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Solan News: लैंड लूजरों ने ढुलाई कार्य में प्राथमिकता न मिलने पर दी हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी
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सुल्ली व रौड़ी सीमेंट प्लांट के लिए दी है किसानों ने अपनी जमीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। अंबुजा सीमेंट कंपनी के रौड़ी सीमेंट प्लांट से जुड़े ढुलाई कार्य में प्रभावित किसानों (लैंड लूजरों) को प्राथमिकता देने की मांग तेज हो गई है। यदि सरकार ने जल्द इस दिशा में कदम नहीं उठाया, तो प्रभावित किसान प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।दाड़लाघाट के पूर्व पंचायत सदस्य एवं प्रभावित किसान सभा के अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने कहा कि वर्ष 1992 में दाड़लाघाट के सुल्ली सीमेंट प्लांट और वर्ष 2008 में रौड़ी गांव में स्थापित दूसरे सीमेंट प्लांट के लिए किसानों की जमीनें अत्यंत कम मूल्य पर अधिग्रहित की गईं। इसके चलते कई किसान भूमिहीन और मकान हीन हो गए। कहा कि इन किसानों की जमीनों के कारण ही आज प्रदेश और देश के लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है तथा सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसके बावजूद उन्हीं प्रभावित किसानों को पर्याप्त ढुलाई कार्य नहीं मिल पा रहा है। प्रभावित किसानों के पास अब आजीविका का मुख्य साधन केवल उनकी गाड़ियां ही हैं, लेकिन काम की कमी के कारण ये गाड़ियां खड़ी हो रही हैं। प्रभावित किसान कई बार सरकार से मांग कर चुके हैं कि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ढुलाई कार्य दिया जाए, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रभावित किसान जल्द ही इस मामले को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे, ताकि उनके रोजगार को सुरक्षित किया जा सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। अंबुजा सीमेंट कंपनी के रौड़ी सीमेंट प्लांट से जुड़े ढुलाई कार्य में प्रभावित किसानों (लैंड लूजरों) को प्राथमिकता देने की मांग तेज हो गई है। यदि सरकार ने जल्द इस दिशा में कदम नहीं उठाया, तो प्रभावित किसान प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।दाड़लाघाट के पूर्व पंचायत सदस्य एवं प्रभावित किसान सभा के अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने कहा कि वर्ष 1992 में दाड़लाघाट के सुल्ली सीमेंट प्लांट और वर्ष 2008 में रौड़ी गांव में स्थापित दूसरे सीमेंट प्लांट के लिए किसानों की जमीनें अत्यंत कम मूल्य पर अधिग्रहित की गईं। इसके चलते कई किसान भूमिहीन और मकान हीन हो गए। कहा कि इन किसानों की जमीनों के कारण ही आज प्रदेश और देश के लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है तथा सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसके बावजूद उन्हीं प्रभावित किसानों को पर्याप्त ढुलाई कार्य नहीं मिल पा रहा है। प्रभावित किसानों के पास अब आजीविका का मुख्य साधन केवल उनकी गाड़ियां ही हैं, लेकिन काम की कमी के कारण ये गाड़ियां खड़ी हो रही हैं। प्रभावित किसान कई बार सरकार से मांग कर चुके हैं कि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ढुलाई कार्य दिया जाए, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रभावित किसान जल्द ही इस मामले को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे, ताकि उनके रोजगार को सुरक्षित किया जा सके।