को देखते कई मरीजों ने निजी क्लीनिकों का सहारा भी लिया।
72 चिकित्सक छह सूत्रीय मांगों को लेकर चिकित्सक पेन डाउन स्ट्राइक करने पर मजबूर हुए हैं। इसके चलते शनिवार से चिकित्सक पेन डाउन स्ट्राइक कर रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य निदेशक की सेवानिवृत्ति के बाद पद को अब तक नहीं भरा गया है। इससे कार्य में काफी दिक्कतें आ रही है। इसी के संघ चिकित्सक के सेवा विस्तार करने का विरोध में रहा है।
संघ का कहना है कि प्रदेश में पहले से ही अधिकांश बेरोजगार युवा चिकित्सक मौजूद हैं। किसी भी चिकित्सक को सेवा विस्तार देना युवा चिकित्सकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा और जिन चिकित्सा अधिकारियों को सेवा विस्तार दिया गया है उन्हें शीघ्र ही सेवानिवृत्त किया जाए।
वहीं अनुबंध पर चयनित चिकित्सकों का ग्रेड पे का 150 फीसदी मानदेय देने और नए वेतन आयोग में चिकित्सकों का 4-9-14 का टाइम स्केल बहाल करने की मांग की है। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की प्रोत्साहन में वृद्धि और मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं दे रहे फैकेल्टी मेंबर्स को भी एकेडमिक एलाउंस देने की मांग है। यदि सरकार मांग को पूरा कर लेती है तो वे इस स्ट्राइक को वापस लेंगे। यह स्ट्राइक रविवार को भी जारी रहेगी। उधर, चिकित्सा संघ सोलन के प्रधान डॉ. कमल कुमार ने कहा कि छह सूत्रीय मांगों को लेकर जिला भर से 72 चिकित्सक स्ट्राइक कर है। यदि सरकार मांग पूरी करती है तो स्ट्राइक को वापस लिया जाएगा।
सुबह से ही आए अस्पताल
सुबह से अस्पताल में आए हुए हैं। लेकिन अस्पताल में आकर पता चला कि स्ट्राइक है और 11:30 बजे के बाद मरीजों को उपचार दिया गया है। एक साथ सभी चिकित्सकों को स्ट्राइक पर नहीं जाना चाहिए।
-तारा, ओच्छघाट
मरीज के बारे में भी नहीं सोचते
कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर स्ट्राइक पर रहते है। लेकिन जनता के बारे में कोई सोचता नहीं है। मरीज के पहले ही बीमारी के कारण हालात काफी खराब होते है। पर इसकी किसी कोई सूध नहीं लेता है। अगर चिकित्सकों को स्ट्राइक करनी है तो कोई अलग से प्रबंध भी करने चाहिए।
-सुमन, शामती
कामकाज छोडकर समय से उपचार मिलने को लेकर अस्पताल पहुंची। लेकिन अस्पताल में आधा घंटा पर्ची बनाने के लिए लग गए। इसके बाद दो घंटे तक चिकित्स के इंतजार में बैठना पड़ा और करीब 12:00 बजे के बाद स्वास्थ्य सुविधा मिली।
सुनीता, चायल
बच्चों के साथ खड़ा होना मुश्किल
10 बजे से अस्पताल में खड़े हुए हैं। बच्चा काफी बीमार है और बच्चों के साथ कतारों में खड़ा होना काफी मुश्किल है। लेकिन चिकित्सकों की दो घंटे की स्ट्राइक से परेशान हो गए हैं। भीड़ अधिक होने से बैठने की जगह भी नहीं हैं।
-कमला, नारग
जिला भर में टीम रही तैनात
मुख्य चिकित्सक अधिकारी डॉ. राजन उप्पल ने बताया कि जिला भर में चिकित्सकों की दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक से किसी भी तरह की मरीजों को परेशानी नहीं आने दी है। मरीजों का उपचार आपातस्थिति में किया गया है। साथ ही अतिरिक्त टीमों को तैनात किया गया है। वहीं, चिकित्सा अधीक्षक सोलन डॉ. एसएल वर्मा ने बताया कि पेन डाउन स्ट्राइक को लेकर आपात स्थिति में मरीजों को सुविधा मिलती दी गई है। अस्पताल में व्यवस्था को बनाया गया था।