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कोरोना खौफ के बीच बहुत कम अभिभावक भेज रहे बच्चों को स्कूल
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सोलन। कोविड-19 के बीच अध्यापकों, अन्य स्टाफ और विद्यार्थियों के लिए प्रदेश में स्कूलों को सौ फीसदी खोल दिया गया है। हालांकि, कोरोना के खतरे को देखते हुए बहुत कम अभिभावक विद्यार्थियों को स्कूल भेज रहे हैं। सोमवार को भी नौवीं से जमा दो के करीब 25 हजार विद्यार्थियों में से 5,570 ही अभिभावकों की सहमति के बाद स्कूल पहुंचे हैं।
सबसे अधिक स्कूल आने वाले मेडिकल के विद्यार्थी शामिल हैं जबकि अन्य विद्यार्थी अभी भी घर से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूलों में कोविड नियमों का पूरा पालन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार सोलन के सभी सरकारी स्कूलों में अध्यापकों सहित अन्य स्टाफ रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं। इसमें अध्यापकों की रोजाना उपस्थिति भी लग रही है लेकिन बहुत कम अभिभावक बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। हालांकि, बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अध्यापक अभिभावकों से किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों की सहमति के बाद ही बच्चे स्कूल आ सकते हैं।
उधर, शिक्षा उपनिदेशक उच्च जिला सोलन योगेंद्र मखैक ने बताया कि 100 फीसदी स्टाफ के साथ रोजाना स्कूल लग रहे हैं। कोविड नियमानुसार स्कूल अध्यापकों की समयसारिणी तैयार की गई है। विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों की शंकाओं को अध्यापक दूर कर रहे हैं लेकिन उन्हें अभिभावकों से सहमति पत्र साथ लाना होगा। व्यवस्था देखने के लिए हर स्कूल में कमेटी भी बनाई गई है।
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सबसे अधिक स्कूल आने वाले मेडिकल के विद्यार्थी शामिल हैं जबकि अन्य विद्यार्थी अभी भी घर से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूलों में कोविड नियमों का पूरा पालन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार सोलन के सभी सरकारी स्कूलों में अध्यापकों सहित अन्य स्टाफ रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं। इसमें अध्यापकों की रोजाना उपस्थिति भी लग रही है लेकिन बहुत कम अभिभावक बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। हालांकि, बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अध्यापक अभिभावकों से किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों की सहमति के बाद ही बच्चे स्कूल आ सकते हैं।
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उधर, शिक्षा उपनिदेशक उच्च जिला सोलन योगेंद्र मखैक ने बताया कि 100 फीसदी स्टाफ के साथ रोजाना स्कूल लग रहे हैं। कोविड नियमानुसार स्कूल अध्यापकों की समयसारिणी तैयार की गई है। विभिन्न विषयों पर विद्यार्थियों की शंकाओं को अध्यापक दूर कर रहे हैं लेकिन उन्हें अभिभावकों से सहमति पत्र साथ लाना होगा। व्यवस्था देखने के लिए हर स्कूल में कमेटी भी बनाई गई है।
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