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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Life-saving injections have been missing for three months, increasing the heartbeat of heart attack patients.

Solan News: तीन माह से जीवनरक्षक इंजेक्शन गायब, हार्ट अटैक मरीजों की बढ़ीं धड़कनें

Sun, 05 Apr 2026 11:50 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Apr 2026 11:50 PM IST
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जिला अस्पताल में टेनेक्टोप्लेस इंजेक्शन की सप्लाई ठप
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स्वास्थ्य विभाग को तीन माह से भेजा जा रहा रिमाइंडर
सरकारी अस्पताल में निशुल्क, निजी अस्पतालों में 50 हजार का है इंजेक्शन
जिले में हर माह आ रहे हैं 10 से 15 मामले, मरीजों को होती है परेशानी

संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के अस्पतालों में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए टेनेक्टोप्लेस इंजेक्शन की सप्लाई तीन माह बाद भी नहीं पहुंची है। इससे हार्ट अटैक के मरीजों के आने पर जहां उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है, वहीं अस्पताल प्रशासन को भी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। कई बार इंजेक्शन न मिलने पर मरीजों के परिजन हंगामा भी कर देते हैं। उन्हें बाहर से इंजेक्शन मंगवाना पड़ता है। इसकी कीमत इतनी अधिक है कि गरीब लोग इसे खरीद नहीं पाते।
बताया जा रहा है कि सरकार जिस कंपनी से इंजेक्शन की खरीद करती है, उसका भुगतान नहीं किया गया है। इससे सप्लाई बाधित हो गई है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है और जल्द ही टेंडर अलॉट होते ही नई सप्लाई पहुंच जाएगी। जिले के क्षेत्रीय अस्पताल सोलन समेत कई अन्य अस्पतालों में पिछले तीन माह से इस इंजेक्शन का स्टॉक नहीं है। अस्पताल प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग को कई बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो पाया है। अक्सर मरीज जब सरकारी अस्पताल में पहुंचते हैं और इंजेक्शन न होने का पता चलता है, तो वे नजदीकी निजी अस्पतालों का रुख करते हैं।
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सरकारी अस्पतालों में हार्ट अटैक के मरीजों को यह इंजेक्शन निशुल्क लगाया जाता है, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी कीमत 40 से 50 हजार रुपये तक है। इससे गरीब परिवारों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। बीते तीन माह में जिले के अस्पतालों में करीब 50 मरीज हार्ट अटैक के आ चुके हैं। ऐसे में यदि उन्हें अस्पताल में इंजेक्शन नहीं मिलता, तो उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
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हार्ट अटैक के मरीजों के लिए संजीवनी है इंजेक्शन
टेनेक्टोप्लेस इंजेक्शन हार्ट अटैक के मरीजों के लिए संजीवनी का काम करता है। यह इंजेक्शन हार्ट अटैक के बाद चार से छह घंटे के भीतर लगाना जरूरी होता है। इससे मृत्युदर 30 से 40 फीसदी तक कम आती है। इसमें मौजूद दवा नसों में जमे खून के थक्कों को तेजी से घोलकर रक्त प्रवाह बहाल करने में मदद करती है। यह एक आपातकालीन दवा है, जो केवल अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में नस के जरिए दी जाती है।

कई बार दी इंजेक्शन खत्म होने की जानकारी
इंजेक्शन का स्टॉक खत्म होने के बारे में पहले भी सरकार को कई बार जानकारी दी गई है। अब तक इसकी सप्लाई नहीं हो पाई है। विभाग समय-समय पर सरकार को रिमाइंडर भेज रहा है, ताकि मरीजों को जल्द सुविधा मिल सके। हालांकि, नालागढ़ अस्पताल में कुछ डोज बची हुई थीं, जिन्हें आपात स्थिति में मंगवाकर लगाया जा रहा है।
डॉ. राकेश पंवार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला सोलन
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