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इंजेक्शन से नहीं दवाइयों से होगा बिगड़े टीबी का इलाज
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सोलन। अब बिगड़े टीबी (एमडीआर टीबी) का इलाज इंजेक्शन से नहीं बल्कि ऑल लोंगर रिजिम विधि से किया जाएगा। डेलामिंड और बिडाक्वीन दवा से यह संभव हो गया है। इसमें बिगड़े टीबी के रोगियों को 20 से 24 माह तक इंजेक्शन नहीं लगाने पडे़ंगे।
इसके इलाज की अवधि में भी कमी आई है। अब 6 से 12 माह में रोगियों की स्थिति के आधार पर उन्हें संबंधित दवाइयां दी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए एक कमेटी का गठन किया है। इसमें मेडिसन, आंख, नाक-कान, हड्डी, सर्जन सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर ही शामिल किए गए हैं जो रोगियों की स्थिति के आधार पर उनका इलाज करने के लिए कुछ दवाइयों को कम करने या फिर बढ़ाने की भी राय देंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2019 के तहत अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसमें पहले संबंधित रोगियों का इलाज लंबे समय तक 20 से 24 माह का होता था लेकिन अब इसमें भी कमी आई है। इसमें यह तीन प्रकार की अवधि में इलाज रोगियों की स्थिति के आधार पर 6 से 9, 12 और 18 से 20 माह तक का ही होगा।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी होगा इलाज
पहले बिगड़ी टीबी का इलाज सिर्फ जिला स्तर के अस्पतालों में किया जाता था। इसमें रोगियों को इंजेक्शन सहित अन्य दवाइयों दी जाती थीं। संबंधित इलाज के लिए रोगियों को बड़े अस्पतालों में ही आना पड़ता था लेकिन अब ये रोगी अपने क्षेत्र की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी अपना इलाज करवा सकते हैं। इसमें रोगियों को जिला अस्पताल से स्वास्थ्य केंद्रों पर उनके लिए दवाइयां दी जा रही हैं। दवाइयों को उनके परिवार का कोई भी सदस्य मुहैया करवा सकता है।
दवा से इलाज के लिए प्रदेश में अधिसूचना की है जारी
जिला कार्यक्रम अधिकारी और टीबी मेडिसन विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने बताया कि बढ़ रहे बिगड़ी टीबी (एमडीआर टीबी) के मरीजों की तुरंत पहचान और उपचार टीबी उन्मूलन का स्तंभ है। जिले में अभी तक 68 के करीब बिगड़ी टीबी के मरीज हैं। ये सभी सरकारी प्रणाली के तहत उपचाराधीन है। प्रदेश में नई टीबी की दवाइयां जैसे डेलामिंड और बिडाक्वीन भी उपचार के लिए दी जा रही है। बिगड़ी हुई टीबी का इलाज 6 माह से 12 माह के कोर्स से संभव है। हालांकि कुछ मरीजों में अभी भी 18 से 20 माह की दवा दी जाती है जिसमें दवा से ही इलाज किया जाएगा।
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इसके इलाज की अवधि में भी कमी आई है। अब 6 से 12 माह में रोगियों की स्थिति के आधार पर उन्हें संबंधित दवाइयां दी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए एक कमेटी का गठन किया है। इसमें मेडिसन, आंख, नाक-कान, हड्डी, सर्जन सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर ही शामिल किए गए हैं जो रोगियों की स्थिति के आधार पर उनका इलाज करने के लिए कुछ दवाइयों को कम करने या फिर बढ़ाने की भी राय देंगे।
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स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2019 के तहत अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसमें पहले संबंधित रोगियों का इलाज लंबे समय तक 20 से 24 माह का होता था लेकिन अब इसमें भी कमी आई है। इसमें यह तीन प्रकार की अवधि में इलाज रोगियों की स्थिति के आधार पर 6 से 9, 12 और 18 से 20 माह तक का ही होगा।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी होगा इलाज
पहले बिगड़ी टीबी का इलाज सिर्फ जिला स्तर के अस्पतालों में किया जाता था। इसमें रोगियों को इंजेक्शन सहित अन्य दवाइयों दी जाती थीं। संबंधित इलाज के लिए रोगियों को बड़े अस्पतालों में ही आना पड़ता था लेकिन अब ये रोगी अपने क्षेत्र की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी अपना इलाज करवा सकते हैं। इसमें रोगियों को जिला अस्पताल से स्वास्थ्य केंद्रों पर उनके लिए दवाइयां दी जा रही हैं। दवाइयों को उनके परिवार का कोई भी सदस्य मुहैया करवा सकता है।
दवा से इलाज के लिए प्रदेश में अधिसूचना की है जारी
जिला कार्यक्रम अधिकारी और टीबी मेडिसन विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने बताया कि बढ़ रहे बिगड़ी टीबी (एमडीआर टीबी) के मरीजों की तुरंत पहचान और उपचार टीबी उन्मूलन का स्तंभ है। जिले में अभी तक 68 के करीब बिगड़ी टीबी के मरीज हैं। ये सभी सरकारी प्रणाली के तहत उपचाराधीन है। प्रदेश में नई टीबी की दवाइयां जैसे डेलामिंड और बिडाक्वीन भी उपचार के लिए दी जा रही है। बिगड़ी हुई टीबी का इलाज 6 माह से 12 माह के कोर्स से संभव है। हालांकि कुछ मरीजों में अभी भी 18 से 20 माह की दवा दी जाती है जिसमें दवा से ही इलाज किया जाएगा।